सांकेतिक तस्वीर
रवि खवसे, मुलताई, मध्यप्रदेश
मैं बात मुलताई नगर की कर रहा हूँ, जो मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में आता है। इसलिए कि मैं मुलताई का ही रहने वाला हूँ। यहाँ, हमारे नगर में कुछ बैंक, कुछ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स ऐसे हैं, जिनके सामने पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। कहीं अगर है भी तो इतनी कम कि उससे काम चलता नहीं। इन प्रतिष्ठानों ने इस अहम मसले पर आज तक कोई चिन्ता नहीं की, न ही कोई जरूरी कदम उठाया।
इस कारण इन प्रतिष्ठानों में आने वाले लोगों को वाहन खड़े करने में बहुत परेशानी होती है। सड़क किनारे वाहन खड़े करने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। कई बार दुर्घटना तक हो जाती है। सरकारी जमीन पर वाहन खड़े हो रहे हैं। इससे भी अव्यवस्था फैल रही है। जबकि नियमानुसार जहाँ बैंक जैसे अधिक आवाजाही वाले प्रतिष्ठान संचालित होते हों, वहाँ उनकी अपनी पार्किंग व्यवस्था होना जरूरी है। ताकि वहाँ आने वालों को असुविधा न हो। लेकिन इस नियम का लगातार खुलेआम उल्लंघन होता है।
मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ कि यह समस्या सिर्फ मुलताई की नहीं है। देशभर में यह समस्या होगी। बल्कि होगी क्या, है। मगर इस पर किसी का ध्यान नहीं जाता। कोई जाँच नहीं होती। गैरजिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई भी नहीं होती। और बात सिर्फ पार्किंग की भर नहीं है, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की समस्या भी विकराल है। बड़े रसूखवालों के संरक्षण में अतिक्रमण किया-कराया जाता है। आखिर क्यों? आम आदमी की असुविधा का किसी को कोई ख्याल क्यों नहीं आता? क्या आम आदमी सिर्फ वोट देने के लिए होता है?
सोचना होगा, ऐसे मसलों पर और आवाज भी उठानी होगी। ताकि जिम्मेदारों का इन पर ध्यान जाए।
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(नोट : रवि #अपनीडिजिटलडायरी के एक पाठक हैं। डायरी के सरोकार भरे प्रयासों से प्रोत्साहित होकर उन्होंने अपने ये विचार लिखकर डायरी के मेल पर भेजे हैं। उनकी तरह अन्य पाठक भी ऐसे जनसरोकार से जुड़े मसलों पर अपने विचार डायरी को भेज सकते हैं। डायरी में उन्हें सहर्ष प्रकाशित किया जाएगा।)
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