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सब भूलकर अपनी गठरी खोलो और जी लो, बस

जीवन के उत्तरार्ध में हम सब का मूल्याँकन रुपए-पैसे से होता है। कितनी पेंशन बनी, कितनी बचत थी, फंड कितना मिला, बच्चों को सैटल कर…

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Father Daughter

बेटी के नाम चौथी पाती : तुम्हारा होना जीवन की सबसे ख़ूबसूरत रंगत है

प्रिय मुनिया, मेरी जान, तुम्हारे जन्मोत्सव के बाद मुझे तुम्हें यह चौथा पत्र लिखने में तनिक विलम्ब हो गया है। मैं तुम्हें यह पत्र तुम्हारे…

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laughing Buddha

हम सब कुछ पाने के लिए ही करते हैं पर सुख क्यों नहीं मिलता?

एक सेठ जी को एक बार यह जानने की चिन्ता हुई कि मेरी सम्पत्ति कितनी है? इसका उपभोग और कितने दिन किया जा सकता है? सो, तत्काल उन्होंने अपने अकाउंटेंट को बुलवा भेजा और उससे जानना चाहा। बदले में लेखाधिकारी ने कुछ समय माँगा। कुछ दिनों बाद लेखाधिकारी सेठ जी को बताता है कि यह सम्पत्ति आपकी अगली आठ पीढ़ियों तक के लिए पर्याप्त है। फिर क्या था सेठ जी चिन्ता में डूब गए….

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एक पिता की बेटी के नाम तीसरी पाती : तुम्हारा रोना हमारी आँखों से छलकेगा

प्रिय मुनिया,  तुम्हें ये तीसरा पत्र लिखते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैं तुम्हें ये पाती तब लिख रहा हूँ, जब तुम ठीक…

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कर्म केवल शरीर से कहीं होना नहीं है….

दो मित्र थे। वे हर शनिवार की शाम एक वेश्या के पास जाया करते थे। एक शाम जब वे वेश्या के घर जा रहे थे,…

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एक पिता की बेटी के नाम दूसरी पाती….मैं तुम्हें प्रेम की मिल्कियत सौंप जाऊँगा

प्रिय मुनिया,  तुम्हें यह दूसरी पाती लिखते हुए बड़ा हर्ष हो रहा है, क्योंकि तुम चार दिन के बाद बीते रविवार 30 जनवरी को अस्पताल से…

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जो जीव को घुमाता रहता है, जानिए उस पुद्गल के बारे में

महत्त्वपूर्ण तत्त्वों की चर्चा में अजीव की भी चर्चा आवश्यक है। यह अजीव ही तो है जिसे हम देख पाते हैं। स्पर्श कर पाते हैं।…

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प्रिय मुनिया, मेरी लाडो, आगे समाचार यह है कि…

प्रिय मुनिया,  आज तुम्हें इस क़ायनात में कदम रखे हुए पूरे 3 दिन होने वाले हैं। 27 जनवरी की शाम 7.23 बजे तुमने इस खूबसूरत दुनिया…

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यह ज्ञान बड़ी विचित्र चीज है! जानते हैं कैसे…

हम श्रृंखला के पिछले भाग में ‘जीव’ को समझने की कोशिश कर रहे थे। जीव चेतना युक्त हो, विवेक पूर्ण हो आदि। उसकी एक विशेषता…

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हो आज रंग है री…आज रंग है री

हो आज रंग है री…आज रंग है री। तन – मन अधिक उमंग हर्षायो। बृज की होरी कान्हा की पिचकारी, गोपियन की रंग-रास बरजोरी। अंगिया-भंगिया…

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