मर्जी से साथ रहीं, बच्चा जन्मा, रिश्ता टूटा तो बोलीं-दुष्कर्म! अदालत के प्रश्न वाजिब नहीं हैं?

टीम डायरी

देश की शीर्ष अदालत ने सोमवार, 27 अप्रैल को एक बार फिर ‘लिव-इन’ संबंधों के मामले में कुछ वाजिब प्रश्न उठाए हैं। ये प्रश्न सामाजिक व्यवस्था के लिहाज से बहुत मायने रखते हैं। दरअसल, अदालत में एक मामला सुनवाई के लिए आया था। इसमें एक महिला ने अपने साथी पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए न्याय की माँग की है। जबकि वह महिला अपने उस साथी के साथ 15 साल से ‘लिव-इन’ संबंध बनाकर रह रही थी। महिला ने अपने उस पुरुष साथी के एक बच्चे को भी जन्म दिया है। इसी आधार पर न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुइयाँ की पीठ ने सुनवाई के दौरान प्रश्न किया, “वह अपनी मर्जी से पुरुष साथी के साथ रहने गई। उसके बच्चे की माँ भी बनी। और अब कह रही है कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ! ये क्या बात हुई?” 

न्यायाधीशों ने सीधे सवाल किए, “वह शादी के बिना अपने पुरुष साथी के साथ रहने गई ही क्यों? उसके बच्चे को जन्म क्यों दिया? और देखिए, हम जब ऐसे सवाल पूछते हैं तो कहा जाने लगता है कि पीड़िता को शर्मिन्दा कर रहे हैं। जबकि ऐसा नहीं है। हम पीड़िता को शर्मिन्दा करने की गरज से यह प्रश्न नहीं उठा रहे हैं। लेकिन सहमति की प्रकृति देखना भी तो जरूरी है। किसी अपराध का सवाल ही कहाँ उठता है, जब दोनों के बीच सहमति से संबंध बने हैं तो? असल में ‘लिव-इन’ संबंधों में यही हो रहा है। सालों-साल तक महिला-पुरुष साथ रहते हैं। लेकिन जैसे ही उनका संबंध टूटता है, महिला अदालत का दरवाजा खटखटा देती है। पूर्व पुरुष साथी पर दुष्कर्म का आरोप लगा देती है। उसकी शिकायत दर्ज कराती है। शादी से बिना बनने वाले संबंधों में यह विचित्र मनमानी है!” अदालत ने इस टिप्पणी के साथ मामले को मध्यस्थता के लिए अग्रेषित कर दिया। मतलब, अब दोनों पक्षों के बीच कानूनी मध्यस्थ की मौजूदगी में बातचीत के जरिए मामला सुलझा जाएगा। 

अलबत्ता, सामाजिक व्यवस्था का मसला कौन सुलझाएगा? और कैसे? क्योंकि इस तरह की मामले तो अब आम हो चले हैं न? इसीलिए सोचिएगा इस पर। सोचना और निदान निकालना बहुत जरूरी है क्योंकि। वैसे, यह पहला मौका नहीं है कि जब शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों ने ऐसे संबंधों पर इस तरह के प्रश्न उठाए हों। इससे पहले इसी तरह के एक अन्य मामले में इन्हीं दोनों न्यायाधीशों ने कहा था, “हो सकता है हम पुराने ख्यालात वाले हों। लेकिन शादी से पहले लड़का-लड़की एक-दूसरे के लिए अजनबी-से ही होते हैं। हम समझ नहीं पा रहे हैं कि शादी के बिना वे शारीरिक संबंध कैसे बना लेते हैं? हमारी तो सलाह है कि लड़कियों को इस मामले में बहुत सतर्क रहना चाहिए। शादी से पहले उन्हें किसी पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए।” 

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Neelesh Dwivedi

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