टीम डायरी
देशभर के चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए हुई री-नीट (राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा- दोबारा आयोजित) -2026 में दिल्ली के पांशुल बंसल ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है। इसके बाद मीडिया के लोग उनका साक्षात्कार लेने पहुँच गए। इस दौरान इतनी छोटी उम्र के पांशुल (18-19 साल के हैं) ने ‘बड़े काम की बात’ कही, जो उन्हीं के जैसे देश के लाखों युवाओं के लिए एक सबक है।
पांशुल ने कहा, “प्रश्न पत्र लीक हो जाने के कारण पहली वाली परीक्षा रद्द होने के बाद निराशा मुझे भी हुई थी। मगर फिर मैंने सोचा कि यह आपदा भी मेरे लिए अवसर हो सकती है। दोबारा परीक्षा आयोजित होने तक का जो समय है, उसे मैं अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए उपयोग कर सकता हूँ। मैंने वही किया।” यहीं पर बता दें कि पांशुल ने दोबारा आयोजित परीक्षा में 99.9999 प्रतिशतांक हासिल किए हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनका साक्षात्कार लेने वाले ने उनसे पूछा यह था कि आप “नीट पेपर लीक के मुद्दे पर दिल्ली में ही हो रहे धरना-प्रदर्शन में हिस्सा लेने क्यों नहीं गए?” जवाब में उन्होंने कहा, “मैंने सोचा, मैं प्रदर्शन में हिस्सा लेने क्यों जाऊँ? इसके बजाय मैं घर पर पढ़ाई कर के अपना परिणाम पहले से बेहतर कर सकता हूँ और वही किया।”
बस, यही फर्क है सोच का। एक युवा है, जो अपना भला-बुरा समझता है। आपदा आने पर निराश नहीं होता, उसे भी अवसर की तरह और बेहतर प्रदर्शन करने का माध्यम बना लेता है। जैसे- पांशुल और उनके जैसे हजारों-लाखों अन्य। वहीं दूसरा युवा है, जो सत्ता हासिल करने के लिए बेचैन होते नेताओं के उकसावे पर दिल्ली की सड़कों में ‘तिलचट्टा’ बना घूम रहा है। वह खुद अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। उसे इस बात का आभास तक नहीं है शायद कि जिन नेताओं के उकसावे पर वह सड़कों पर कुचला जा रहा है, मसला जा रहा है, लाठियाँ खा रहा है, वही नेता कल के रोज काम निकल जाने के बाद उसे ही दगा दे जाएँगे, ठग लेंगे।
अब ऐसे युवाओं का कोई करे तो क्या करे? इनके माता-पिता, शिक्षकों-गुरुओं को इन्हें समझाना चाहिए। अन्यथा, यकीन मानिए कि ये आज तिलचट्टों की जिस गति के शिकार हो रहे हैं, कल जब इनके ‘अपने’ समझे जाने वाले नेता सत्ता में होंगे, तब भी इसी गति का शिकार होंगे।
