छूटने से ऐन पहले लोकल को किसी तरह दौड़ते-भागते पकड़ लेना, टूटती साँस की डोर को थाम लेने जैसा आभास कराता है। ये लक्ष्य तय…
View More ‘लोकल’ बहुत सारी चीज़ें सिखाती है, ज़िन्दगी के फ़लसफ़े बताती हैAuthor: Neelesh Dwivedi
गुरु की सीख : नीयत भले जल्द बदल जाए, पर वक़्त के साथ नियति भी बदल ही जाती है
उस रोज़ संगीत दिवस था। तारीख इसी 21 जून की। एक घटना ऐसी हुई कि मुझे महाभारत का एकलव्य-द्रोण-अर्जुन प्रसंग फिर याद आ गया। ऐसी…
View More गुरु की सीख : नीयत भले जल्द बदल जाए, पर वक़्त के साथ नियति भी बदल ही जाती हैआदिपुरुष का विरोध मतलब चेतावनी- अगर आप सीमा लाँघेंगे तो प्रतिकार होगा!
यकीनन पिछले कुछ दिनों से हिन्दुत्व के नवगायक मनोज काफी ‘मुंतशिर’ (बिखरा हुआ) रहे होंगे। वह ‘आदिपुरुष’ की रिलीज के बाद उठे गदर में पहले…
View More आदिपुरुष का विरोध मतलब चेतावनी- अगर आप सीमा लाँघेंगे तो प्रतिकार होगा!‘मायावी अंबा और शैतान’ : मौत को जिंदगी से कहीं ज्यादा जगह चाहिए होती है!
अब तक वहाँ का माहौल ऐसा हो चुका था जैसे कुछ बड़ा होने वाला हो। मगर वे लोग जिस प्राचीन ‘हबीशी’ जनजाति से ताल्लुक रखते…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : मौत को जिंदगी से कहीं ज्यादा जगह चाहिए होती है!महिलाओं को ‘भोग्य’, ‘उपभोग्य’ की तरह पेश कर के क्या हमारे परिवार नष्ट किए जा रहे हैं?
‘देह ही देश’! अभी तक मैंने यह पुस्तक पढ़ी नहीं है। लेकिन इसकी समीक्षाएँ पढ़कर इसे पढ़ने की उत्कंठा अवश्य है। इसीलिए पुस्तक को पढ़े…
View More महिलाओं को ‘भोग्य’, ‘उपभोग्य’ की तरह पेश कर के क्या हमारे परिवार नष्ट किए जा रहे हैं?मायावी अंबा और शैतान : “अरे ये लाशें हैं, लाशें… इन्हें कुछ महसूस नहीं होगा”
तभी तेज हवा का थपेड़ा अंबा के चेहरे से टकराया और उसके गले से होते हुए भीतर पेट तक उतर गया। इससे उसे ऐसा लगा…
View More मायावी अंबा और शैतान : “अरे ये लाशें हैं, लाशें… इन्हें कुछ महसूस नहीं होगा”एक ने मयूरपंख को परमात्मा का स्मृति-चिह्न बना पूजा और दूजे ने…!
पतित मानस द्वारा समानता की माँग अपनी अनार्यता छिपाने का स्वाँग ही होता है। एक समान अनुभूति होने पर भी इंसान उसका भोग अपने संस्कारों…
View More एक ने मयूरपंख को परमात्मा का स्मृति-चिह्न बना पूजा और दूजे ने…!‘मायावी अंबा और शैतान’ : वे लोग नहीं जानते थे कि प्रतिशोध उनका पीछा कर रहा है!
खून जमा देने वाली सर्दी में बर्फ पर चलते हुए तलाशी दस्ता धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था। सर्द हवा ऐसी चुभ रही थी, जैसे शरीर…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : वे लोग नहीं जानते थे कि प्रतिशोध उनका पीछा कर रहा है!‘मायावी अंबा और शैतान’ : जन्म लेना ही उसका पहला पागलपन था
वह छोटी बच्ची पूरी रात अपनी माँ को तलाशती रही। जोतसोमा के जंगल की बाड़ के पास पहुँचते ही उसकी साँसें थम गईं। एकाएक वह…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : जन्म लेना ही उसका पहला पागलपन थाअगर पेड़ भी चलते होते…. तो क्या होता? सुनिएगा!
अगर पेड़ भी चलते होतेअगर पेड़ भी चलते होतेकितने मज़े हमारे होतेबांध तने में उसके रस्सीचाहे जहाँ कहीं ले जाते जहाँ कहीं भी धूप सतातीउसके…
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