जोहो के श्रीधर वेम्बू क्यों चाहते हैं कि तकनीकी तौर पर कुशल लोग अब गाँव लौटें?

टीम डायरी

सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अग्रणी भारतीय कंपनी ‘जोहो’ के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने बेहद गौरतलब आह्वान किया है। उन्होंने भारत में तकनीकी रूप से दक्ष पेशेवरों से, कुशल लोगों से आग्रह किया है कि वे लोग अब अपने गाँवों की ओर लौटें, तथा देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अपना योगदान दें। 

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कृष्णन नाम के एक उपयोगकर्ता ने लिखा था, “पापनासम, नेदुन्थेरु और अय्यमपेट्टई के रास्ते से गुजरते हुए हम देखते हैं कि अप्पाकुडाथान और अन्बिल जैसे मंदिरों की देखभाल के लिए वहाँ कोई स्थानीय व्यक्ति नहीं है। तब हमें एहसास होता है कि हमसे पहले वाली पीढ़ी और दादा-दादी ने हमारे पैतृक गाँवों को छोड़ कर कितनी बड़ी गलती की थी। हमने खुद के साथ, अपने मंदिरों के साथ और अपनी परंपराओं के साथ जो किया, उसके लिए आज दूसरों को दोष देने का कोई मतलब नहीं है। इसकी जिम्मेदारी हमारी ही है क्योंकि अपने गाँवों को छोड़कर हम ‘सफेदपोश’ नौकरियों की तलाश में चेन्नई, बेंगलुरू, दिल्ली, मुंबई और विदेशों को भाग निकले।” 

इसके जवाब में वेम्बू ने लिखा, “पिछले 40 सालों में तंजावुर जिले के गाँवों से ही न जाने कितनी प्रतिभाएँ बाहर चली गईं। आज इस जिले में कई जगहों पर घर और मंदिर वीरान पड़े हैं। मगर अब वापस लौटने का समय है। हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं। हमारा एक दफ्तर है और हम कुंभकोणम के पास एक परिसर बना रहे हैं। तंजावुर शहर में हम ड्रोन बनाने वाली एक कंपनी ‘याली एयरोस्पेस’ को पैसा भी दे रहे हैं। अभी और बहुत कुछ किया जाना बाकी है।” अलबत्ता, वेम्बू के इस आह्वान को क्या तंजावुर या तमिलनाडु तक सीमित मानना चाहिए? 

इस सवाल का जवाब स्पष्ट रूप से ‘नहीं’ में ही है। श्रीधर वेम्बू का आह्वान पूरे देश के लिए समझा जाना चाहिए। खास तौर पर इस तथ्य के मद्देनजर कि अतीत में भारत की समृद्धि का आधार यहाँ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था ही रही है। और आगे भारत का भविष्य भी ग्रामीण अर्थतंत्र की मजबूती से ही उज्ज्वल हो सकता है। दूसरा कोई रास्ता नहीं है। इसीलिए हमें अपनी जड़ों की ओर, अपने गाँवों की ओर लौटना ही होगा। वह भी समय रहते लौटना होगा। अन्यथा, हम अपनी परंपराओं, अपने मूल्यों, अपनी संस्कृति, अपने समाज, आदि के पूरी तरह पतन के खुद जिम्मेदार होंगे। 

और हाँ, यह भी बताते चलें कि श्रीधर वेम्बू ने कोरा ज्ञान देने के लिए यह आह्वान नहीं किया है। वह अरबपति कारोबारी हैं। भारत के अमीरों में उनका नंबर 39वाँ है। उनके पास 48 हजार करोड़ रुपए (5.85 अरब डॉलर) से ज्यादा की संपत्ति है। वह चाहें तो अन्य कारोबारियों की तरह देश के किसी भी महानगर या विदेश में आलीशान घर बनाकर रह सकते हैं। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। वह तमिलनाडु के तेनकासी जिले के ग्रामीण अंचल से अपनी कंपनी चलाते हैं। उनके अधिकांश दफ्तर ग्रामीण अंचलों में हैं। वह खुद अधिकांश समय गाँव में ही रहते हें। इतना ही नहीं, वह अपने शुरुआती दिनों में अमेरिका के सैनडियागो, कैलिफोर्निया जैसे शहरों में रहकर करोड़ों की तनख्वाह वाली नौकरी करते थे। उसे छोड़कर उन्होंने गाँव की राह चुनी। इसीलिए वह अधिकार के साथ अन्य लोगों से भी गाँवों की ओर लौटने का आह्वान कर रहे हैं। तमिलनाडु में तो वह कई युवाओं को इस तरह का ‘उलट पलायन’ करा भी चुके हैं। इसीलिए भारत सरकार ने उन्हें 2021 के पद्म श्री सम्मान से भी सम्मानित किया है, जिसके वह सही मायने में हकदार हैं। 

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