इस तरह के एयर-शो में विमानों को खरीद-फरोख्त के लिए पेश किया जाता है।
टीम डायरी
सूचना यह है कि दुबई में एयर-शो के दौरान भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान ‘तेजस’ दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान उड़ा रहे भारतीय वायु सेना के पायलट विंग कमाण्डर नमांश सयाल का हादसे में निधन हो गया। ‘एयर शो’ के दौरान नमांश शुक्रवार, 21 नवम्बर को जब हवा में करतब दिखा रहे थे, उसी दौरान विमान तेजी से नीचे आया। इसके बाद उसे वापस ऊपर की ओर जाना था। लेकिन जैसा बताया जा रहा है, विमान का सन्तुलन गड़बड़ा गया और वह जमीन से टकराकर आग के गोले में बदल गया। पायलट को बाहर निकलने का वक्त नहीं मिला।
जानकार बताते हैं कि विंग कमाण्डर सयाल भारतीय वायुसेना के एक अनुभवी और दक्ष पायलट थे। उन्हें लड़ाकू विमान उड़ाने का लगभग दो दशक का अनुभव था। यही नहीं, दुबई एयर शो में जिस तरह के करतब वह दिखा रहे थे, उनके लिए वे कोई बहुत मुश्किल या चुनौतीपूर्ण नहीं थे। इसे सीधे शब्दों में समझें तो पायलट के स्तर पर गलती की सम्भावना बेहद न्यूनतम मानी जा रही है। तो फिर क्या हुआ होगा? विमान में कोई तकनीकी खराबी, या कुछ और? इस सम्बन्ध में एक अन्य सूचना पर गौर करना होगा। अभी एक दिन पहले ही, 20 नवम्बर को भारत सरकार ने एक बयान जारी किया था। इसमें कहा था, “अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेजस को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। इसीलिए सोशल मीडिया के जरिए तेजस से तेल रिसाव की झूठी खबरें प्रसारित की और कराई जा रही हैं।”
सवाल है कि सोशल मीडिया पर तेजस से जुड़ा यह दुष्प्रचार कब हुआ? अभी दुबई एयर शो के दौरान ही। और कहाँ से किया गया दुष्प्रचार? सामने आई सूचनाओं की मानें तो पाकिस्तान और उसके समर्थकों से। वैसे, साल 1986 से चल रहे विश्व के सबसे बड़े विमानन मेले ‘दुबई एयर शो’ में सिर्फ तेजस ही नहीं, इससे पूर्व पाकिस्तान, चीन, अमेरिका और खुद मेजबान संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के भी विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। चीन का विमान चेंगदू जे-10सी साल 2019 में, अमेरिका का अग्रिम लड़ाकू विमान एफ-16 साल 2015 में और संयुक्त अरब अमीरात का युद्धक हवाई जहाज वर्ष 2013 में गिरा था। इस लिहाज से तेजस का गिरना भी हादसा मान सकते हैं।
लेकिन नहीं, पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय सेनाओं के ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के बाद जिस तरह की परिस्थितियों बनी हैं, उनमें तेजस के दुर्घटनाग्रस्त होने को महज हादसा मानना थोड़ा मुश्किल है। इसके मुख्य रूप से दो कारण हैं। पहला कि ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के दौरान फ्रांस के रफाल लड़ाकू विमानों पर भारतीय वायु सेना की निर्भरता से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले थे। बल्कि ऐन युद्ध के मौके पर कुछ अनापेक्षित परेशानियाँ ही पेश आईं थीं। वहीं दूसरी तरफ, रूसी सहयोग से भारत में बनी ब्रह्मोस मिसाइलों ने अपेक्षा से कहीं बेहतर नतीजे दिए थे।
इन दोनों कारणों से मिली-जुली स्थिति आगे यह बनी कि भारत ने पश्चिम से आयातित रक्षा साज-ओ-सामान पर निर्भरता कम करने फैसला कर लिया। साथ ही स्वदेशी रक्षा साज-ओ-सामान का न सिर्फ उत्पादन बढ़ाने का निर्णय किया, बल्कि दूसरे देशों को उसका निर्यात बढ़ाने का भी महात्त्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान ‘तेजस’ इसी लक्ष्य और योजना के अनुरूप ‘दुबई एयर शो’ में भेजा गया। अलबत्ता, भारत की इस योजना और लक्ष्य से जाहिर तौर पर अमेरिका, चीन, सहित दुनिया के कुछ अन्य देशों को तकलीफ है। और पाकिस्तान तो दुश्मन है ही, जो भारत की प्रगति को बाधित करने का हर मंसूबा पाले बैठा है। कोशिशें भी करता है।
लिहाजा, इन्हीं समीकरणों को देखते-समझते हुए तेजस के दुर्घटनाग्रस्त होने को महज हादसा मान लेने का विचार सहज रूप से दिमाग में ठहरता नहीं। यद्यपि असल कारण तो जाँच के बाद ही पता चलेगा, जिसके आदेश हो गए हैं। और क्या पता सही वजह सामने तब भी न आए, क्योंकि ऐसे अंतर्राष्ट्रीय मामलों में कोई गुत्थी होती भी है, तो उसकी सुलझन सहज रूप से आम लोगों के सामने आती नहीं है। इस मामले में देखते हैं, आगे!!
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