ये समाचार पढ़िए और सोचिए कि हमारी युवा पीढ़ी ऐसे भटकाव की शिकार क्यूँ है?

टीम डायरी

हमारी युवा पीढ़ी, हमारे किशोर कहाँ जा रहे हैं, कैसे गुमराह हो रहे हैं, इसकी मिसाल इन दो-तीन समाचारों में मिलती है। पहला समाचार उदयपुर, राजस्थान से। चार किशोर अपने दोस्त का जन्मदिन मनाकर लौट रहे थे। चारों में से शायद ही किसी के पास कार चलाने का अनुज्ञापत्र (लाइसेंस) हो। फिर भी कार चलाने वाला लड़का 120 किलोमीटर प्रति घण्टे से अधिक की रफ्तार से गाड़ी दौड़ा रहा था, हाथ में सिगरेट और तेज संगीत के सुरूर में। उनमें एक-दो लड़कों ने उसे रोका भी, “भाई, गाड़ी धीमी कर ले।” मगर उसने किसी की नहीं सुनी और दुर्घटना हो गई। सामने से आ रही दूसरी कार से भिडंत हो गई। चार लड़कों ने दम तोड़ दिया। जबकि छह अन्य घायल हैं।

दूसरा समाचार बेंगलुरू, कर्नाटक से। एक युवती सुबह की सैर पर निकली। आवलाहल्ली के जंगल में और भी लोग सुबह-सुबह आते हैं। यानि यह कोई सुनसान इलाका नहीं है। युवती का नाम रितिका सुर्यवंशी है, जो हल्की-फुल्की दौड़ वाले अंदाज में आगे बढ़ रही है। तभी सामने 10 से 13 साल के तीन लड़के आते हैं, और उसके पहनावे पर गंदी टिप्पणी करते हुए बगल से निकल जाते हैं। इस बारे में खुद रितिका ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा किया है। उसके मुताबिक, लड़कों ने कन्नड़ भाषा में उस पर टिप्पणी की। भाषा उसे समझ नहीं आई लेकिन उन लड़कों के अंदाज से उसे एहसास हो गया कि वे उसके पहनावे पर टिप्पणी कर रहे हैं। जबकि उसका पहनावा सामान्य था। हालाँकि, उसने पहले उन लड़कों को बच्चा मानकर अनदेखा किया। मगर वे फिर उसके पास लौटे और उससे बदसलूकी कर गए। तब उसने उन्हें डाँटकर भगाया, पर फिर भी वे बेशर्मी से हँसते हुए वहाँ से गए।

तीसरा समाचार भी बेंगलुरू से ही। थोड़ा पुराना है। वहाँ इसी महीने की तीन तारीख को सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में काम करने वाली एक युवती की उसके घर में जली हुई लाश मिली थी। उसकी उम्र करीब 25 साल से ऊपर की रही होगी। पहले माना गया कि दुर्घटनावश आग लगने से उस युवती की मृत्यु हुई। लेकिन जब जाँच आगे बढ़ी तो पता चला कि उस युवती के पड़ोस में रहने वाले 18 साल के लड़के ने उसकी पहले हत्या की फिर उसकी मृत देह को जलाकर घटना को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश। ताकि किसी को उस पर सन्देह न हो। और उसने ऐसा किया क्यों? क्योंकि उस युवती के साथ वह शारीरिक सम्बन्ध बनाना चाहता था, जिसमें वह सफल नहीं हो सका। युवती ने पहले ही उसके मंसूबे भाँप लिए और उसे पुरजोर तरीके से रोक लिया। इसका उसने बदला लिया।

ऐसी घटनाएँ कोई नई नहीं हैं अलबत्ता। इस तरह के मामलों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। इसीलिए हमारे लिए यह चिंता का विषय है, होना भी चाहिए। हमें उन सवालों पर गम्भीरता से विचार करना ही चाहिए, जो रितिका ने अपना अनुभव साझा करते हुए पूछे हैं, “आखिर इन बच्चों के दिमाग में इतनी गंदगी आ कहाँ से रही है? और क्यों? कहीं इसके लिए हम ही तो जिम्मेदार नहीं हैं?” इन सवालों का जवाब हमने नहीं खोजे और निदान के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए तो तय मानिए, हमारी अगली पीढ़ी का भविष्य अँधेरे में जाने वाला है!

सोशल मीडिया पर शेयर करें
Neelesh Dwivedi

Share
Published by
Neelesh Dwivedi

Recent Posts

पर्यावरण दिवस, ईंधन बचाने की बातें और निजी कारों का ऐसा तमाम-जाम, दिलचस्प है न?

मैं बेंगलुरू में जहाँ रहता हूँ, वहाँ अपने घर के सामने रोज इस तरह का… Read More

3 hours ago

लिंक्डइन के जरिए नौकरी का जाल, चीन से पाँच देशों की जासूसी, भारतीय भी सावधान रहें!

लिंक्डइन के जरिए नौकरी का जाल बिछाकर, रोजगार की तलाश कर रहे लोगों को काम… Read More

1 day ago

‘शिक्षक’ ने अपने कौड़ी के ज्ञान से ‘पत्रकार’ को दो कौड़ी का साबित कर दिया, देखिए वीडियो!

देश की एक जानी-मानी ‘पत्रकार’ ने ऑनलाइन पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए कह दिया कि… Read More

2 days ago

क्या हम भारतीयों को सार्वजनिक नियम-कायदे मानने की तमीज नहीं? अभी बहस तो यही है!

अभी एक-दो दिन से मीडिया-सोशल मीडिया में यह बहस चल रही है कि हम भारतीयों… Read More

3 days ago

अपने हिस्से का योगदान दीजिए, वरना लू के थपेड़ों से रोज 3,400 लोग मरने लग जाएँगे!

एक नया अध्ययन हुआ है। इसमें भारत और उसके आस-पास के देशों में लगातार बढ़ती… Read More

4 days ago

इस लड़की ने दो लाख की नौकरी छोड़कर 60 हजार रुपए महीने में खुशी खरीदी है!

खुशी पाने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते। ज्यादातर लोग अमूमन बड़ी से बड़ी नौकरी… Read More

5 days ago