दो जासूस, दोनों के दोनों प्रगतिशील किस्म के। देश-दुनिया की समस्याओं पर घंटों चर्चा करके कन्क्लूजन को अपनी तशरीफ़ वाली जगह पर छोड़कर जाने वाले। दोनों…
View More दो जासूस, करें महसूस कि जमाना बड़ा खराब है…Tag: रोचक-सोचक
अपने बच्चों से हमें बाज की परवाज़ सी उम्मीद कब करनी चाहिए?
बड़ी मौज़ूँ है ये कहानी। अभी जब जापान की राजधानी में टोक्यो में ओलम्पिक खेल चल रहे हैं, तब ख़ास तौर पर। बाज या शाहीन, जिसे…
View More अपने बच्चों से हमें बाज की परवाज़ सी उम्मीद कब करनी चाहिए?जगन्नाथ की मूर्तियों का सन्देश, अधीरता का हासिल अधूरापन होता है
उस ज़माने में ओडिशा या उत्कल प्रदेश के राजा हुआ करते थे इन्द्रद्युम्न। भगवान नीलमाधव, यानि श्रीहरि, श्रीकृष्ण के भक्त थे। कहते हैं, उन्हें एक रोज…
View More जगन्नाथ की मूर्तियों का सन्देश, अधीरता का हासिल अधूरापन होता हैएक किस्सा..पीठ पीछे की बातों में दिलचस्पी लेने, यकीन करने वालों के लिए!
प्राचीन ग्रीस की कहानी है। वहाँ के एक बड़े दार्शनिक हुए हैं, सुकरात। एक बार कोई परिचित उनके पास आए। आते ही बड़ी आतुरता से कहने लगे,…
View More एक किस्सा..पीठ पीछे की बातों में दिलचस्पी लेने, यकीन करने वालों के लिए!ऐसा हम नहीं, बड़े-बुज़ुर्ग कह गए हैं…
बड़ों की बातें हैं। इसी तरह की होती हैं। सालों पहले कही जाती हैं। सालों बाद तक सुनी जाती हैं। उनकी कीमत कहे जाते वक्त…
View More ऐसा हम नहीं, बड़े-बुज़ुर्ग कह गए हैं…पहले मुर्गी आई या अंडा, ये महज़ एक पहेली नहीं है!
उसके घर के बाहर चबूतरे पर कुछ बच्चे बैठे-ठाले पहेलियाँ बुझा रहे थे। इन्हीं में से एक पहेली थी, “मुर्गी पहले आई या अंडा आया।” पूछने…
View More पहले मुर्गी आई या अंडा, ये महज़ एक पहेली नहीं है!हम अपने रत्नों का सही सम्मान करना कब सीखेंगे?
ये तस्वीर अपने आप में बहुत कुछ कहती है। वाराणसी की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र। शहनाई का दूसरा नाम कहे जाने वाले उस्ताद बिस्मिल्लाह…
View More हम अपने रत्नों का सही सम्मान करना कब सीखेंगे?कबीर की वाणी, कोरोना की कहानी…साधो ये मुर्दों का गाँव…!
आज संत कबीरदास जी की जयन्ती है। ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि। सन् 1398 में कबीरदास जी का जन्म हुआ, ऐसा बताया जाता है। मतलब आज…
View More कबीर की वाणी, कोरोना की कहानी…साधो ये मुर्दों का गाँव…!जब हमारा अस्तित्त्व नहीं था, संघर्ष तब भी था और जीत भी हमारी थी!
किसी ने वॉट्सएप पर एक सन्देश भेजा। पढ़ते ही इतना प्रासंगिक और सत्यपरक लगा कि मैंने इसे तुरन्त #अपनीडिजिटलडायरी के साथ साझा करने का निर्णय…
View More जब हमारा अस्तित्त्व नहीं था, संघर्ष तब भी था और जीत भी हमारी थी!ये क्या है, किसी विचार का समर्थन या उससे ग्रस्त-त्रस्त हो जाना?
मामला पूरी तरह निजी है। फिर भी विचार के लिए एक रोचक विषय है और सोचक यानि सोचनीय भी। क्योंकि इसी तरह के मामले अक्सर समाज…
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