ये जयपुर के राधागोविन्द देव जी मन्दिर का मनमोहक दृश्य है। हर साल मकर संक्रान्ति पर भक्त यहाँ ऐसे ही अपने आराध्य गोविन्द देव से…
View More देखिए, भक्त कैसे अपने गोविन्ददेव जी को साथ में पतंग उड़ाने के लिए बुला रहे हैंAuthor: Neelesh Dwivedi
‘सरकार’ हिन्दी के लिए ऐसे कैसे जगेगा स्वाभिमान, जब आप ही…!
नीचे दी गईं ये तस्वीरें केन्द्र सरकार के ‘नागर विमानन मंत्रालय’ से ताल्लुक रखती हैं। उसकी ओर से सोशल मीडिया पर नियमित रूप से साझा…
View More ‘सरकार’ हिन्दी के लिए ऐसे कैसे जगेगा स्वाभिमान, जब आप ही…!‘12वीं फेल’ की चमक-दमक के बीच एक ‘छोटी सी बड़ी’ फिल्म यह भी देखिए, ‘प्लूटो’
अभी हर तरफ़ एक बेहद सफल फिल्म ‘12वीं फेल’ के चर्चे हैं। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी श्री मनोज शर्मा के जीवन की सच्ची…
View More ‘12वीं फेल’ की चमक-दमक के बीच एक ‘छोटी सी बड़ी’ फिल्म यह भी देखिए, ‘प्लूटो’‘मायावी अम्बा और शैतान’ : खून और आस्था को कुरबानी चाहिए होती है
अंबा के खाली पेट में गुड़गुड़ाहट हो रही थी। भूख के कारण बहुत कमजोरी लग रही थी। लिहाजा, वह पास में ही बह रही नदी…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : खून और आस्था को कुरबानी चाहिए होती हैनव वर्ष में प्रभु श्रीराम की कृपा सब पर बने रहे, ऐसी संगीतमय कामना बाँसुरी पर सुनिए
नए वर्ष का पहला दिन, नई सम्भावनाएँ, नई उम्मीदें, नई आशाओं के द्वार खोलता हुआ आया है। इस मौके पर #अपनीडिजिटलडायरी के सभी सदस्यों की…
View More नव वर्ष में प्रभु श्रीराम की कृपा सब पर बने रहे, ऐसी संगीतमय कामना बाँसुरी पर सुनिए‘मायावी अम्बा और शैतान’ : मृतकों की आत्माएँ उनके आस-पास मँडराती रहती हैं
धुंध में घिरा जोतसोमा जल्दी ही जमीन के नीचे से बाहर निकल आए जीव-जंतुओं के लिए जानलेवा खेल का मैदान बन गया था। सूरज ढलने…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : मृतकों की आत्माएँ उनके आस-पास मँडराती रहती हैंये विज्ञापन है, पर हम प्रसार कर रहे हैं… ताकि किसी की आँखें खुल सकें!
ये विज्ञापन है। इस पर #अपनीडिजिटलडायरी का कोई कॉपीराइट नहीं। किसी तरह का अधिकार नहीं। जिन्होंने इसे बनाया है, सब कुछ उन्हीं का है। अलबत्ता…
View More ये विज्ञापन है, पर हम प्रसार कर रहे हैं… ताकि किसी की आँखें खुल सकें!‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह तब तक दौड़ती रही, जब तक उसका सिर…
अंबा के लिए बैकाल जेल से दूर निकल जाना बहुत जरूरी था। कोई और रास्ता नहीं था, सिवाय इसके कि वह सामने दिख रहे अँधेरे,…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह तब तक दौड़ती रही, जब तक उसका सिर…काम को संज़ीदगी से नहीं किया, तो समझो पत्ता साफ़?
कुछ लोगों की आदत होती है कि वे अपने ही काम के प्रति बहुत संज़ीदा नहीं होते। उसे चलताऊ तरीक़े से किया करते हैं। इसलिए…
View More काम को संज़ीदगी से नहीं किया, तो समझो पत्ता साफ़?एक-दूसरे के साथ हमारी संगत या संगति कैसी हो, इस मिसाल से समझिए!
जिसे भी देखिए, वो अपने आप में ग़ुम है। ज़ुबाँ मिली है, मगर हमज़ुबाँ नहीं मिलता।। यह मशहूर शेर हम में अधिकांश लोगों की ज़िन्दगी की…
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