दूसरे देशों में गए भारतीय पेशेवर भारत लौटे भी, तो क्या सच में कोई लाभ होगा?

निकेश जैन, इन्दौर मध्य प्रदेश

देश के अगर एक प्रतिभाशाली पेशेवर ने भारत छोड़ने का फैसला किया है, तो सच्चाई यह भी है कि इस तरह के 10 लोगों ने यहीं रुके रहने का निर्णय भी लिया है। इसीलिए मेरी राय में, भारत के लिए कुछ निर्माण (तकनीक के क्षेत्र में) के लिहाज से प्रतिभाओं की कमी का मसला आड़े नहीं आता है। बल्कि यह तथ्य आड़े आता है कि जिन लोगों ने भारत में रुकने का फैसला किया, उन्होंने वास्तव में किया क्या है? यही बात मायने रखती है। 

पूरी संभावना है कि, भारत में रुके रहने का फैसला लेने वाले सूचना-तकनीक के पेशेवर देश में ही स्थित किसी जीसीसी (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेन्टर, मतलब ऐसे केन्द्र जो दूसरे देशों की गूगल, अमेजॉन, जैसी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने भारत में खोले हुए हैं। क्योंकि यहाँ पर कम पैसों काम करने वाले उपलब्ध हो जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक भारत में लगभग 1,700 जीसीसी संचालित हैं। इनमें 19 लाख के करीब लोग काम कर रहे हैं।) में काम कर रहे होंगे। यानि उन्होंने इन जीसीसी में जो भी बनाया, वह अमेरिकी और विदेशी कम्पनियों तथा अमेरिका जैसे देशों के लिए बनाया। क्योंकि जीसीसी मूल रूप से विदेशी कम्पनियों के थे। मूल मुद्दा इतना ही है।

इसीलिए मेरे हिसाब से भारत को आज अगर किसी चीज की जरूरत है, तो वह है एक ‘इच्छा’, ‘जोखिम उठाने की क्षमता’ और एक ऐसा ‘पारिस्थितक तंत्र’ जो भारत में, भारत के लिए ही नहीं, भारत से पूरी दुनिया के लिए कुछ अच्छा निर्माण (तकनीक के लिहाज से) कर सके। मेरा मानना है कि अगर दूसरे देशों में रह रहे भारतीय पेशेवर आज भारत लौट भी आते हैं, और यहाँ आकर किसी न किसी जीसीसी में ही काम करते हैं, तो इससे देश को उनके लौटने से कोई खास लाभ नहीं होने वाला। भारत को लाभ होगा देश में बनी तकनीक और उत्पादों से।  

भारत के पास आज भी प्रतिभाशाली पेशेवरों की कमी नहीं है। उसे बस कुछ ऐसे उद्यमियों की जरूरत है जो जोखिम उठा सकें, और एक ऐसे पारिस्थितिक तंत्र की भी, जो उनका साथ दे सके। दूसरे देशों में रहने वाले भारतीय पेशेवरों का ज्यादा बेहतर योगदान वास्तव में यह होगा कि वे भारत की नई कम्पनियों के पारिस्थितिक तंत्र (स्टार्टअप इकोसिस्टम) में निवेश करें। हमारी कम्पनी एड्यूरिगो को ऐसे चार भारतवंशी निवेशकों का साथ मिला है। उस निवेश के संबल पर हम लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और देश के तकनीक-निर्माण क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। 

इसी आधार पर इस विषय में मेरी राय श्री श्रीधर वेम्बु जी (सूचना-तकनीक क्षेत्र की भारतीय कम्पनी जोहो के संस्थापक, जिन्होंने भारतवंशी पेशेवरों से भारत लौटने की अपील की है।) से थोड़ी अलग हो जाती है। 

क्या आप मेरी राय से सहमत हैं? 

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निकेश का मूल लेख

For every one talent who left India other 10 decided to stay back!!

So building for India was NEVER a talent issue in my opinion…..

What did these 10 guys do who stayed back – that matters.

In all likelihood,

They worked for a GCC (read Oracle, SAP, Google, Amazon etc) in India.

Whatever they built there belonged to US because GCC belonged to US.

As simple as that.

What India needs is a “desire”, “risk appetite” and “eco system” to build in India – for India and – for the world.

Another thousands of NRIs returning back to India and working for a GCC won’t do any good to India’s desire to build homegrown products.

In fact the better contribution from these NRIs could be the investment (angel or other ways) in the startup eco system here.

Edurigo is supported by 4 such NRIs angel investors 🙏

So, on this particular topic I politely disagree with Mr. Sridhar Vembu sir🙏

India has enough local talent available;

All it needs is some risk taking entrepreneurs and supporting eco system.

Agree? 

—— 

(निकेश जैन, सूचना-तकनीक क्षेत्र की कंपनी- एड्यूरिगो टेक्नोलॉजी के सह-संस्थापक हैं। उनकी अनुमति से उनका यह लेख अपेक्षित संशोधनों और भाषायी बदलावों के साथ #अपनीडिजिटलडायरी पर लिया गया है। मूल रूप से अंग्रेजी में उन्होंने इसे लिंक्डइन पर लिखा है।)

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निकेश के पिछले 10 लेख

80 – वो भी क्या दिन थे, ये भी क्या दिन हैं, …क्योंकि वक्त हमेशा बदलता है!
79 – सोचिए, अगर दो-ढाई करोड़ युवा सड़कों पर बेरोजगार घूमते रहते, तो क्या होता!
78 – बिना इंजन वाला भारतीय जहाज ‘कौण्डिन्य’ मस्कट पहुँच गया, तो इससे क्या हासिल हुआ?
77 – इन्दौर : आपने हमें विफल कर दिया, साफ शहर में गन्दे पानी से मौतें, शर्मनाक!
76 – इण्डिगो संकट : क्या भारत सरकार अब वन्दे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के बारे में सोचेगी?
75 – कुछ बड़ा करने के लिए सबसे जरूरी है खुद पर भरोसा, ऋग्वेद के उदाहरण से समझें
74 – अगर हम अभी नहीं जागे, तो हर जगह सिर्फ ‘फर्जी कन्टेन्ट’ ही देखते रह जाएँगे!
73 – चीन ने यूट्यूब, अमेजॉन, जैसे सॉफ्टवेयर बना लिए, भारत नही बना पाया, क्योंकि…!
72 – करीब 2,500 साल पुरानी चाणक्य की सोच और सबक आज भी प्रासंगिक कैसे है?
71 – अमेरिकी एच1बी वीजा महँगा हुआ, ये भारतीयों के लिए फायदेमन्द या नुकसानदेह?

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