सांकेतिक तस्वीर
निकेश जैन, इंदौर मध्य प्रदेश
…और उनका ग्रीन कार्ड हासिल करने का सपना टूट गया!
कोई तो उन भारतीयों को नींद से जगाए और बताए कि वह ‘उनका देश’ नहीं है। अमेरिका में इस वक्त 10 लाख से भी ज्यादा लोग ग्रीन कार्ड (स्थायी नागरिकता सम्बन्धी) हासिल करने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। मगर अब अमेरिकी सरकार ने नया नियम लागू कर दिया है। इसके कारण इन सभी लोगों को फिलहाल अमेरिका छो़ड़ना पड़ेगा। अपने देश लौटना होगा और यहाँ से ग्रीन कार्ड सम्बन्धी सभी औपचारिकता पूरी करनी होगी!!
सच कहूँ तो आज की स्थिति में अगर मैं अमेरिका में होता, तो तुरंत इन विकल्पों काे अपनाता..
1 – अपना बोरिया-बिस्तर समेटता, जितनी भी कमाई वहाँ की है उसका हिसाब-किताब करता और भारत लौट आता, हमेशा के लिए। भारत लौटने के लिए अगर जिस कम्पनी में काम कर रहा होता, उसी में स्थानांतरण मिल जाता, तो सबसे बढ़िया विकल्प रहता। बेंगलुरू, पुणे, हैदराबाद में बच्चों के लिए शानदार स्कूल हैं। इन्हीं में से किसी शहर में किराए का मकान लेता या खरीद लेता एक, और शांति से रहने लगता।
2 – लेकिन मान लीजिए कि कम्पनी मुझे भारत स्थानांतरित करने से मना कर देती तो? तब भी मैं भारत लौटना ही पसंद करता। यहाँ आकर कोई नई नौकरी पकड़ता या फिर कारोबारी हुनर आजमाकर अपना कोई कारोबार शुरू करता। यहाँ, भारत में सूचना-तकनीक के क्षेत्र में काम करने के लिए बहुत मौके हैं। नए-नए सॉफ्टवेयर, आदि बनाकर यहाँ से दुनियाभर में बेचे जा रहे हैं, मैं भी ऐसे अवसर का पूरा फायदा उठाता।
यह सब आप भी कर सकते हैं। करना चाहिए। क्योंकि यह अपने आत्मसम्मान का मसला है। गैरत का मसला। इसे बचाए रखने की जरूरत है। हमारे अलावा कोई और इसे नहीं बचा सकता। हाँ, मानता हूँ कि भारत में अपनी तरह की चुनौतियाँ हैं। पर याद रखिए कि यह हमारा अपना मुल्क है। यहाँ कोई हमें कम से कम फुटबॉल बनाकर तो यहाँ-वहाँ नहीं खेलेगा। कम से कम मेरा मानना तो यही है।
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निकेश का मूल लेख
And here goes your green card dream!
Someone just woke Indians up to reality that it’s not *your* country.
Over 1 million Indians are currently waiting for their green card!
Because of this new rule hundreds of thousands will have to leave the United States and complete their green card process via consular processing in India!!!
If I were in US today in the similar situation this is what I would do:
– Pack your bags, count your $$ and move back to India
– If you can take an internal transfer that’s the best way to relocate
– Bangalore, Pune, Hyderabad offer wonderful schools for your kids
– Rent or buy a house in a nice community and live peacefully
– If you have entrepreneurship appetite take a chance and build here
– There are ample of opportunities to build enterprise products which can be sold across the globe
– Every existing enterprise grad platform is waiting to be re-written
– You can build better platforms with native Ai built in and offer at better cost
– US small and medium businesses can’t afford expensive SaaS licenses and there is a shift; use the opportunity
Yes, India has it’s own challenges but no one will play football with you here.
It’s your self respect and you need to protect that.
Thoughts?
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(निकेश जैन, मूल रूप से इंदौर के रहने वाले हैं। व्यावसायिक सुविधा के लिहाज से बेंगलुरू में भी उनका निवास है। वह सूचना-तकनीक क्षेत्र की कंपनी- एड्यूरिगो टेक्नोलॉजी के सह-संस्थापक हैं। उनकी अनुमति से उनका यह लेख अपेक्षित संशोधनों और भाषायी बदलावों के साथ #अपनीडिजिटलडायरी पर लिया गया है। मूल रूप से अंग्रेजी में उन्होंने इसे लिंक्डइन पर लिखा है।)
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निकेश के पिछले 10 लेख
83 – हम ईंधन बचाते हैं और अपना समय भी, क्योंकि हमें अमेरिकी महँगाई भारत नहीं लानी!
82 – पुणे और बेंगलुरू के यातायात के लिए आज अगर कोई उम्मीद है, तो वह मेट्रो!
81 – दूसरे देशों में गए भारतीय पेशेवर भारत लौटे भी, तो क्या सच में कोई लाभ होगा?
80 – वो भी क्या दिन थे, ये भी क्या दिन हैं, …क्योंकि वक्त हमेशा बदलता है!
79 – सोचिए, अगर दो-ढाई करोड़ युवा सड़कों पर बेरोजगार घूमते रहते, तो क्या होता!
78 – बिना इंजन वाला भारतीय जहाज ‘कौण्डिन्य’ मस्कट पहुँच गया, तो इससे क्या हासिल हुआ?
77 – इन्दौर : आपने हमें विफल कर दिया, साफ शहर में गन्दे पानी से मौतें, शर्मनाक!
76 – इण्डिगो संकट : क्या भारत सरकार अब वन्दे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के बारे में सोचेगी?
75 – कुछ बड़ा करने के लिए सबसे जरूरी है खुद पर भरोसा, ऋग्वेद के उदाहरण से समझें
74 – अगर हम अभी नहीं जागे, तो हर जगह सिर्फ ‘फर्जी कन्टेन्ट’ ही देखते रह जाएँगे!
मैं बेंगलुरू में जहाँ रहता हूँ, वहाँ अपने घर के सामने रोज इस तरह का… Read More
लिंक्डइन के जरिए नौकरी का जाल बिछाकर, रोजगार की तलाश कर रहे लोगों को काम… Read More
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एक नया अध्ययन हुआ है। इसमें भारत और उसके आस-पास के देशों में लगातार बढ़ती… Read More
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