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देश के ‘सबसे पुराने राजनैतिक दल के मालिक’ क्या भारतीय संस्कृति को नहीं समझते?

टीम डायरी

अपने से बड़ों का सम्मान करना भारतीय संस्कृति के प्रमुख मूल तत्त्वों में से एक है। अगर कोई उम्र में बड़ा है, तो उसे सम्मान के साथ संबोधित करना, उसका आदर से अभिवादन करना, यह हर भारतीय को बचपन से सिखाया ही जाता है। यह भी सिखाया जाता है कि अगर कोई पद में, रिश्ते में बड़ा है, तो भले वह उम्र में छोटा रहे, उसे पूरा सम्मान देना चाहिए क्योंकि रिश्तों की, पद की अपनी गरिमा होती है, मर्यादा होती है। 

लेकिन लगता है, देश के ‘सबसे पुराने राजनैतिक दल के मालिक’ भारतीय संस्कृति और सभ्यता के इस मूल तत्त्व को नहीं समझते, या समझ पा नहीं रहे हैं, या फिर समझना चाहते ही नहीं हैं। उनके कुछ पुराने-नए वीडियो नीचे दिए गए हैं। एक-एक कर उन्हें देखें, तो यह बात अपने आप स्पष्ट हो जाएगी। 

नीचे दिया गया यह पहला वीडियो 2013 का है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी की सरकार एक अध्यादेश लाई थी। उस वक्त उच्चतम न्यायलय ने आदेश दिया था कि जिन सांसदों/विधायकों को दो साल से ज्यादा की सजा हो, वे तुरंत पद से अयोग्य हो जाएँगे। मनमोहन सरकार अदालत के फैसले को बदलने के लिए अध्यादेश लाई। राहुल गाँधी ने कहा, ‘यह एकदम बकवास अध्यादेश है। इसे फाड़कर फेंक देना चाहिए।” उन्होंने मीडिया वालों के सामने अध्यादेश की प्रति फाड़ भी दी। इस तरह अपने ही दल के, देश के प्रधानमंत्री को शर्मिंदा किया।  

यह दूसरा वीडियो साल 2018 या 2019 का है। उस वक्त लंबे समय बाद मध्य प्रदेश में सरकार बदली थी। कमलनाथ जी के नेतृत्त्व में नई सरकार बनी थी। कमलनाथ जी को देश के सबसे पुराने राजनैतिक दल में एक वक्त वह हैसियत मिली हुई थी, जो संजय गाँधी जी और राजीव गाँधी जी की थी। उन्हें इन्दिरा गाँधी जी का तीसरा बेटा कहा जाता रहा। वह संजय गाँधी जी के साथ पढ़े भी हैं। लेकिन नीचे दिए वीडियो में देखिए और सुनिए भी कि इस राजनैतिक दल के नए ‘मालिक’ अपने पिता की उम्र के कमलनाथ जी से कैसे बात कर रहे हैं।   

तीसरा वीडियो यह ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के समय का है। इसमें अपनी छोटी बहन के साथ किस तरह का स्नेह प्रदर्शन किया जा रहा है, यह भी गौरतलब है। अलबत्ता यह उनका निजी मसला है। वह जैसे चाहें अपने रिश्ते निभा सकते हैं। लेकिन फिर भी भारतीय संस्कृति में इस तरह के प्रदर्शन को उचित तो बिल्कुल नहीं समझा जाता। क्योंकि जैसा पहले ही लिखा गया, उम्र में अगर कोई हमसे छोटा है किन्तु पद में बड़ा है, तो उसे सम्मान देना ही हमें सिखाया जाता है। घर की बहू-बेटियों को भी हमेशा उसी सम्मानित दायरे में रखा और देखा जाता है।  

यह चौथा वीडियो है। इसमें सुनिए कि स्वयं को देश का भावी प्रधानमंत्री मानने वाले हमारे नेता देश के पूर्व सेना प्रमुख के बारे में कैसे बात कर रहे हैं। ‘लिखता है’, ‘कहता है’, जैसे अनादरपूर्ण संबोधन साफ सुने जा सकते हैं। इतना ही नहीं, पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे जी की अप्रकाशित पुस्तक को लेकर संसद में काफी हंगामा भी किया था उन्होंने। और मसला क्या था? इतना कि भारत-चीन टकराव के समय प्रधानमंत्री ने तत्कालीन सेना प्रमुख नरवणे जी से कहा था, “जो उचित समझें, वही करें।” हमारे घरों में बड़े-बुजुर्ग लोग जब ऐसी बात कहते हैं, तो यह उनके उस भरोसे की घोषणा होती है, जो वे अपने से छोटों पर करते हैं। अभी हाल में एक साक्षात्कार के दौरान नरवणे जी ने भी यही कहा। लेकिन ‘देश के सबसे पुराने दल के मालिक’ को यह नहीं समझ आया।   

और यह पाँचवों वीडियो, पर शायद अंतिम न हो! इसमें देश के मौजूदा प्रधानमंत्री के लिए किस तरह अनादरपूर्ण शब्दों के साथ यह नेता कह रहे हैं, “मैं नहीं डरता नरेन्द्र मोदी से। अगर कोई डरता है तो नरेन्द्र मोदी डरता है। क्योंकि वह जानता है कि एक न एक दिन हमारे बब्बर शेर उसे पकड़ लेंगे।” 

अब सोचिए और बताइए। जो नेता हमारे देश की संस्कृति, परंपरा की मूल भावना को भी न समझता हो, अपने आगे किसी को कुछ भी न देखता हो, किसी पद-किसी रिश्ते की मर्यादा न मानता हो, सभी से अपने नौकर-चाकर की तरह व्यवहार करता हो, वह अगर देश के शीर्ष पद पर पहुँचा तो क्या होगा?  

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