ब्रिटिश सरकार के दौर में महिला शिक्षा की स्थिति कैसी थी?

माइकल एडवर्ड्स की पुस्तक ‘ब्रिटिश भारत’ से, 22/10/2021

उस समय एक मिशनरी थे विलियम एडम। उन्होंने सरकार के कहने पर बंगाल और बिहार में शिक्षा की स्थिति पर कई रपटें तैयार की थीं। उन्होंने 1835 में महिलाओं की शिक्षा के मामले में कहा था, “विशुद्ध और असहाय अज्ञानता की स्थिति है।” उनके मुताबिक हिंदु महिलाओं में अंधविश्वास था कि जो लड़की पढ़ना-लिखना सीख जाएगी, वह शादी के तुरंत बाद विधवा हो जाएगी। इस अंधविश्वास को “पुरुषों ने हतोत्साहित भी नहीं किया।” अधिकांश पुरुषों का मानना था कि महिलाओं की जगह घर के भीतर है। उन्हें सिर्फ़ घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़ी शिक्षा की ज़रूरत है। वह घर में ही मिलनी चाहिए। 

इसके बावज़ूद ईसाई मिशनरियों ने महिला शिक्षा के विषय की महत्ता को समझा और समझाया। इस दिशा में 1818 में पहली बार उन्हीं की ओर से बंगाल के चिंसूरा में लंदन मिशनरी सोसायटी के विद्यालय में महिला-शिक्षा का प्रबंध किया गया। इसके अगले साल अंग्रेज महिलाओं ने कलकत्ता फीमेल जुवेनाइल सोसायटी (महिला किशोर समाज) की स्थापना की। इस सोसायटी के तहत 1823 तक छह विद्यालय खोले गए। इनमें 160 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे थे। हालाँकि इस समय तक 40 लाख महिलाओं में से 400 ही लिख-पढ़ सकती थीं। इस तथ्य ने 1821 में लंदन की फॉरेन स्कूल सोसायटी को प्रोत्साहित किया कि वे महिला शिक्षकों पर कुछ ख़र्च करें। इसके बाद प्रयास शुरू हुआ और मिस कुक भारत आईं। उन्हें मिसेज़ विलसन नाम से भारत में अधिक जाना जाता है। वे भारत में महिला शिक्षा के क्षेत्र में करने वाले अग्रणी नामों में से थीं। उन्होंने भारत पहुँचने के दो साल के भीतर कलकत्ता और उसके आस-पास के क्षेत्रों में 23 कन्या विद्यालय शुरू कराने में सफलता हासिल कर ली। कलकत्ता के हिंदु समुदाय के अग्रणी लोगों ने इसमें उनकी वित्तीय मदद की। वैसे, अब तक हिंदु समुदाय की निचली जातियों ने ही अपनी लड़कियों को ईसाई मिशनरी विद्यालयों में पढ़ने की अनुमति दी थी। 

देश में लड़कियों के लिए पहली बार धर्मनिरपेक्ष विद्यालय स्थापित करने का प्रयास 1849 में हुआ। यह संस्थान ड्रिंकवॉटर बेथ्यून ने स्थापित किया। वे वायसराय की कार्यकारी परिषद में कानून के जानकार सदस्य थे। यह संस्थान धनी-मानी परिवारों की लड़कियों के लिए था। इसमें पढ़ने वाली लड़कियों को “एक अंग्रेज महिला के अधीन रहना होता था। वहाँ वे अंग्रेजी और बंगाली पढ़ती थीं। साथ ही महिलाओं की जीवनचर्या से जुड़े कई और काम भी सीखती थीं। जैसे- सिलाई, कढ़ाई, चित्रकारी, सजावट आदि। ये काम सीखकर वे अपने घरों को सजा-सँवार सकती थीं। चाहें तो आमदनी का साधन भी बना सकती थीं।” इस विद्यालय को बहुत समर्थन नहीं मिला। इसी बीच 1851 में बेथ्यून का निधन हो गया। तब तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डलहौजी ने इस संस्थान को चलाने की ज़िम्मेदारी निजी तौर पर अपने ऊपर ले ली। फिर 1856 में भारत सरकार ने संस्थान का संचालन अपने हाथ में ले लिया। इस तरह महिलाओं की उच्च शिक्षा के लिए भारत का पहला संस्थान अस्तित्व में आया। 

भारत के अन्य स्थानों पर 1858 तक महिला शिक्षा का पूरा मामला ईसाई मिशनरियों पर निर्भर रहा। इस क्रम में अमेरिकी मिशनरी सोसायटी ने बंबई में 1824 में पहला कन्या विद्यालय खोला। फिर पूना में 1851 में निजी कन्या विद्यालय खुला। दो अन्य हैदराबाद में अस्तित्व में आए। इस तरह बंबई प्रांत में 1854 तक 65 कन्या विद्यालय हो गए। इनमें 3,500 लड़कियाँ शिक्षा ले रही थीं। इस वक्त 593 लड़कियाँ तो सह-शिक्षा संस्थानों में पढ़ रहीं थीं। इनमें भी मद्रास में लड़कियों की शिक्षा की स्थिति बेहतर थी। मद्रास प्रांत में 1854 तक 8,000 लड़कियाँ मिशनरी विद्यालयों में शिक्षा ले रही थीं। सरकार ने भी फूँक-फूँक कर कदम रखते हुए 1875 तक देश में लगभग 1,000 कन्या विद्यालयों की स्थापना करने में सफलता पा ली थी। इनमें 70,000 लड़कियाँ पढ़ रही थीं। वहीं, 1911-12 तक 10 लाख से करीब लड़कियाँ शिक्षा ले रही थीं और 1939 तक संख्या 30 लाख के आस-पास पहुंच गई थी। 

सामाजिक परंपराओं का भी महिला-शिक्षा पर असर पड़ रहा था। जैसे- परदा प्रथा। अलबत्ता मद्रास प्रांत में परदा प्रथा नहीं थी। इसीलिए वहाँ शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने वाली महिलाओं की संख्या भी ज़्यादा थी, जो 1927 के बाद अधिक बढ़ी। वैसे महिला शिक्षा की दिशा में वास्तविक पहल भारतीय समाज सुधारकों ने की। इनमें एक नाम पंडित रमाबाई (1835-1922) का था। वे ब्राह्मण थीं। शादी के बाद विधवा हो गई थीं। आगे चलकर उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया। उन्होंने पूना में हिंदु विधवाओं के लिए एक भवन बनवाया, जो संस्कृत शिक्षा का केंद्र भी बना। वे समाज में महिलाओं को शिक्षित करने, बराबरी का अधिकार देने पर भरोसा करती थीं। उनके केंद्र में यही हुआ। यह भवन काफी सफल रहा। एक समय तो वहाँ लगभग 2,000 हिंदु विधवाएँ रह रही थीँ। भारतीय महिलाओं की स्थिति के बारे में एकदम अलग नज़रिया डॉक्टर धोंडो केशव कर्वे ने पेश किया। उन्होंने भी पूना में ही हिंदु विधवाओं के लिए विद्यालय खोला। इसे 1916 में भारतीय महिला विश्वविद्यालय के तौर पर परिवर्तित कर दिया गया। डॉक्टर कर्वे ने जोर दिया कि महिलाओं को उनकी मातृभाषा में शिक्षा दी जानी चाहिए। हालाँकि उनके विचारों का भी विरोध हुआ पर महिला-शिक्षा का सिलसिला चलता रहा। साल 1939 तक भारतीय महिला विश्वविद्यालय से चार महाविद्यालय संबद्ध हो चुके थे। इनमें 170 महिलाएँ शिक्षा ले रही थीं। इस तरह उच्च शिक्षा में स्थिति संतोषजनक रही। नतीज़ा ये रहा कि 1935 तक लगभग 5,000 महिलाएँ विभिन्न महाविद्यालयों में पढ़ रही थीं। वैसे विरोधाभासी आँकड़ा ये भी है कि इनमें से सिर्फ़ 496 ही स्नातक उपाधि ले सकी थीं। 

जहाँ तक सवाल प्राथमिक शिक्षा का है तो आठ-नौ साल की उम्र के बाद लड़कियाँ पढ़ाई छोड़ देती थीं क्योंकि तब तक उनकी शादी हो जाती थी। महिला साक्षरता दर नीचे रहने का ये बड़ा कारण था। हालाँकि इन तथ्यों के बावज़ूद सरकार ने भी महिला शिक्षा के विस्तार के लिए उतना काम नहीं किया, जितना करना चाहिए था। इसका बड़ा कारण था, सामाजिक-राजनीतिक परिणामों को लेकर उसकी आशंकाएँ। इसी कारण ब्रिटिश शासन के आख़िरी वर्षों तक भी महिला शिक्षा सरकार की प्राथमिकता में नहीं रही। 
(जारी…..)
अनुवाद : नीलेश द्विवेदी 
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(‘ब्रिटिश भारत’ पुस्तक प्रभात प्रकाशन, दिल्ली से जल्द ही प्रकाशित हो रही है। इसके कॉपीराइट पूरी तरह प्रभात प्रकाशन के पास सुरक्षित हैं। ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ श्रृंखला के अन्तर्गत प्रभात प्रकाशन की लिखित अनुमति से #अपनीडिजिटलडायरी पर इस पुस्तक के प्रसंग प्रकाशित किए जा रहे हैं। देश, समाज, साहित्य, संस्कृति, के प्रति डायरी के सरोकार की वज़ह से। बिना अनुमति इन किस्सों/प्रसंगों का किसी भी तरह से इस्तेमाल सम्बन्धित पक्ष पर कानूनी कार्यवाही का आधार बन सकता है।)
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पिछली कड़ियाँ : 
63. देश जब आज़ाद हुआ, तब कितने प्रतिशत आबादी अशिक्षित थी?
62. लॉर्ड कर्जन को कुछ भारतीयों ने ‘उच्च शिक्षा के सर्वनाश का लेखक’ क्यों कहा?
61. आईसीएस में पहली बार कितने भारतीयों का चयन हुआ था और कब?
60. वायसराय जॉन लॉरेंस को ‘हमारा सबसे बड़ा शत्रु’ किस अंग्रेज ने कहा था?
59. कारखानों में काम करने की न्यूनतम उम्र अंग्रेजों ने पहली बार कितनी तय की थी?
58. प्लास्टिक उत्पादों से भारतीयों का परिचय बड़े पैमाने पर कब हुआ?
57. भारत में औद्योगिक विस्तार का अगुवा किस भारतीय को माना जाता है?
56. क्या हम जानते हैं, भारत में सहकारिता का प्रयोग कब से शुरू हुआ?
55. भारत में कृषि विभाग की स्थापना कब हुई?
54. अंग्रेजों ने पहली बार लड़कियों के विवाह की न्यूनतम उम्र कितनी तय की थी?
53. ब्रिटिश भारत में कानून संहिता बनाने की प्रक्रिया पहली बार कब पूरी हुई?
52. आज़ादी के बाद पाकिस्तान की पहली राजधानी कौन सी थी?
51. आजादी के आंदोलन में 1857 की क्रांति से ज्यादा निर्णायक घटना कौन सी थी?
50. चुनाव में मुस्लिमों को अलग प्रतिनिधित्व देने के पीछे अंग्रेजों का छिपा मक़सद क्या था?
49. भारत में सांकेतिक चुनाव प्रणाली की शुरुआत कब से हुई?
48. भारत ब्रिटिश हुक़ूमत की महराब में कीमती रत्न जैसा है, ये कौन मानता था?
47. ब्रिटेन के किस प्रधानमंत्री को ‘ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिलाने वाला’ माना गया?
46. भारत की केंद्रीय विधायी परिषद में सबसे पहले कौन से तीन भारतीय नियुक्त हुए?
45. कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल का डिज़ाइन किसने बनाया था?
44. भारतीय स्मारकों के संरक्षण को गति देने वाले वायसराय कौन थे?
43. क्या अंग्रेज भारत को तीन हिस्सों में बाँटना चाहते थे?
42. ब्रिटिश भारत में कांग्रेस की सरकारें पहली बार कितने प्रान्तों में बनीं?
41.भारत में धर्म आधारित प्रतिनिधित्व की शुरुआत कब से हुई?
40. भारत में 1857 की क्रान्ति सफल क्यों नहीं रही?
39. भारत का पहला राजनीतिक संगठन कब और किसने बनाया?
38. भारत में पहली बार प्रेस पर प्रतिबंध कब लगा?
37. अंग्रेजों की पसंद की चित्रकारी, कलाकारी का सिलसिला पहली बार कहाँ से शुरू हुआ?
36. राजा राममोहन रॉय के संगठन का शुरुआती नाम क्या था?
35. भारतीय शिक्षा पद्धति के बारे में मैकॉले क्या सोचते थे?
34. पटना में अंग्रेजों के किस दफ़्तर को ‘शैतानों का गिनती-घर’ कहा जाता था?
33. अंग्रेजों ने पहले धनी, कारोबारी वर्ग को अंग्रेजी शिक्षा देने का विकल्प क्यों चुना?
32. ब्रिटिश शासन के शुरुआती दौर में भारत में शिक्षा की स्थिति कैसी थी?
31. मानव अंग-विच्छेद की प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले पहले हिन्दु चिकित्सक कौन थे?
30. भारत के ठग अपने काम काे सही ठहराने के लिए कौन सा धार्मिक किस्सा सुनाते थे?
29. भारत से सती प्रथा ख़त्म करने के लिए अंग्रेजों ने क्या प्रक्रिया अपनाई?
28. भारत में बच्चियों को मारने या महिलाओं को सती बनाने के तरीके कैसे थे?
27. अंग्रेज भारत में दास प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाएँ रोक क्यों नहीं सके?
26. ब्रिटिश काल में भारतीय कारोबारियों का पहला संगठन कब बना?
25. अंग्रेजों की आर्थिक नीतियों ने भारतीय उद्योग धंधों को किस तरह प्रभावित किया?
24. अंग्रेजों ने ज़मीन और खेती से जुड़े जो नवाचार किए, उसके नुकसान क्या हुए?
23. ‘रैयतवाड़ी व्यवस्था’ किस तरह ‘स्थायी बन्दोबस्त’ से अलग थी?
22. स्थायी बंदोबस्त की व्यवस्था क्यों लागू की गई थी?
21: अंग्रेजों की विधि-संहिता में ‘फौज़दारी कानून’ किस धर्म से प्रेरित था?
20. अंग्रेज हिंदु धार्मिक कानून के बारे में क्या सोचते थे?
19. रेलवे, डाक, तार जैसी सेवाओं के लिए अखिल भारतीय विभाग किसने बनाए?
18. हिन्दुस्तान में ‘भारत सरकार’ ने काम करना कब से शुरू किया?
17. अंग्रेजों को ‘लगान का सिद्धान्त’ किसने दिया था?
16. भारतीयों को सिर्फ़ ‘सक्षम और सुलभ’ सरकार चाहिए, यह कौन मानता था?
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14. भारत में कलेक्टर और डीएम बिठाने की शुरुआत किसने की थी?
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12. भारत में रहे अंग्रेज साहित्यकारों की रचनाएँ शुरू में किस भावना से प्रेरित थीं?
11. भारतीय पुरातत्व का संस्थापक किस अंग्रेज अफ़सर को कहा जाता है?
10. हर हिन्दुस्तानी भ्रष्ट है, ये कौन मानता था?
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8.अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान को किसकी मदद से मारा?
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6.जेलों में ख़ास यातना-गृहों को ‘काल-कोठरी’ नाम किसने दिया?
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