हम अपने विचारों पर नियंत्रण रख सकते हैं, ये सात तरीके हैं, आजमा कर देखिए

योगिता शर्मा, दिल्ली

क्या हम खुश हैं? यह प्रश्न अपने आप में बहुत गहराई रखता है। सच कहें तो अधिकांश लोग इसका मिला-जुला उत्तर देंगे। जीवन शायद ही कभी पूरी तरह सुखद या पूरी तरह कठिन होता है। यह हमेशा खुशियों और असन्तोष का मिश्रण होता है। अक्सर हम सोचते हैं कि परिस्थितियों में बदलाव से खुशी मिलेगी, लेकिन सच्चाई यह है कि हमारी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि नजरिया खुशी तय करता है। अपने मन पर नियंत्रण पाना जीवन में शान्ति और सन्तोष प्राप्त करने की कुंजी है। जब हम अपने विचारों पर काबू पा लेते हैं, तो स्थायी खुशी की ओर बढ़ जाते हैं। अपने विचारों पर नियंत्रण रखना बहुत मुश्किल बात नहीं है। ये सात तरीके हैं, जिनके अभ्यास से यह सम्भव है। 

1. मन और शरीर का सम्बन्ध समझें

मन, शरीर और भावनाएँ एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। जब हम अपने शारीरिक हाव-भाव, साँस या गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं, तो इसका असर सीधे हमारे विचारों और भावनाओं पर पड़ता है। शोध भी बताते हैं कि जब हम परिस्थितियों पर अपना नियंत्रण में महसूस करते हैं, तो अधिक उत्पादक और सन्तुष्ट होते हैं।

2. वर्तमान को अपनाएँ

नकारात्मक भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें स्वीकार करें। खुद से पूछें कि यह भावना मुझे क्या सिखाना चाहती है?  इसके साथ ही, ‘टीजीआईएफ मानसिकता’ यानि सिर्फ छुट्टियों का इंतजार करने से बचें। जब हम हर मौजूदा पल को जीना सीख जाते हैं, तो आपके विचारों पर नियंत्रण आसान हो जाता है।

3. अपने ध्यान का केन्द्र बदलें

जीवन में नकारात्मक भावनाएँ आना स्वाभाविक है। लेकिन हम यह तय कर सकते हैं कि ध्यान किस पर देना है। कृतज्ञता सबसे शक्तिशाली उपाय है। सकारात्मकता का मतलब समस्याओं को नजरअन्दाज करना नहीं है, बल्कि जीवन को एक उपहार मानना है। जब हम आभार प्रकट करते हैं, तो डर मिट जाता है और जीवन में समृद्धि का अनुभव होता है।

4. ध्यान का अभ्यास करें

जब मन बेकाबू होकर दौड़ता है, तो ध्यान शान्ति लाता है। मन एक समय में केवल एक विचार पर टिक सकता है। ध्यान करते समय अपनी साँस या किसी मंत्र पर ध्यान केन्द्रित करें। जैसे, “मैं शान्त हूँ, मैं स्थिर हूँ।” ध्यान में पूर्णता नहीं, बल्कि अभ्यास जरूरी है। हर बार जब हमारा मन भटकता है और हम उसे वापस लाते हैं, तो विचारों पर हमारे नियंत्रण की शक्ति और बढ़ती है।

5. प्राइमिंग का उपयोग करें

कभी सुबह उठते ही खराब मूड महसूस किया है? प्राइमिंग यानी अपने कार्यों या विचाराें को प्राथमिकता के हिसाब से व्यवस्थित करना। इससे हमारा मूड बदल सकता है। कुछ गहरी, धीमी साँस लें, अपने शरीर को ऊर्जा दें और फिर अपने विचारों को सकारात्मक दिशा में मोड़ें। नियमित अभ्यास से प्राइमिंग हमारी आदत बन जाती है। हम दिन की शुरुआत स्पष्टता और उद्देश्य के साथ कर पाते हैं।

6. कल्पनाशीलता का उपयोग करें 

हमारा मस्तिष्क वास्तविक और कल्पित अनुभवों में ज्यादा फर्क नहीं करता। यही कारण है कि कल्पना करना बेहद प्रभावशाली है। खेल, व्यवसाय या व्यक्तिगत जीवन—हर जगह सफल लोग कल्पनाशीलता का उपयोग करते हैं। जब हम बार-बार खुद को लक्ष्य प्राप्त करते हुए देखते हैं, तो दिमाग उस पर विश्वास करने लगता है और सही समय पर कार्य करने के लिए तैयार हो जाता है।

7. सीमित करने वाले विश्वासों को पहचानें

हमारे विश्वास हमारी दुनिया को आकार देते हैं। लेकिन इनमें से कई विश्वास बचपन, संस्कृति या पिछले अनुभवों से बने होते हैं और हम उन्हें बिना सोचे-समझे स्वीकार कर लेते हैं। सजगता से हम इन विश्वासों पर प्रश्न उठाना सीखते हैं। जब हम नकारात्मक विश्वासों को सकारात्मक रूप में ढालते हैं, तो आत्मविश्वास और आत्म-मूल्य में वृद्धि होती है। हम अपने अतीत को नहीं बदल सकते, लेकिन यह जरूर कर सकते हैं कि उसे किस दृष्टि से देखें।

अंत में 

परिस्थितियों पर हमारा नियंत्रण नहीं है, लेकिन अपने मन पर जरूर कर सकते है। जब हम जागरूकता, कृतज्ञता, ध्यान, कल्पना और विश्वासों पर काम करके अपने विचारों को नियंत्रित करते हैं, तो अपने सर्वोच्च सामर्थ्य को जीने लगते हैं। याद रखें, खुशी बाहर नहीं, हमारे भीतर है। 

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(नोट : योगिता शर्मा दिल्ली की राज्य शैक्षणिक शोध एवं प्रशिक्षण परिषद में विज्ञान की सहायक प्राध्यापिका हैं। उनका यह लेख व्हाट्स एप के माध्यम से #अपनीडिजिटलडायरी तक पहुँचा है।)

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