क्या हो, अगर बीमा कराने वाले और उसके द्वारा नामित व्यक्ति, दोनों का निधन हो जाए!

टीम डायरी

अहमदाबाद विमान दुर्घटना के बाद एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न उभरा है। यह कि अगर ऐसे किसी हादसे में बीमा कराने वाले और उसके द्वारा नामित व्यक्ति दोनों का निधन हो जाए, तो क्या होगा? मतलब कि ऐसे में बीमा की राशि किसे मिलेगी और कैसे? इनके ज़वाब ज़रूरी हैं क्योंकि आम लोगों के ‘सरोकार’ का मामला है।

दरअस्ल, अहमदाबाद विमान दुर्घटना में ऐसे कुछ मामले सामने आए हैं, जिनमें बीमा कराने वाले (बीमाधारक) और उसके द्वारा नामित व्यक्ति (नॉमिनी) दोनों का निधन हो गया है। यहाँ तक कि कुछ मामलो में तो पति-पत्नी और बच्चों, सभी की मौत हो गई है। इस स्थिति में बीमा कम्पनियाँ दुविधा में पड़ गई हैं कि वे बीमा की रकम किसे दें। वह भी तब जबकि बीमा नियामक संस्था की ओर से सभी कम्पनियों को स्पष्ट निर्देश दिया जा चुका है कि अहमदाबाद विमान हादसे में मारे गए लोगों के बीमा दावों की रकम का भुगतान करने में ज़रा भी देर न की जाए।  

ख़बरों के मुताबिक, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी), इफको-टोकियो और टाटा-एआईजी जैसी बीमा कम्पनियों के पास अब तक एक-एक ऐसा मामला आया है, जिसमें बीमाधरक और नामित दोनों का निधन हुआ है। ऐसे मामलों को नियम-प्रावधानों के हिसाब से सुलझाया जा रहा है। जानकार बताते हैं कि जब बीमाधारक और नामित दोनों का किसी दुर्घटना आदि में निधन हो जाता है, तो प्रथम रक्त-सम्बन्धी (क्लास-वन ब्लड रिलेटिव) को बीमा-राशि का भुगतान करने का प्रावधान है। हालाँकि, इसके लिए कुछ काग़जात जमा कराए जाते हैं। 

मिसाल के तौर पर अगर किसी दुर्घटना में कोई बीमाधारक (पुरुष) और उसकी पत्नी (नामित) का निधन हो जाता है, तो उस दम्पति के बच्चों को बीमा की रकम मिलेगी। बच्चे अगर एक से अधिक हैं, तो बीमा कम्पनियाँ उनसे पक्के काग़ज पर (डिक्लेरेशन) लिखवाकर लेंगी कि वे बीमा की रकम कैसे और किसके खाते में, कितनी चाहते हैं। दूसरा- उनसे एक क्षतिपूर्ति बंधपत्र (इन्डेम्निटी बॉन्ड) भी लिया जाएगा। क्षतिपूर्ति बंधपत्र दो पक्षों के बीच में होने वाला कानूनी समझौता होता है। इसके माध्यम से एक पक्ष दूसरे को वचन देता हे कि वह सम्बन्धित व्यक्ति या संस्था को किन्हीं कार्यों या लापरवाही के कारण होने वाले किसी भी संभावित आर्थिक नुकसान की भरपाई करेगा।

अलबत्ता, जानकार इससे भी आगे की एक स्थिति बताते हैं। वह बच्चों के भी न होने की स्थिति। तब बीमाधारक के माता-पिता, भाई-बहन में से किसी को बीमा दावे की राशि मिल सकती है। बशर्ते, बीमाधारक के साथ उनका रक्त-सम्बन्ध (ब्लड रिलेशन) कानूनन स्थापित हो चुका हो। जैसे अहमदाबाद विमान दुर्घटना में मारे गए लोगों के सम्बन्धियों के डीएनए परीक्षण के माध्यम से पहचान और पुष्टिकरण का काम हो रहा है। 

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Neelesh Dwivedi

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