महाराष्ट्र के पंढरपुर में भगवान विट्ठल के नाम से विष्णुजी का अवतार विराजित है। उनके दर्शनों के लिए पूरे महाराष्ट्र से पैदल यात्रा करते हुए…
View More आषाढ़ी एकादशी : हमेशा बने रहने वाले भक्ति-भाव से भरा भजन, विट्ठल-हरि के लिएTag: अपना पन्ना
जैन धर्म, जिसने भारतीय सनातन का विशिष्ट अंग होकर सार्थकता बनाए रखी
एक सुदर्शन युवा अपना समस्त वैभव, सुख, सुविधाएँ त्याग कर निकल पड़ता है। एक ऐसी खोज में जो सदियों से महान लोग करते आ रहे…
View More जैन धर्म, जिसने भारतीय सनातन का विशिष्ट अंग होकर सार्थकता बनाए रखीनि:शब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ!
भूपेन हजारिका के एक गाने की पंक्तियाँ याद आ रही हैं… “निःशब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ ” . नारी और नदी,…
View More नि:शब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ!जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी
वेदों में देवता से कई प्रकार के भाव लिए गए हैं। साधारणतः वेदमंत्रों के जितने विषय हैं, वे देवता कहलाते हैं। नैरुक्तकार यास्क ने देवता…
View More जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसीमैं अपने अँधेरों के संग बदस्तूर चल रहा हूँ
जीवन में मृत्यु एक शाश्वत और अनिवार्य सच्चाई है। इसकी अनिवार्यता अब तो इतनी हो चुकी है कि रोज ही इस किस्म की ख़बर सुनने…
View More मैं अपने अँधेरों के संग बदस्तूर चल रहा हूँजब कोई ‘लीडर’ से ‘लैडर’ हो जाए…
आज यूँ ही अपने छोटे शहर के कुछ वाक़ये याद हो आए। ये ऐसे वाक़ये हैं, तमाम लोगों के साथ गुजरे होंगे, जो ऐसे शहरों…
View More जब कोई ‘लीडर’ से ‘लैडर’ हो जाए…जो दिख रहा हो वास्तव में उतना ही सच नहीं होता
हमने पिछली कड़ी में देखा था कि कैसे एक वस्तु को अलग-अलग दृष्टि से देखने वाला व्यक्ति अलग व्याख्या करता है। प्रत्येक समग्रता से वस्तु…
View More जो दिख रहा हो वास्तव में उतना ही सच नहीं होताआओ, कोई इस तन के तम्बूरे में तार जोड़ दो!
आज फिर अमावस है और मैं गर्म ऊँची चट्टानों पर खड़ा तेज सूरज की रोशनी में जीवन का वृन्दगान सुन रहा हूँ। एक छोर पर…
View More आओ, कोई इस तन के तम्बूरे में तार जोड़ दो!यहाँ बिल्कुल अलग समाज दिखाई देता है, सामान्यतया तो ऐसे लोग दिखाई नहीं देते!
अभी कुछ रोज पहले मुंबई हवाईअड्डे पर था। उड़ान में देरी हो गई। 45 मिनट की। बिना किसी पूर्व सूचना के। यहाँ भीड़ थी। कुर्सियाँ…
View More यहाँ बिल्कुल अलग समाज दिखाई देता है, सामान्यतया तो ऐसे लोग दिखाई नहीं देते!सिक्के के कितने पहलू होते हैं.. एक, दो या ज्यादा.. जवाब यहाँ है!
मानव के मन में विचारों को श्रृंखला जन्म लेती है। और विविध विचारों के जन्म का कारण उसका परिवेश होता है। हम जैसे परिवेश में…
View More सिक्के के कितने पहलू होते हैं.. एक, दो या ज्यादा.. जवाब यहाँ है!