विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी की सरकार जो तीखी आलोचना हुई, वैसी कभी देखने-सुनने को नहीं…
View More चाल-कुचालों के बीच क्या जातियों-समाजों का आपसी अनुबंध सनातन को बचा सकता है?Tag: अपना पन्ना
सोचिए, अगर दो-ढाई करोड़ युवा सड़कों पर बेरोजगार घूमते रहते, तो क्या होता!
भारत में अस्थायी कामगारों (खास तौर पर सामान की डिलीवरी करने वाले लड़के, वाहन चालक, आदि) की संख्या कितनी हे? 1.2 करोड़! और इतने सारे…
View More सोचिए, अगर दो-ढाई करोड़ युवा सड़कों पर बेरोजगार घूमते रहते, तो क्या होता!क्या हम आज जो ‘धर्माचरण’ कर रहे हैं, उससे अधर्म की अभिवृद्धि हो रही है?
नव-हिन्दुत्व के आगमन के साथ तीर्थ – धाम, मन्दिरों में दर्शनार्थियों की और कथा-प्रवचनों के आयोजनों की बाढ़ सी आई है। वैष्णवदेवी, काशी, अयोध्या, पुरी,…
View More क्या हम आज जो ‘धर्माचरण’ कर रहे हैं, उससे अधर्म की अभिवृद्धि हो रही है?बेटी के नाम 12वीं पाती : जीवन की असल रंगत तुम्हीं से है मेरी बच्ची, जन्मदिन शुभ हो
प्रिय मुनिया मेरी लाडो, मैं तुम्हें यह पत्र तुम्हारे पाँचवें जन्मदिन पर लिख रहा हूँ। आज 27 जनवरी 2026 को तुमने जीवन के चार बसंत…
View More बेटी के नाम 12वीं पाती : जीवन की असल रंगत तुम्हीं से है मेरी बच्ची, जन्मदिन शुभ होबिना इंजन वाला भारतीय जहाज ‘कौण्डिन्य’ मस्कट पहुँच गया, तो इससे क्या हासिल हुआ?
इतिहास दोबारा लिख दिया गया। आइएनएसवी कौण्डिन्य मस्कट पहुँच गया! सवाल हो सकता है कि आखिर इसमें ऐसी क्या खास बात है? तो जवाब है…
View More बिना इंजन वाला भारतीय जहाज ‘कौण्डिन्य’ मस्कट पहुँच गया, तो इससे क्या हासिल हुआ?नोबेल की लूट है, लूटत बने तो लूट…, और डोनाल्ड ट्रम्प नोबेल लूट ले गए!
कबीर दास जी कह गए थे, “राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट। पाछे फिर पछताएगा, प्राण जाहि जब छूट।।” लगता है अमेरिकी…
View More नोबेल की लूट है, लूटत बने तो लूट…, और डोनाल्ड ट्रम्प नोबेल लूट ले गए!क्या नव-हिन्दुत्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए अस्तित्त्व की चुनौती है?
सन 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साथ हिंदुत्व ने नए चरण में प्रवेश किया है। यह अपने पूर्ववर्ती और आरंभिक रूप अलग…
View More क्या नव-हिन्दुत्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए अस्तित्त्व की चुनौती है?कविता : मैं मरते ही ‘शब्द’ हो जाऊँगा, और गाँव की हर किताब के पन्नों पर मिलूँगा…!
मुझे जहान की गर्द में मत ढूँढना प्यारे।मैं जब नहीं रहूँगा, तो गाँव की उसी ‘सुनहरी-भस्म’ के साथ उड़ता मिलूँगा, जिसे तुम धूल कहते हो।…
View More कविता : मैं मरते ही ‘शब्द’ हो जाऊँगा, और गाँव की हर किताब के पन्नों पर मिलूँगा…!इन्दौर : आपने हमें विफल कर दिया, साफ शहर में गन्दे पानी से मौतें, शर्मनाक!
इन्दौर, आपने हमें विफल कर दिया! शर्म की बात है कि देश का सबसे साफ शहर अपने लोगों को पीने के लिए साफ पानी तक…
View More इन्दौर : आपने हमें विफल कर दिया, साफ शहर में गन्दे पानी से मौतें, शर्मनाक!लोकतंत्र में सरकार और जनता के बीच की ‘दीवार’ का नाम- ‘संवेदनहीन नौकरशाही’
एक छोटी-सी समस्या के समाधान के लिए व्यक्ति फ़ाइलों के जंगल में भटकता है। फोन उठाने से लेकर जवाब देने तक हर कदम पर दीवार…
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