बाँसुरी की धुन पर जनकल्याण की कामना और नववर्ष की मंगलकामनाएँ

नीलेश द्विवेदी, भोपाल, मध्य प्रदेश से

नए साल की सुबह की शुरुआत अगर बाँसुरी की धुन से हो जाए तो कितना ही बेहतर। वह भी जनकल्याण की कामना करती ‘वैष्णव जन’ की धुन के साथ। बस, दो-ढाई मिनट का वक़्त लगेगा। सुनिएगा और आनंद लीजिएगा। कैसी भी कोई प्रतिक्रिया देना चाहें तो कमेंट सेक्शन है ही, हर मंच पर।

इस वीडियो में जो ख़ास है, वह मास्टर सोहम द्विवेदी की वीडियो एडिटिंग की कोशिश। सोहम अभी भोपाल में आठवीं कक्षा में पढ़ते हैं। पढ़ाई के साथ ही उन्होंने यह हुनर बस, शौक़ के चलते ख़ुद ही एक्सप्लोर किया है। कहीं से सीखा नहीं है। अभी शुरुआती कोशिश है। पर उम्मीद की जा सकती है कि सिलसिला चलता रहा, रुझान बना रहा, तो शायद आगे सीखें भी और उनकी इस काम में विशेषज्ञता भी हो जाए। 

और बाँसुरी? प्रतीत होता है, वह तो श्री राधा-कृष्ण की कृपा और गुरुजनों के आशीर्वाद से ख़ुद ही बजी है। इसमें निमित्त बने हैं, नीलेश द्विवेदी।
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नव वर्ष की एक बार फिर मंगल कामनाएँ

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Tags: हुनर

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