माघ कृष्ण पक्ष नवमी। काली डरावनी आधी रात (दिनांक 4 फरवरी 1670)। आकाश में तारे टिमटिमा रहे थे। झुरमुटों में झींगुर बोल रहे थे। सिंहगढ़…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : राजगढ़ में बैठे महाराज उछल पड़े, “मेरे सिंहों ने कोंढाणा जीत लिया”Tag: सरोकार
शिवाजी ‘महाराज’ : तान्हाजीराव मालुसरे बोल उठे, “महाराज, कोंढाणा किले को में जीत लूँगा”
महाराज ने औरंगजेब के खिलाफ युद्ध छेड़ने का फैसला किया। राजधानी के सामने सिर्फ छह कोस की दूरी पर था कोंढाणा उर्फ सिंहगढ़। सबसे पहले…
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समूचे मुगल राजवंश में औरंगजेब-सा गुणी आदमी दूसरा कोई नहीं था। बाबर, अकबर, शाहजहान और दाराशिकोह वगैरा से उसका व्यक्तित्त्व कई मायनों में अधिक समृद्ध…
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महाराज आगरा से छूटकर आए और उन्होंने स्वराज्य की शासन-प्रणाली अधिक बलशाली, शास्त्रशुद्ध बनाई। जमीन के लगान की पद्धति, पैदल फौज तथा घुड़दल की संरचना…
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महाराज के साथ आगरा गए सब लोग स्वराज्य में लौट आए। कवीन्द्र परमानन्द भी दौसा तक आ गए लेकिन वहाँ पर वे पकड़े गए। उन्हें…
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महाराज औरंगजेब के जाल में फँस गए थे। महाराज के शिविर तथा उनके निजी खेमे में कड़ा पहरा था। खुद फौलाद खान ही दिन-रात वहाँ…
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अपमानों की परिसीमा हुई और महाराज ऐन दरबार में भड़क उठे। यही जसवन्त सिंह मराठा सैनिकों से मात खाकर, उन्हें पीठ दिखाकर भाग खड़ा हुआ…
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मुगल छावनी अब आराम फरमा सकती थी। खुद मिर्जा राजा भी रात को घड़ी दो घड़ी गंजिफा खेलने में मशगूल हो सकते थे। क्योंकि सन्धि…
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पुरन्दरगढ़ को जीतने की खातिर दिलेर खान ने लगातार दो महीने अथक मेहनत की। लेकिन बारूद के अजस्त्र भंडार, लक्षावधि रुपए और हजारों सैनिकों के…
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दिलेर खान ने वज्रगढ़ के मचान पर तोपें चढ़ा दीं। भयंकर बमबारी की। गढ़ की चारदीवारी में दरार पड़ गई। किले में मौजूद मराठों ने…
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