भाषायी आतंक : हिन्दी बोलने के ‘गुनाह’ पर इतना मारा कि उसने आत्महत्या कर ली!

टीम डायरी

यह आतंक का एक ऐसा प्रतिरूप है, जो पूरी दुनिया में सिर्फ और सिर्फ हिन्दुस्तान में ही देखने को मिलता है। यह है, ‘भाषायी आतंक’। इस देश में इसे रोकने की अब तक कभी कोई गम्भीर कोशिश नहीं हुई। बल्कि सत्ता प्रतिष्ठानों में बैठे जिन लोगों पर ऐसे मामलों को रोकने की जिम्मेदारी है, उन्हीं ने दशकों से लगातार इसे हवा दी है, क्योंकि इस तरह के भेद-विभेद से वोटों की फसल लहलहाती है। अलबत्ता, इस सबका नतीजा यह हुआ है कि ‘भाषायी आतंक’ अब लोगों की जान लेने लगा है। ताजा मामला महाराष्ट्र से सामने आया है। 

मुम्बई के कोलसेवाड़ी पुलिस थाने में एक मामला दर्ज हुआ है। कल्याण के रहने वाले जीतेन्द्र खैरे नामक व्यक्ति ने यह मामला दर्ज कराया है। उनके 19 साल के बेटे अर्नव ने 18 नवम्बर को आत्महत्या कर ली थी। जीतेन्द्र ने पुलिस के पास दर्ज शिकायत में कहा है कि उनके बेटे के साथ लोकल ट्रेन में पाँच-छह लोगों ने इसलिए मारपीट की क्योंकि वह मराठी नहीं बोल पाया था। उसे मराठी नहीं आती थी। वह हिन्दी बोलता था। इसी बात पर ट्रेन में उसकी कुछ लोगों से बहस हो गई, जो देखते ही देखते मार-पीट में बदल गई। 

जीतेन्द्र के मुताबिक, उनका “बेटा अच्छा-भला घर से निकला था। मुुलुण्ड के केलकर महाविद्यालय में वह विज्ञान संकाय से प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। उस रोज अम्बरनाथ-कल्याण लोकल ट्रेन से वह कॉलेज जाने के लिए निकला। मगर बीच रास्ते में मार-पीट की नौबत आ गई। इसके बाद वह डरा-सहमा सा घर लौट आया। घर आकर उसने घटना की जानकारी दी। उसे समझाया गया कि सब ठीक हो जाएगा। लेकिन वह इस घटना से इतना ज्यादा डर गया कि उसने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया।” पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।

पुलिस का काम है अलबत्ता, शिकायत मिलने पर जाँच करना। वह करती रहेगी। लेकिन क्या इससे भाषायी आतंक रुकेगा? नहीं, क्योंकि नेताओं की सरपरस्ती में यह आतंक इतनी तेजी से विभिन्न राज्यों फैल रहा है कि अगर इसके विरुद्ध हम-आप ही जागरूक नहीं हुए तो यह जानलेवा महामारी की तरह कई और लोगों को लील जाएगा। ध्यान रखिए, इससे नेता, नियम या कानून नहीं बचाएँगे, जागरूकता बचाएगी! 

सोशल मीडिया पर शेयर करें
Neelesh Dwivedi

Share
Published by
Neelesh Dwivedi

Recent Posts

56 साल के ‘युवा’ सत्ता के लिए आग भड़का रहे और 28 साल के देश को नई ऊँचाई दे रहे!

अभी सोमवार, 20 जुलाई को संसद का मॉनसून सत्र शुरू हुआ। इससे कुछ समय पहले… Read More

2 hours ago

वंदेमातरम

जय जय श्री राधे Read More

1 day ago

‘सरल भक्तमाल’- 11..: तर्क कोई कितने भी दे, वैष्णव भक्ति के मूल सम्प्रदाय तो चार ही हैं!

कलि युग में भक्ति मार्ग पाखण्ड से घिरा रहता है, इसलिए भगवान के भजन-पूजन, नाम… Read More

3 days ago

फिल्म ‘थ्री इडियट’ के फुनसुक वाँगड़ू नहीं हैं सोनम वाँगचुक, फिर भी ऐसा प्रचार क्यों?

शिक्षा प्रणाली में मूलभूत सुधार और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की माँग… Read More

4 days ago

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल ने अंग्रेजी को ‘विदेशी भाषा’ कह दिया, तो हाय-तौबा क्यों?

भाषा को लेकर बेवजह की हाय-तौबा मची हुई इन दिनों। वजह वही, पीढ़ियों से भारतीय… Read More

5 days ago

जिन्हें सच्ची खुशी की तलाश, वे आईआईटी प्रवेश परीक्षा में जानबूझकर फेल भी हो जाते हैं!

जिन्दगी अपनी है, चुनाव भी अपने ही होते हैं। ऐसा अक्सर कहा जाता है। लेकिन… Read More

6 days ago