‘कर्म आपके पास लौटकर आते हैं’, …रवीन्द्र जाडेजा ने लिखा और देखा भी!

नीलेश द्विवेदी, भोपाल मध्य प्रदेश से

भारतीय क्रिकेट की इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल)-2023 से जुड़ी एक और ख़ास बात। ऐसी, जो हर किसी के काम की है। वाक़ि’आ 20 मई, शनिवार से शुरू होता है। उस रोज़ महेन्द्र सिंह धौनी की चेन्नई टीम महत्त्वपूर्ण मुक़ाबले के लिए मैदान में उतरी। टूर्नामेन्ट के अगले चरण यानि ‘प्लेऑफ’ में जगह पक्की करने के लिए चेन्नई को यह मैच किसी भी हाल में जीतना है। उसने यह मैच जीता भी, 77 रन के बड़े अन्तर से। लेकिन इसके बावज़ूद इस जीत में चेन्नई के सबसे अहम खिलाड़ी रवीन्द्र जाडेजा अपनी वह प्रभावशाली भूमिका नहीं निभा सके, जिसके लिए वह जाने जाते हैं। होता है, खेल में अक्सर ऐसा होता है। किसी खिलाड़ी का कोई दिन होता है, कोई नहीं होता। ऐसा होना सामान्य बात है। चेन्नई के कप्तान धौनी तो यह बातें बख़ूबी जानते हैं। फिर भी न जाने क्यों मैच ख़त्म होने के बाद की कुछ तस्वीरें ऐसी आईं, जिन्हें देखकर लगा कि मानो रवीन्द्र जाडेजा के साथ धौनी सख़्ती से पेश आए हों। इन तस्वीरों के सामने आते ही मीडिया और सोशल मीडिया में सुर्ख़ियाँ चल पड़ीं कि धौनी और जाडेजा के बीच सब ठीक नहीं है। रॉयल चैलेन्जर्स बेंगलुरू के समर्थकों ने तो जाडेजा को चेन्नई छोड़कर विराट कोहली की इस टीम में शामिल होने की पेशक़श कर दी।

इसके बाद अगले दिन यानि 21 मई को तो इस तरह की बातों को और हवा मिली, जब जाडेजा ने अपने ट्विटर अकाउन्ट से एक तस्वीर साझा की। उस लिखा था, “कर्म आपके लौटकर आते हैं, जल्दी या देर से।” इसके साथ ही उन्होंने अपनी तरफ़ से एक शब्द का कैप्शन लिखा, “डेफिनिटली” मतलब “निश्चित रूप से”। फिर क्या था। उनकी इस पोस्ट के बाद तो कई लोगों ने इसका मतलब ऐसा भी निकालना शुरू कर दिया गोया, कि जाडेजा इशारों में ही धौनी को ताना दे रहे हों। और वह शायद चेन्नई टीम को छोड़ने का मन बना चुके हैं। हालाँकि सच्चाई किसी को ठीक तरह से पता नहीं थी। जाडेजा और धौनी के बीच क्या हुआ, क्यों हुआ? इसके बावजूद ‘जितने मुँह, उतनी बातें’। ध्यान रखिएगा ‘भीड़’ अपने इसी तरह के तौर-तरीक़ों की वजह से ‘भीड़’ कहलाती है। क्योंकि वह कुछ भी पूरी तरह जाने और समझे बग़ैर ‘भेड़ों’ की तरह एक-दूसरे का अनुसरण करती है।

ख़ैर! अब इस प्रसंग का अगला चरण ग़ौरतलब है। तारीख़ 29 मई। चेन्नई और गुजरात के बीच हुए फाइनल मैच का आख़िरी ओवर। चेन्नई को जीत के लिए छह गेंदों में 13 रन बनाने हैं। सामने मोहित शर्मा के रूप में गुजरात के वह गेंदबाज़, जिन्होंने पहले कई मैचों के आख़िरी ही ओवर में, विपक्षी बल्लेबाज़ों को इससे भी कम रन बनाने नहीं दिए। उनके सामने हैं रवीन्द्र जाडेजा, जिन्होंने अपने साथी बल्लेबाज़ शिवम दुबे के साथ मिलकर एक योजना बनाई हुई है। वह ये कि छह में से दो कमज़ोर गेंदें जब मिलें, दोनों में से किसी को भी, वह उन गेंदों को मैदान के बाहर भेजेगा। छक्के या चौके के लिए। और फिर धैर्य के साथ दोनों उस अवसर का इंतिज़ार करते हैं। और दिलचस्प बात देखिए कि यह अवसर मिला जाडेजा को। ओवर की आख़िरी दो गेंदों में मोहित की लय टूटी और जाडेजा ने दोनों ही गेंदों को मैदान से बाहर कर दिया। इन दो गेंदों पर जीत के लिए 10 रन चाहिए थे और वे जाडेजा के बल्ले से आए। फाइनल में ख़िताबी जीत के नायक वह बने।

हालाँकि कहानी यहाँ ख़त्म नहीं हुई। मैच के आख़िरी ओवर की छठवीं गेंद पर विजयी चौका लगाने के बाद जाडेजा बल्ला उठाए दौड़ते हुए सीधे वहाँ पहुँचते हैं, जहाँ धौनी सहित टीम के दूसरे खिलाड़ी और कोच वग़ैरा हैं। सब जाडेजा को गले लगा रहे हैं। लेकिन वह ख़ुद उस भीड़ को चीरते हुए उस तरफ़ बढ़ते गए, जहाँ सामने से धौनी आते दिखाई देते हैं। और जब दोनों नज़दीक से आमने-सामने हुए तो वह हुआ, जिसकी जाडेजा तो क्या भारतीय क्रिकेट में भी किसी को उम्मीद नहीं थी। अपनी भावनाओं को सार्वजनिक रूप से व्यक्त न करने वाले धौनी ने जाडेजा को गोद में उठा लिया। आँखों के कोनों से ढुलकने को बेताब आँसुओं को मुश्क़िल से आँखें बन्द कर के रोकते हुए बहुत देर तक उन्होंने जाड़ेजा को उसी तरह गले लगाकर रखा। अविश्वनीय दृश्य और पल।

इसके बाद अगला अध्याय। मंच पर विजयी ट्रॉफी दिए जाने का वक़्त। वहाँ भी धौनी ने यह ट्रॉफी लेने के लिए आईपीएल से रिटायर हो रहे अम्बाती रायडू के साथ जाडेजा को आगे किया। टीम के ड्रेसिंग रूम में भी ट्रॉफी लेकर जाडेजा ही दाख़िल हुए। और जीत के ज़श्न में भी सबसे ऊपर, सबसे आगे वही दिखाई दिए। इसी दौरान जाडेजा ने धौनी के प्रति दिल से अपना आभार जताया। जीत और ट्रॉफी दोनों ही उन्होंने ‘अपने कप्तान’ को समर्पित कीं। और उसी ट्विटर अकाउंट पर, जहाँ उनकी एक पोस्ट से लोगों को बातें बनाने का मौक़ा मिला था, उन्होंने ‘धौनी की गोद वाली अपनी यादग़ार तस्वीर’ भी साझा की। अलबत्ता, कहानी यहाँ भी ख़त्म नहीं हुई।

याद कीजिएगा, इस आईपीएल में चेन्नई के शुरुआती मैचों को। उसमें कई बार ऐसी स्थितियाँ बनीं, जब चेन्नई के प्रशंसकों ने जाडेजा को आड़े हाथ लिया। टीम में बल्लेबाज़ी के लिए धौनी ने जाडेजा का क्रम ख़ुद से ऊपर रखा था। क्योंकि घुटने की तक़लीफ़ की वजह से वह ख़ुद ज़्यादा बल्लेबाज़ी कर पाने की स्थिति में नहीं थे। लेकिन प्रशंसकों को यह बात समझ नहीं आई। वह किसी भी सूरत में अपने ‘थला’ (मुखिया) की बल्लेबाज़ी देखना चाहते थे। इसलिए जब भी जाडेजा मैदान पर पारी सँभालने की कोशिश करते, प्रशंसक उन्हें तख़्तियाँ दिखाते। उन पर लिखा होता, ‘जल्दी आउट होकर वापस जाओ। हमें धौनी को बल्लेबाज़ी करते हुए देखना है।” कल्पना कीजिए, किसी खिलाड़ी के लिए कितनी असहज स्थिति होती होगी यह, कि उसकी अपनी टीम के प्रशंसक उसे आउट होने के लिए कह रहे हैं। जाडेजा ने अपनी यह तक़लीफ़ खुलकर ज़ाहिर भी की। मगर किसी प्रशंसक को फ़र्क नहीं पड़ा ज़्यादा। हालाँकि फ़र्क पड़ा। फाइनल मैच के बाद फ़र्क पड़ा। इस मैच के दो रोज़ बाद कुछ अख़बारों ने छापा कि जाडेजा को चेन्नई के प्रशंसक अब ‘चिन्ना थला’ (छोटा मुखिया) कह रहे हैं।…

कर्म इतनी जल्दी लौट आएँगे, लिखते वक़्त शायद जाडेजा ने सोचा नहीं होगा।

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Neelesh Dwivedi

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