दिल के दौरे से युवाओं की मौत का कारण कोरोना टीका? हो भी सकता है, और नहीं भी!

टीम डायरी

दिल का दौरा पड़ने से कम उम्र के लोगों की मौत के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अभी कर्नाटक के हासन में एक महीने के भीतर 20 से अधिक युवाओं की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है। इनमें से ज्यादातर 18 से 45 साल के बीच वाले लोग हैं। इन घटनाओं के बाद राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आशंका जताई है कि दिल का दौरा पड़ने से कम उम्र के लोगों की मौत का कारण कोरोना का टीका हो सकता है। उनके मुताबिक, चूँकि दुनियाभर में लगभग सभी कोरोना टीके बिना मुकम्मल अनुसन्धान के ही जल्दबाजी में मंजूर किए गए थे। इसलिए सम्भव है कि उनके दुष्परिणाम अब इस रूप में नजर आ रहे हों। ऐसे मामलों की गहन जाँच होनी चाहिए। 

सिद्धारमैया की बात बेदम नहीं है क्योंकि बीते एक-दो साल से कम उम्र के लोगों की दिल का दौरा पड़ने से अचानक मौत होने के मामले भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में बढ़े हैं। इससे सम्बन्धित खबरें लगातार सामने आ रही हैं कि कभी कोई क्रिकेट खेलते-खेलते अचानक सीने में जकड़न की वजह से जमीन पर बैठा और उसकी वहीं मौत हो गई। कभी किसी को कसरत करते-करते दिल का दौरा पड़ गया और कहीं नाचते-नाचते किसी का दिल बैठ गया। इस तरह के मामलों में इतना समय भी नहीं मिल रहा है कि जिसे दिल का दौरा पड़ा, उसे अस्पताल ले जाया जा सके। देखते ही देखते परिजनों, परिचितों की आँखों के सामने जान चली जाती है।

इसीलिए यह सवाल उठा है कि अचानक एक-दो सालों में ऐसा क्या हुआ, जो इस तरह लोगों की जान पर बन आई है। हाल-फिलहाल कोरोना महामारी और आनन-फानन में सभी को उससे बचाव के टीके लगाए जाने के अलावा कोई अन्य कारण नजर नहीं आता। हालाँकि भारतीय चिकित्सा अनुसन्धान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केन्द्र के संयुक्त अध्ययन के शुरुआती निष्कर्षाें के आधार पर यह कहा जा रहा है कि कोरोना टीका और दिल के दौरे से मौत के बढ़े मामलों का कोई सम्बन्ध नहीं है। मतलब कोरोना टीकों को इस तरह की मौतों का कारण फिलहाल तो नहीं माना जा सकता। अलबत्ता अध्ययन के विस्तृत निष्कर्ष अभी आने हैं। 

यद्यपि, इसी तरह का एक अध्ययन बड़े पैमाने पर दक्षिण कोरिया में हुआ है। इसमें 33 लाख 50 हजार 855 लोगों को शामिल किया गया। ये सभी अलग-अलग आयु वर्ग के थे। उन्हें अलग-अलग समूहों में बाँटकर उन पर अध्ययन किया गया। वहाँ के नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की वेबसाइट पर इस अध्ययन के निष्कर्ष और विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध है। इस अध्ययन के निष्कर्षों में स्पष्ट कहा गया है कि कोरोना का एमआरएनए टीका लगवाने वालों को, खास तौर पर युवाओं को, दिल का दौरा पड़ने का जोखिम अधिक है। 

मतलब, कोरोना टीके से दिल के दौरे के जोखिम को पूरी तरह खारिज करना भी ठीक नहीं है। अध्ययन होने चाहिए। निष्कर्ष जल्दी आने चाहिए। ताकि लोगों का जीवन बचाया जा सके।

सोशल मीडिया पर शेयर करें
Neelesh Dwivedi

Share
Published by
Neelesh Dwivedi

Recent Posts

जनगणना हो रही है, जनसंख्या बढ़ रही है और आंध्र में आबादी बढ़ाने वालों को ‘इनाम’!

देश में जनगणना होने वाली है। मतलब जनसंख्या कितनी है और उसका स्वरूप कैसा है,… Read More

16 hours ago

एक यात्रा, दो मुस्लिम ड्राइवर और दोनों की सोच….सूरत-ए-हाल गौरतलब!

अभी एक तारीख को किसी जरूरी काम से भोपाल से पन्ना जाना हुआ। वहाँ ट्रेन… Read More

3 days ago

सेवा-तीर्थ में ‘भारतीय भाषाओं’ की सेवा नहीं हुई, आगे शायद ही हो!! वीडियो से समझिए!

भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर का उद्घाटन 13 फरवरी 2026 को हुआ। इसे… Read More

6 days ago

भ्रष्ट-आचार अब एक शिष्ट-विचार, इसे खत्म करना मुश्किल, दो उदाहरणों से समझिए कैसे?

‘भ्रष्ट’ का अर्थ है- जब कोई अपने धर्म (कर्तव्य-पथ) से दूर हट जाए और ‘आचार’… Read More

7 days ago

ईस्ट इण्डिया कम्पनी फिर ‘दफन’, और ‘गुलाम-सोच’ लिखती है- “सूरज डूब गया”!

ऐसी सूचना है कि अंग्रेजों की ईस्ट इण्डिया कम्पनी फिर दिवालिया हो गई और उसका… Read More

1 week ago