Categories: cover photo

महिला दिवस : सम्मान सिर्फ एक दिन का ही क्यों, अधिकार जीवनभर का क्यों नहीं?

खुशी अरोड़ा, दिल्ली

​वह नींव है घर की, वह आकाश है समाज का, उसे जरूरत नहीं साल के किसी एक खास ‘दिवस’ की। मत बाँधो उसे सिर्फ आठ मार्च की बेड़ियों में। हर दिन हक है उसका, उसके मान-सम्मान का।

‘​महिला दिवस’ हर साल आठ मार्च को पूरे जोश के साथ मनाया जाता है। सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं की बाढ़ आ जाती है। दफ्तरों में फूल बाँटे जाते हैं और विज्ञापनों में महिलाओं की शक्ति का बखान होता है। लेकिन मैं यहाँ पूछना चाहती हूँ, “क्या साल का केवल एक दिन महिलाओं को समर्पित कर देना पर्याप्त है? क्या यह वास्तव में उस सम्मान और सुरक्षा को सुनिश्चित करता है, जिसकी हकदार हर महिला है?”

​असल में, महिलाओं को सिर्फ एक दिन के औपचारिक उत्सव की नहीं, बल्कि 365 दिन मिलने वाले सम्मान की, अधिकार की आवश्यकता है। ऐसा नहीं हो सकता कि साल में एक दिन उन्हें सम्मान मिले और बाकी के हर दिन दर्द और अपमान झेलना पड़े। हमारे देश में रोज कोई न कोई महिला किसी न किसी ऐसे दर्द से गुजरती है, जो उसकी जिन्दगी और आत्म-सम्मान को ठेस पहुँचाता है। महिला दिवस पर हम अक्सर जिन अधिकारों और बदलावों की बात करते हैं, उन्हें हम अगले ही दिन भुला देते हैं। लेकिन मैं पूछती हूँ, “असली बदलाव आखिर आएगा कब?”

मैं ही बताती हूँ, “असली बदलाव तब आएगा, जब घर के नियम और कानून सिर्फ लड़कियों के लिए नहीं, बल्कि लड़कों के लिए भी बनाए जाएगें। असली बदलाव तब आएगा, जब सड़कों पर महिलाएँ खुद को सुरक्षित महसूस करने लगेंगी। और ऐसा बदलाव तभी आ सकता है, जब हमारे समाज में रहने वाला हर व्यक्ति अपनी सोच में बसे भेदभाव को पूरी तरह खत्म करे। अन्यथा यह एक दिन का उत्सव केवल एक रस्म बनकर रह जाएगा।”

​मैं यहाँ फिर एक प्रश्न पूछना चाहती हूँ कि क्यों अब भी कई जगह महिलाएँ डर-डर के जीती हैं? इसलिए क्योंकि अब भी उन्हें सुरक्षित वातावरण, निर्णय लेने की स्वतंत्रता और अपने पंख फैलाने की जगह नहीं मिल पाई है। अब भी हमारे देश में ऐसी कई जगहें हैं, जहाँ औरतों को बराबरी और सम्मान नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि उन्हें अब भी कमतर और कमजोर समझा जाता है। ​मानसिकता में बदलाव ही असली मंजिल है।

माना कि महिला दिवस एक अच्छी और नेक शुरुआत हो सकती है, लेकिन यह मंजिल नहीं है। हमें ‘एक दिन के सम्मान’ वाली मानसिकता से ऊपर उठकर ‘जीवन भर के अधिकार’ वाली सोच को विकसित करना होगा। तभी हर माँ, बहन, पत्नी, बेटी और समाज की सभी महिलाएँ अपना जीवन बिना किसी डर के जी पाएँगी और अपने सपनों को पूरा कर पाएँगीं।

​मेरे हिसाब से एक असली महिला दिवस की शुरुआत तभी होगी, जब एक महिला आधी रात को भी अपने घर सुरक्षित लौट पाएगी। जब एक महिला अंतरिक्ष से लेकर खेल के मैदान तक अपनी धाक मजबूती से जमा पाएगी, वह भी बिना किसी भय, रोक-टोक और भेदभाव के। साथ ही, हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना होगा, जहाँ महिलाओं का सम्मान एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा हो।

अंततः, मैं यह कहना चाहूँगी कि सच्चा सशक्तिकरण सिर्फ कैलेण्डर की तारीखों में नहीं, बल्कि समाज की मानसिकता और सुरक्षा में बदलाव लाने से ही संभव है। 

धन्यवाद 

—–
(खुशी डायरी की नियमित पाठकों में से एक हैं। वह दिल्ली के आरपीवीवी सूरजमल विहार स्कूल से 12वीं कक्षा पास करने के बाद अब आगे की तैयारी कर रही हैं। वह हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखती हैं। उन्होंने वॉट्सएप सन्देश के जरिए यह पोस्ट #अपनीडिजिटलडायरी तक पहुँचाई है। )
—–
खुशी के पिछले 10 लेख

11 – Happy Father’s Day : A gratitude to the father’s dedication
10- Dream of Digital India : A cashless India is the first step towards
9 – Talking-Tree : I am also a living witness of this earth
8 – “Heat stroke can kill, get hydrated and chill” 
7- भगवान सबके पास नहीं हो सकते, इसलिए माँ बनाई, उसके लिए रोज 10 मिनट दीजिए
6 – No Smoking Day : Replace your cigarette with a glass of juice daily
5- इस मौसम में बारिश! हम प्रकृति का तारतम्य बिगाड़ क्यों रहे हैं?
4- घर में बच्चों को ‘लैंगिक समानता’ के बारे में भी बताएँ, ताकि वे आगे कोई भेद न करें
3- अपने शिक्षकों के लिए एक बच्ची की भावना : ज्ञान प्रकाशित कीजिए, आप समर्थ बलवान
2- कितना बेहतर हो, अगर हम लड़कियों को उनकी सुरक्षा करना भी सिखाएँ!

सोशल मीडिया पर शेयर करें
From Visitor

Share
Published by
From Visitor

Recent Posts

अवचेतन मस्तिष्क 10 भिन्न तरीकों से सोच सकता है, यही है रावण के 10 सिरों का राज?

भारत के पौराणिक साहित्य को मिथक या कपोल कल्पना बताकर खारिज करने वाले पश्चिम जगत… Read More

1 hour ago

जनगणना हो रही है, जनसंख्या बढ़ रही है और आंध्र में आबादी बढ़ाने वालों को ‘इनाम’!

देश में जनगणना होने वाली है। मतलब जनसंख्या कितनी है और उसका स्वरूप कैसा है,… Read More

3 days ago

एक यात्रा, दो मुस्लिम ड्राइवर और दोनों की सोच….सूरत-ए-हाल गौरतलब!

अभी एक तारीख को किसी जरूरी काम से भोपाल से पन्ना जाना हुआ। वहाँ ट्रेन… Read More

5 days ago

सेवा-तीर्थ में ‘भारतीय भाषाओं’ की सेवा नहीं हुई, आगे शायद ही हो!! वीडियो से समझिए!

भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर का उद्घाटन 13 फरवरी 2026 को हुआ। इसे… Read More

1 week ago

भ्रष्ट-आचार अब एक शिष्ट-विचार, इसे खत्म करना मुश्किल, दो उदाहरणों से समझिए कैसे?

‘भ्रष्ट’ का अर्थ है- जब कोई अपने धर्म (कर्तव्य-पथ) से दूर हट जाए और ‘आचार’… Read More

1 week ago