भारत-इंग्लैण्ड टेस्ट श्रृंखला : अंग्रेजों को हमने दिखा दिया, ‘जेन्टलमैन्स गेम’ क्या होता है!

टीम डायरी

भले यह पूरी तरह से सच न हो, लेकिन क्रिकेट के खेल को अंग्रेज ‘अपना’ मानते हैं। वे नस्ली तौर पर खुद को श्रेष्ठ भी समझते हैं। शायद इसी तरह की सोच के कारण वे क्रिकेट के खेल को ‘जेन्टलमैन्स गेम’ भी कहते हैं। मतलब भद्र, सभ्य या अभिजात्य वर्ग (जो धन, शक्ति, प्रभाव और सामाजिक स्थिति में श्रेष्ठ हो, इसे कुलीन वर्ग भी कहते हैं) का खेल। हालाँकि भारत-इंग्लैण्ड के बीच पाँच दिवसीय मैचों की जारी श्रृंखला में अंग्रेजों की ‘कथनी और करनी’ में अन्तर साफ दिखा। मैदान पर हल्की-फुल्की बहस या झड़प तो चलिए आम बात समझ लीजिए मगर श्रृंखला के दौरान एक-दो मौके ऐसे भी आए, जब अंग्रेजों के आचरण को ‘श्रेष्ठ’ या ‘भद्र’ तो कतई नहीं कहा जा सकता। 

याद कीजिए चौथा टेस्ट मैच। ओल्ड ट्रैफर्ड के मैदान पर हुए उस मैच के पहले ही दिन भारतीय उपकप्तान ऋषभ पन्त के दाहिने पैर में चोट लगी थी। बल्लेबाजी करते वक्त उनके पैर में गेंद लग गई थी। इस कारण उन्हें तब मैदान से बाहर जाना पड़ा था। बाहर चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान पता चला उनके पैर के पंजे की हड्‌डी टूट गई है। इससे आशंका हुई कि वे शायद अब दोबारा खेलने नहीं आ सकेंगे। मगर मैच के दूसरे दिन जब भारतीय टीम शार्दुल ठाकुर का विकेट खो चुकी थी, तब जुझारू प्रवृत्ति के पन्त बल्लेबाजी करने मैदान में फिर उतर आए। एक पैर से लंगड़ाते हुए। अलबत्ता उनके आने का असर ऐसा हुआ कि अंग्रेज खिलाड़ी अपनी ‘भद्रता’ को भुला ही बैठे। वे जानबूझकर पन्त के उसी पैर पर गेंद पटकने की कोशिश करने लगे, जिसकी हड्‌डी टूटी हुई थी। ऐसा कई बार हुआ। और यह करने वालों में खुद इंग्लैण्ड टीम के कप्तान बेन स्टोक्स भी थे। हालाँकि पन्त इसके बावजूद न सिर्फ बल्लेबाजी में डटे रहे, बल्कि उन्होंने अर्धशतक भी पूरा किया। अपनी टीम को भी अच्छे स्कोर तक पहुँचाया।

अब जानिए पाँचवें टेस्ट मैच की घटना के बारे में। ओवल मैदान पर चल रहे इस मैच के पहले ही दिन का मामला है। मैदान पर करुण नायर और वाँशिंगटन सुन्दर बल्लेबाजी कर रहे थे। करुण ने शॉट खेला और रन लेने के लिए दौड़ पड़े। दोनों बल्लेबाजों ने दौड़कर तीन रन पूरे कर लिए थे। उनके पास भागकर ही चौथा रन लेने का मौका था। लेकिन तभी करुण ने देखा कि क्षेत्ररक्षण कर रहे इंग्लैण्ड के खिलाड़ी क्रिस वोक्स मैदान पर गिर गए हैं और वे दर्द से कराह रहे हैं। उनके कन्धे में चोट लग गई थी। यह देखते ही करुण ने चौथा रन लेने से मना कर दिया। यद्यपि वे चौथा रन ले भी लेते तो उन्हें कोई कुछ कहता नहीं, टीम के और उनके अपने आँकड़े में रन ही जुड़ते। लेकिन उन्होंने सही मायनों में ‘भद्रता’ का परिचय दिया। इस तरह उन्होंंने अंग्रेजों को ‘उन्हीं के खेल’ में उनकी ही जमीन पर दिखा दिया कि खेल में भद्रता और खेल-भावना क्या होती है। कथनी-करनी में समानता कैसे रखते हैं।

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Neelesh Dwivedi

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