महात्मा गाँधी कहा करते थे, “पत्र लिखना भी एक कला है। मुझे पत्र लिखना है, और उसमें सत्य ही लिखना है तथा प्रेम उड़ेल देना…
View More चिट्ठी-पत्री आज भी पढ़ी जाती हैं, बशर्ते दिल से लिखी जाएँ…ये प्रतिक्रियाएँ पढ़िए!Tag: सरोकार
वास्तव में पहलगाम आतंकी हमले का असल जिम्मेदार है कौन?
पहलगाम की खूबसूरत वादियों के नजारे देखने आए यात्रियों पर नृशंसता से गोलीबारी कर कत्लेआम किया गया है। इसमें 26 लोगों को जानें गईं। लेकिन…
View More वास्तव में पहलगाम आतंकी हमले का असल जिम्मेदार है कौन?चिट्ठी, गुमशुदा भाई के नाम : यार, तुम आ क्यों नहीं जाते, कभी-किसी गली-कूचे से निकलकर?
प्रिय दादा मेरे भाई तुम्हें घर छोड़कर गए लगभग तीन दशक गुजर गए हैं, लेकिन तुम्हारी याद के छींटे कभी- कभी सुख-चैन में तेजाब की…
View More चिट्ठी, गुमशुदा भाई के नाम : यार, तुम आ क्यों नहीं जाते, कभी-किसी गली-कूचे से निकलकर?पहलगााम आतंकी हमला : इस आतंक के ख़ात्मे के लिए तुम हथियार कब उठाओगे?
उसने पूछा- क्या धर्म है तुम्हारा?मेरे मुँह से निकला- राम-राम और गोली चल गई।मैं मर चुका हूँ अब, मगर इसका मतलब ये नहीं कि तुम…
View More पहलगााम आतंकी हमला : इस आतंक के ख़ात्मे के लिए तुम हथियार कब उठाओगे?बच्चों को ‘नम्बर-दौड़’ में न धकेलें, क्योंकि सिर्फ़ अंकसूची से कोई ‘कलेक्टर’ नहीं बनता!
एक ज़माने में बोलचाल के दौरान कुछ जुमले चलते थे- ‘तुम कोई कलेक्टर हो क्या कहीं के’ या ‘ज़्यादा कलेक्टरी झाड़ने की कोशिश न करो’।…
View More बच्चों को ‘नम्बर-दौड़’ में न धकेलें, क्योंकि सिर्फ़ अंकसूची से कोई ‘कलेक्टर’ नहीं बनता!हँसिए…,क्योंकि पश्चिम के मीडिया को लगता है कि मुग़लों से पहले भारत में कुछ था ही नहीं!
लगता है, पश्चिम का मीडिया चुनिन्दा चीज़ों को भूल जाने की बीमारी की शिकार है। हिन्दी में यह बीमारी ‘स्मृति-लोप’ कहलाती है, जिसमें कोई याददाश्त…
View More हँसिए…,क्योंकि पश्चिम के मीडिया को लगता है कि मुग़लों से पहले भारत में कुछ था ही नहीं!बाबा साहेब से प्रेम और तिरंगे की मर्यादा…, सब दो दिन में ही भुला दिया!! क्यों भाई?
यह वीडियो मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का है। देखिए गौर से, और सोचिए। शहर के व्यस्ततम इलाक़े- बोर्ड ऑफिस चौराहे पर संविधान निर्माता बाबा…
View More बाबा साहेब से प्रेम और तिरंगे की मर्यादा…, सब दो दिन में ही भुला दिया!! क्यों भाई?‘चिन्ताएँ और जूते दरवाज़े पर छोड़ दीजिए’, ऐसा लिखने का क्या मतलब है?
रास्ता चलते हुए भी अक्सर बड़े काम की बातें सीखने को मिल जाया करती हैं। बशर्ते, कोई अपनी आँख, नाक, कान खुले रखे और दिमाग़…
View More ‘चिन्ताएँ और जूते दरवाज़े पर छोड़ दीजिए’, ऐसा लिखने का क्या मतलब है?राजनैतिक दबाव में हँसकर माँगी माफ़ी से क्या ‘देवास की मर्यादा’ भंग करने का पाप कटेगा?
मध्य प्रदेश में इन्दौर से यही कोई 35-40 किलोमीटर की दूरी पर एक शहर है ‘देवास’। इसे ‘देव-वास’ अर्थात् देवी-देवताओं का वास’ कहें, तो कोई…
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पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में भारी हिंसा हो गई।
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