एक कारोबारी ने देशहित में अपील की, दूसरे ने मजाक उड़ाया,..ऐसे फर्क डालती है सोच!

टीम डायरी

देश के दो कारोबारी हैं। एक- श्रीधर वेम्बू, जो सूचना-तकनीक क्षेत्र की जानी-मानी कम्पनी जोहो के संस्थापक हैं और ज्यादातर सकारात्मक कारणों से सुर्खियों में रहते हैं। जबकि दूसरे है- अशनीर ग्रोवर, जो वित्त-तकनीक (फिन-टेक) क्षेत्र की कम्पनी ‘भारत पे’ के संस्थापकों में से एक रहे हैं और अधिकांशत: विवादों के कारण चर्चा में होते हैं। आज इनकी बात इसलिए क्योंकि जिन कारणों का ऊपर जिक्र किया, उन्ही के कारण अभी ये फिर खबरों में हैं। 

दरअसल, वेम्बू ने अभी दो दिन पहले ही अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों में रह रहे भारतीय पेशेवरों से अपील की है। इन पेशेवरों के नाम अपने खुले पत्र में उन्होंने लिखा है, “ठीक वैसे ही, जैसे 37 साल पहले मैंने किया था, आप भी बिना किसी पैसे के, लेकिन भारत से मिली अच्छी शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत के साथ अमेरिका पहुँचे। आपने जबरदस्त सफलता हासिल की। ​​अमेरिका में हमें बहुत अच्छा अनुभव मिला। इसके लिए हमें हमेशा आभारी रहना चाहिए। आभार व्यक्त करना हमारा भारतीय तरीका है। इसके बावजूद आज बड़ी संख्या में अमेरिकियों को लगने लगा है कि भारतीय उनकी नौकरियाँ छीन लेते हैं और अमेरिका में हम लोगों ने गलत तरीके से सफलता हासिल की है।” 

“आपको लग सकता है कि अगला चुनाव (अमेरिका में) इस समस्या को ठीक कर देगा, लेकिन तब भी आपके सामने जो विकल्प होंगे, वे ऐसे लोगों के बीच होंगे जो हमारी भारतीय सभ्यता से नफरत करते हैं। और ऐसे लोगों के बीच भी, जो खुद सभ्यता से ही नफरत करते हैं। यह ‘कट्टर दक्षिणपंथी’ बनाम ‘जागरूक वामपंथी’ की लड़ाई है। इस संघर्ष में आप बस किनारे खड़े दर्शक मात्र हैं।…आज की दुनिया में, समृद्धि और सुरक्षा के साथ सम्मान भी केवल एक चीज से मिलता है- किसी राष्ट्र की तकनीकी क्षमता से। भारत के पास इस क्षमता को हासिल करने के लिए जरूरी बौद्धिक शक्ति काफी मात्रा में है। लेकिन अफसोस कि हमने अपनी प्रतिभा का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों, खासकर अमेरिका को भेज दिया। पर अब जैसे-जैसे हम भारत में अपनी इस तकनीकी क्षमता को विकसित करेंगे, हमारी सभ्यतागत शक्ति खुद ही उभरकर सामने आएगी।…भले ही आपमें से कई लोगों के लिए इस बात पर विचार करना कितना भी मुश्किल क्यों न हो, लेकिन अब आप कृपया अपने घर वापस लौट आइए। भारत माता को आपकी प्रतिभा की जरूरत है। हमारी विशाल युवा आबादी को उस तकनीकी नेतृत्व की जरूरत है, जो आपने बीते वर्षों में हासिल किया है। ताकि वह नेतृत्त्व उन्हें समृद्धि की राह पर आगे बढ़ा सके। आइए, हम मिलकर एक मिशनरी जोश के साथ यह काम पूरा करें।” 

गौर करने की बात है कि वेम्बू खुद शुरुआती दिनों में अमेरिका के सैनडियागो, कैलिफोर्निया जैसे शहरों में रहे और वहाँ उन्हाेंने करोड़ों रुपए सालाना की तनख्वाह वाली नौकरी की। मगर कुछ समय बाद उसे छोड़कर वह भारत लौटे। गाँव की राह चुनी और जोहो के नाम से कम्पनी स्थापित की। उसका संचालन आज वह तमिलनाडु के अपने ग्रामीण अंचल से करते हैं। इसी आधार पर युवाओं से गाँवों की ओर लौटने की अपील भी वह कुछ समय पहले कर चुके हैं। 

वेम्बू की इस तरह की अपीलों का देश के करोड़ों युवाओं पर असर भी होता है। मीडिया और सोशल मीडिया पर उनके ऐसे आह्वान पर कई-कई दिनों तक चर्चा होती है। इस बार भी जारी है। हालाँकि, अशनीर ग्रोवर जैसे लोगों का एक वर्ग भी है, जो वेम्बू और उनकी अपील का मजाक बनाने से पीछे नहीं हटता। उदाहरण के लिए, अशनीर ने सोशल मीडिया पर भारतीय पेशेवरों से उल्टी अपील कर डाली है। वेम्बू की बात काटते हुए उन्होंने लिखा, “क्या फिजूल बात है। भारत में गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ रखा है। लोगों की हालत खराब कर रखी है। बिल्कुल नहीं। इन आँकड़ों पर गौर कीजिए- एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 94 भारतीय रुपयों के बराबर हो चुकी है और गर्मी में पारा 50 डिग्री तक पहुँच रहा है। अपनी सोच तार्किक, वैज्ञानिक आधार पर बनाइए।”

हाँ भाई, सोच का ही तो मामला है। यही तो हम भी बताना चाह रहे हैं कि देखिए, इंसान की सोच कितना फर्क डालती है उसकी शख्सियत पर। एक सोच किसी को लोगों की निगाह में ऊपर उठा देती है, दूसरी किसी को उतना ही नीचे धकेल देती है। बताइए, सही बात है न? 

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Neelesh Dwivedi

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