दीपावली केवल लक्ष्मी के आगमन का नहीं बल्कि आत्ममंथन का भी समय है। जब हम घर के हर कोने की धूल झाड़ते हैं, तो दरअसल…
View More समय है जब हमें गोवर्धन पूजा की व्याख्या नए अर्थों में देखनी चाहिए, जीवनशैली के रूप मेंTag: सरोकार
धनतेरस : धन का उययोग विलासिता के लिए नहीं, स्वास्थ्य और जीवन-रक्षा के लिए हो
धनतेरस का नाम लेते ही आँखों के सामने दीपों की उजास, सोने-चाँदी की झिलमिलाहट, बाजारों का रौनकभरा शोर और पूजा की तैयारियों में जुटे घर-घर…
View More धनतेरस : धन का उययोग विलासिता के लिए नहीं, स्वास्थ्य और जीवन-रक्षा के लिए होदीवाली ‘मनाते’ हुए उन लोगों की खुशियों का भी ध्यान रखें जो हमारी दीवाली ‘बनाते’ हैं!
‘दीवाली’ सुनने में कितना मिठास भरा शब्द है न? दीवाली एक ऐसा त्योहार है, जिसे मनाने के लिए किसी धर्म की जरूरत नहीं। इस देश…
View More दीवाली ‘मनाते’ हुए उन लोगों की खुशियों का भी ध्यान रखें जो हमारी दीवाली ‘बनाते’ हैं!चीन ने यूट्यूब, अमेजॉन, जैसे सॉफ्टवेयर बना लिए, भारत नही बना पाया, क्योंकि…!
चीन ने ‘बाइडू’ बना लिया क्योंकि वहाँ की सरकार ने गूगल को अनुमति नहीं दी। चीन ने ‘अलीबाबा’ बनाया, क्योंकि वहाँ की सरकार ने अमेजॉन…
View More चीन ने यूट्यूब, अमेजॉन, जैसे सॉफ्टवेयर बना लिए, भारत नही बना पाया, क्योंकि…!दूषित कफ सीरप से 22 मासूमों की मौत के बाद क्या अब बंद आँखें खुलेंगी?
मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई 22 मासूम बच्चों की मौतों ने एक बार फिर यह उजागर किया है कि भारत में गरीब परिवार कितने…
View More दूषित कफ सीरप से 22 मासूमों की मौत के बाद क्या अब बंद आँखें खुलेंगी?महिलाओं को मासिक धर्म के समय सवैतनिक छुट्टी अच्छी है, मगर माह में एक दिन क्यों?
कर्नाटक सरकार ने एक गौर करने लायक पहल की है। उसने राज्य में कार्यरत सभी महिला कर्मचारियों को उनके मासिक धर्म के दौरान सालभर में…
View More महिलाओं को मासिक धर्म के समय सवैतनिक छुट्टी अच्छी है, मगर माह में एक दिन क्यों?करवा चौथ को न तो केवल रूढ़िवादिता समझें और न इसे सिर्फ दिखावे का त्योहार बनाएँ!
भारतीय संस्कृति का एक लोकप्रिय पर्व है करवा चौथ। इसकी परम्परा प्रेम और समर्पण से जुड़ी है, लेकिन आधुनिक समाज में यह त्योहार समानता और…
View More करवा चौथ को न तो केवल रूढ़िवादिता समझें और न इसे सिर्फ दिखावे का त्योहार बनाएँ!करीब 2,500 साल पुरानी चाणक्य की सोच और सबक आज भी प्रासंगिक कैसे है?
क्या कभी किसी ने हमें-आपको बताया कि सिकन्दर को भारत की सीमा के भीतर अपने आधिपत्य का विस्तार करने से वास्तव में चाणक्य ने रोका…
View More करीब 2,500 साल पुरानी चाणक्य की सोच और सबक आज भी प्रासंगिक कैसे है?सांसद मेधाताई कुलकर्णी, जिनके पास सच कहने का साहस है और सलीका भी!
राजनेताओं को मैं आमतौर पर बहुत पसन्द नहीं करता, लेकिन आज मैं यहाँ एक ‘छोटी’ राजनेता की प्रशंसा में लिख रहा हूँ। पिछले 75 वर्षों…
View More सांसद मेधाताई कुलकर्णी, जिनके पास सच कहने का साहस है और सलीका भी!जहाँ के पत्थर भी ‘हीरा’, वह बुन्देलखण्ड अपनी अलग पहचान कब पाएगा और कैसे?
‘हीरे’ का आशय सिर्फ हीरे से मत निकालिए, बल्कि उन बहुमूल्य खनिजों से इसका अर्थ जोड़िए जो हर कहीं उपलब्ध नहीं होते। हालाँकि बुन्देलखण्ड के…
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