सच का साथ देने के लिए सिर्फ हौसला चाहिए, हैसियत नहीं…इस महिला सिपाही ने बताया!

टीम डायरी

तमिलनाडु पुलिस की महिला सिपाही हैं रेवती। उनकी कहानी आज पूरे देश में सुर्खियों में हैं। उन्होंने काम ऐसा किया है कि वह हजारों-लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। साथ ही इस बात की जीती-जागती मिसाल कि सच्चाई का साथ देने के लिए इंसान को सिर्फ हौसले की जरूरत होती है। उसकी हैसियत क्या है, यह बिल्कुल मायने नहीं रखता।  

दरअसल, हिरासत में पिता-पुत्र की मौत के पाँच साल पुराने मामले में तमिलनाडु पुलिस के नौ कर्मियों को अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। इस फैसले का आधार बनी है रेवती की गवाही। रेवती थुतुकुडी जिले के सतनकुलम थाने में उस दिन मौजूद थीं, जहाँ जब यह वारदात हुई। इस मामले में खास बात यह रही कि रेवती को पुलिस के ही वरिष्ठ अफसरों की ओर से धमकाया गया, उन्हें नौकरी चले जाने की चेतावनी दी गई, उनकी जान को भी खतरा बताया गया। इसके बावजूद रेवती ने इरादा नहीं बदला और जो भी उन्होंने थाने में देखा था, वह सब न्यायिक दण्डाधिकारी को बता दिया। हाँ, न्यायिक दण्डाधिकारी से जरूर उन्होंने आग्रह किया कि उन्हें और उनकी दो बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही उनकी नौकरी सुरक्षित रहेगी, इसकी भी गारंटी दी जाए। 

मामला साल 2020 का है। कोरोना के दौर में जब लगभग पूरे देश में तालाबंदी की स्थिति थी, उसी वक्त सतनुकुलम में पी जयराज और उनके पुत्र जे बेनिक्स को पुलिस ने उनकी दुकान से उठा लिया था। जयराज मोबाइल की दुकान चलाते थे। उस समय तय समय-सीमा से ज्यादा देर तक उनकी दुकान खुली हुई थी। इसी आधार पर पुलिस ने उनकी दुकान पर दबिश दी। पिता-पुत्र दोनों को थाने ले जाया गया। वहाँ उनकी इस बर्बरता से पिटाई की गई कि दोनों की मौत हो गई। उस पूरे मंजर के अधिकांश हिस्से को रेवती ने अपनी आँखों से देखा था। साथी पुलिसकर्मियों को रोकने की भी कोशिश की उन्होंने। लेकिन उनकी किसी ने एक नहीं सुनी। बाद में जब शराब के नशे में पुलिसवालों ने पिता-पुत्र दोनों को निर्वस्त्र कर बर्बरता की हदें पार करनी शुरू कीं, तो रेवती मौके से हट गईं क्योंकि वह ये सब नहीं देख सकती थीं। आगे चलकर मामले ने तूल पकड़ा को राज्य सरकार ने न्यायिक जाँच का आदेश दिया। न्यायिक दण्डाधिकारी एमएस भारतीदासन ने इस मामले की जाँच की थी। 

उस वक्त रेवती ने अपनी हैसियत नहीं देखी। उन्होंने अपने परिवार, अपनी नौकरी की चिंता नहीं की। बल्कि हौसला दिखाया और सच का साथ दिया। उन्होंने न्यायिक दण्डाधिकारी से कहा, “श्रीमान् मैं आपको पूरी सच्चाई बताऊँगी। हर वो सच, जो छिपाया जा रहा है। लेकिन श्रीमान् मेरा एक आग्रह है। मैं दो बेटियों की माँ हूँ। क्या आप मुझे मेरी बेटियों की सुरक्षा और मेरी नौकरी सुरक्षित रहने की गारंटी दे सकते हैं?” न्यायिक दण्डाधिकारी ने जब उन्हें पूरा आश्वासन दिया, तो उन्होंने उस एक-एक पल का विवरण दिया कि किस तरह दोनों पिता-पुत्र को हवालात के भीतर लाकर उनके साथ बर्बरता की गई। आगे उन्हें न्यायिक हिरासत में लिया गया, लेकिन उन दोनों की हालत इतनी खराब हो गई थी कि उन्होंने कुछ दिन में दम तोड़ दिया। 

वास्तव में रेवती ने अपने हौसले से इस कहावत को गलत साबित किया है कि ‘अकेला चना, भाड़ नहीं फोड़ सकता।’ जैसी कि कई हौसलाविहीन लोग अपनी निष्क्रियता, भय या कमजोरी छिपाने के लिए दलील देते हैं। इसके बजाय रेवती ने दिखाया है कि अकेला चना भी हौसला दिखाए तो भाड़ और भड़भूँजे, दोनों को हैसियत दिखा सकता है। 

सोशल मीडिया पर शेयर करें
Neelesh Dwivedi

Share
Published by
Neelesh Dwivedi

Recent Posts

56 साल के ‘युवा’ सत्ता के लिए आग भड़का रहे और 28 साल के देश को नई ऊँचाई दे रहे!

अभी सोमवार, 20 जुलाई को संसद का मॉनसून सत्र शुरू हुआ। इससे कुछ समय पहले… Read More

1 minute ago

वंदेमातरम

जय जय श्री राधे Read More

24 hours ago

‘सरल भक्तमाल’- 11..: तर्क कोई कितने भी दे, वैष्णव भक्ति के मूल सम्प्रदाय तो चार ही हैं!

कलि युग में भक्ति मार्ग पाखण्ड से घिरा रहता है, इसलिए भगवान के भजन-पूजन, नाम… Read More

3 days ago

फिल्म ‘थ्री इडियट’ के फुनसुक वाँगड़ू नहीं हैं सोनम वाँगचुक, फिर भी ऐसा प्रचार क्यों?

शिक्षा प्रणाली में मूलभूत सुधार और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की माँग… Read More

4 days ago

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल ने अंग्रेजी को ‘विदेशी भाषा’ कह दिया, तो हाय-तौबा क्यों?

भाषा को लेकर बेवजह की हाय-तौबा मची हुई इन दिनों। वजह वही, पीढ़ियों से भारतीय… Read More

5 days ago

जिन्हें सच्ची खुशी की तलाश, वे आईआईटी प्रवेश परीक्षा में जानबूझकर फेल भी हो जाते हैं!

जिन्दगी अपनी है, चुनाव भी अपने ही होते हैं। ऐसा अक्सर कहा जाता है। लेकिन… Read More

6 days ago