प्रतीकात्मक तस्वीर
ज़ीनत ज़ैदी और देवांशी वशिष्ठ, दिल्ली
दिल्ली में 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली दो छोटी बच्चियों का ख़ूबसूरत प्रयास। ज़ीनत ज़ैदी की कविता और देवांशी वशिष्ठ की आवाज़। पढ़ने लायक है, सुनने लायक भी और सोचने लायक भी कि इतनी कम उम्र में ही बच्चे कितनी सकारात्मक रचनात्मकता से भरे हुए हैं।
ये रही मूल कविता…..
It’s raining again
With the sweet smell of soil, grain
It can take all our pain
This is why, we love the rain
The sound of raindrops
Are so melodious
By hearing it
People forgets their failures
It refreshes
All the surrounds
And we feel
Like recovering wounds
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(ज़ीनत #अपनीडिजिटलडायरी के सजग पाठक और नियमित लेखकों में से एक हैं। दिल्ली के आरपीवीवी, सूरजमलविहार स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ती हैं। लेकिन इतनी कम उम्र में भी अपने लेखों के जरिए गम्भीर मसले उठाती हैं। हालाँकि इस बार उन्होंने एक संवेदनशील कविता #अपनीडिजिटलडायरी को लिख भेजी है। बारिश से मिलने वाले सुकून के बारे में, राहत के बारे में।
ज़ीनत की इस कविता को आवाज़ दी है दिल्ली में 11वीं में पढ़ने वाली देवांशी वशिष्ठ ने, जिनकी प्यारी सी आवाज़ #अपनीडिजिटलडायरी पर अक्सर ही सुनी जाती है।)
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