‘भभ्भड़ संस्कृति’ ने कृतार्थ को अस्पताल पहुँचा दिया, अब उनसे ही सुनिए क्या कहते हैं!

टीम डायरी

अंग्रेजी का एक शब्द है, ’हसल’। मतलब- धक्का-मुक्की करके, भभ्भड़ करते हुए आगे बढ़ते जाना। आजकल यह शब्द उन लोगों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है, जो जीवन में ‘सफलता’ (यानि अधिकांश लोगों के लिए अधिक से अधिक पैसा और आरामतलब ज़िन्दगी) पाने के लिए दिन-रात एक कर देते हैं।

इस क़िस्म के लोग कुल 24 घंटों में महज़ 5-6 घंटे ही नींद लेते हैं। ठीक से खाने-पीने की उनके पास फ़ुर्सत नहीं होती। चलते-फिरते जो कुछ ऊटपटाँग मिल जाए, खा लेते हैं। बस, जल्दी से कुछ पेट में पहुँच जाना चाहिए। दूसरों से मिलने-जुलने या किसी से बातचीत के लिए वक़्त निकालने की तो ऐसे लोगों से उम्मीद भी नहीं की जाती। क्योंकि इस सबको वे वक़्त की बर्बादी समझते हैं, जो उनकी तरक़्क़ी की राह में रोड़ा भी होती है। इस तरह वे पूरे समय काम, काम और बस, काम ही करते रहते हैं। ऐसे कामकाज़ी जीवन को अंग्रेजी में ‘हसल कल्चर’ कहा जाता है। हिन्दी में इसे ‘भभ्भड़ संस्कृति’ कह लिया जाए तो क्या ही बुरी बात होगी भला, और कौन बुरा मानेगा? 

तो अभी दो-तीन दिन पहले तक इस ‘भभ्भड़ संस्कृति’ के घनघोर समर्थक कृतार्थ मित्तल भी होते थे। अस्पताल के बिस्तर पर धरी उनकी काया की तस्वीर और सोशल मीडिया मंच- ‘एक्स’ पर लिखी पोस्ट नीचे दी है। पढ़ी जा सकती है। कृतार्थ ने ‘भभ्भड़ संस्कृति’ पर भरोसा करने वाले अपने जैसे लोगों को सन्देश दिया है, “हसल कल्चर अपनी कीमत वसूलता है। किसी को तुरन्त चुकानी होती है। किसी को 10-15 बरस बाद। विकल्प आपको चुनना है। मैंने यहाँ से इसका बदसूरत पहलू आपको दिखाया है। ताकि आप आसानी से इसके लपेटे में न आएँ।”

कृतार्थ इस समय मुम्बई के एक अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें यहाँ ‘नर्वस ब्रेकडाउन’ होने से भर्ती कराया गया था। यह ऐसी मानसिक व्याधि है, जिससे पीड़ित व्यक्ति अचानक तेज-तेज रोने लगता है। या बुरी तरह डर जाता है। या बहुत ज़्यादा चिन्ता करने लगता है। या ख़ूब गुस्सा हो जाता है। साँस लेने में तक़लीफ़ भी हो जाती है कभी-कभी। जीवन से अरुचि हो जाती है। यहाँ तक कि ऐसा व्यक्ति कभी-कभी आत्महत्या के बारे में भी सोचने लगता है। जानकार बताते हैं कि जीवन में तनाव और अवसाद जब बर्दाश्त से बाहर हो जाता है, तो ‘नर्वस ब्रेकडाउन’ होता है।

कृतार्थ के साथ यही हुआ। हालाँकि अब उनकी हालत ठीक है। उनका स्वास्थ्य तो ठीक हो ही रहा है, इस एक झटके ने उनकी सोच भी दुरुस्त कर दी है। वैसे एक जानकारी और कि कृतार्थ एक सफल उद्यमी हैं। उन्होंने ‘सोशल्स’ नाम की एक एप्लीकेशन बनाई है, जो सोशल मीडिया के माध्यम से पहचान बनाने और पैसा कमाने की इच्छा रखने वालों को हर तरह की मदद उपलब्ध कराती है। बस, इस मदद के लिए थोड़े पैसे खर्चने होते हैं।

सोशल मीडिया पर शेयर करें
Neelesh Dwivedi

Share
Published by
Neelesh Dwivedi

Recent Posts

पर्यावरण दिवस, ईंधन बचाने की बातें और निजी कारों का ऐसा तमाम-जाम, दिलचस्प है न?

मैं बेंगलुरू में जहाँ रहता हूँ, वहाँ अपने घर के सामने रोज इस तरह का… Read More

6 hours ago

लिंक्डइन के जरिए नौकरी का जाल, चीन से पाँच देशों की जासूसी, भारतीय भी सावधान रहें!

लिंक्डइन के जरिए नौकरी का जाल बिछाकर, रोजगार की तलाश कर रहे लोगों को काम… Read More

1 day ago

‘शिक्षक’ ने अपने कौड़ी के ज्ञान से ‘पत्रकार’ को दो कौड़ी का साबित कर दिया, देखिए वीडियो!

देश की एक जानी-मानी ‘पत्रकार’ ने ऑनलाइन पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए कह दिया कि… Read More

2 days ago

क्या हम भारतीयों को सार्वजनिक नियम-कायदे मानने की तमीज नहीं? अभी बहस तो यही है!

अभी एक-दो दिन से मीडिया-सोशल मीडिया में यह बहस चल रही है कि हम भारतीयों… Read More

3 days ago

अपने हिस्से का योगदान दीजिए, वरना लू के थपेड़ों से रोज 3,400 लोग मरने लग जाएँगे!

एक नया अध्ययन हुआ है। इसमें भारत और उसके आस-पास के देशों में लगातार बढ़ती… Read More

4 days ago

इस लड़की ने दो लाख की नौकरी छोड़कर 60 हजार रुपए महीने में खुशी खरीदी है!

खुशी पाने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते। ज्यादातर लोग अमूमन बड़ी से बड़ी नौकरी… Read More

5 days ago