Village

‘रे मन चल गाँव की ओर’… यह कोई पलायन नहीं है!

भारत की आत्मा जहाँ बसती है, वह गाँव हैं। ये सुन्दर, सुरम्य स्थल हर भारतीय के मन में हमेशा से बसा रहा है। यहाँ प्रत्येक…

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River

चार लाइनों में सुनिएगा…. पुरुष और स्त्री मन के सोचने के भिन्न तरीकों के बीच बहता जीवन!

पुरुष और स्त्री के सोचने के तरीक़े में फ़र्क होता है। सभी जानते हैं। लेकिन इस अन्तर की गहराई की थाह कुछेक लोग ही ले…

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Parwanoo Himachal Pradesh

ये हिमाचल का परवाणु है, यहाँ ‘पॉज़िटिविटी’ का परमाणु है!

वैसे तो पूरा हिमाचल प्रदेश ही ख़ूबसूरती की दुशाला (शॉल जैसा वस्त्र) ओढ़े हुए है। लेकिन यहाँ एक जगह है परवाणु। वह अपनी अलग पहचान…

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Veer Sawarkar

मैंने जीवन में अब तक जो भी कहा, उससे कभी विमुख नहीं हुआ : सावरकर

‘विनायक दामोदर सावरकर’ स्वतंत्रता आन्दोलन के वह क्रान्तिकारी, जो अपने समय के क्रान्तिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत रहे है। लेकिन सोचनीय बात है कि एक समय…

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Gulmohar

चन्द लाइनें, जो होंठों पर मुस्कुराहट ला देंगी

आवाज़ मद्धम है, तो शायद थोड़ा ज़ोर लगे सुनने में। लाइनें भी चन्द ही हैं। इसलिए वक़्त एक मिनट से भी कम का लगेगा। लेकिन…

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Hariharan

शहरों में किरदार, किरदारों में शहर रहते हैं, हमने सुना है….

सोहबत अपना असर दिखाती ही है जनाब। माहौल भी पुरअसर हुआ करता है। अब देखिए न, अभी 20 मई को, शनीचर की रोज़ शहर भोपाल…

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meditation

जिसने अपने लक्ष्य समझ लिया, उसने जीवन को समझ लिया, पर उस लक्ष्य को समझें कैसे?

जब भी किसी दुविधा में हों या मन खराब हो, तो हमें ध्यान करने की सलाह दी जाती है। ये चलन नया नहीं है, बल्कि…

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Buddh-Aanand

बुद्ध के आनन्द ने राजकुमारों से पहले एक नाई की प्रव्रज्या क्यों कराई?

तथागत बुद्ध के शिष्यों में आनन्द प्रमुख थे। तथागत के सभी शिष्यों में आनन्द को ही भगवन्‌ का सामिप्य सबसे अधिक प्राप्त था। यह आनन्द…

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GeetaTatva Mimansa

गीतातत्त्वमीमांसा : समसामयिक चिन्तन में सनातन धर्म प्रस्थान पर एक पठनीय टीका

श्रीमद्भगवद्गीता सनातन धर्म के सर्वसार ग्रन्थ के रूप में मान्य है। उपनिषद् (वेद), ब्रह्मसूत्र के साथ श्रीमद्भगवद्गीता को प्रस्थानत्रयी कहा जाता है। आस्तिक परम्परा में…

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Drinking water

क्या स्कूली बच्चों को पानी पीने तक का अधिकार नहीं?

आज-कल एक अहम खबर सुर्खियाँ बटोर रही है। यह कि पंजाब के फिरोजपुर के सरकारी विद्यालय में रोज़ तीन से चार बार घंटियाँ बजाई जा…

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