वक़्त मुश्किल है। एक अदृश्य दुश्मन (कोरोना) है, जिसने मानवता के ख़िलाफ़ जंग छेड़ रखी है। हमारे घरों में घुसकर हमारे अपनों को वह…
View More एक कहानी ; उम्मीद के दीए की…Tag: सरोकार
मेट्रोनामाः इस क्रूरतम समय में एक सुन्दरतम घटना
रोज़ाना की तुलना में आज मेट्रो सूनी है। इतना सूनापन डराता है। हालाँकि आज दिल्ली में कर्फ्यू है। लेकिन ज़िन्दगी तो चल ही रही है। कुछ…
View More मेट्रोनामाः इस क्रूरतम समय में एक सुन्दरतम घटनाभेदभावविनाशकं खलु दिव्यभाषा संस्कृतम्
धर्म, जाति, भाषा के नाम पर एक-दूसरे के ख़िलाफ़ खड़े होने की सूचना-सामग्री अथाह है। समाचार माध्यमों और कथित सामाजिक माध्यमों (Social Media) पर ऐसा…
View More भेदभावविनाशकं खलु दिव्यभाषा संस्कृतम्पंडित रविशंकर, एक प्रेरक शख़्सियत, जिसने ‘ज़िन्दगी’ को थामा तो उसके मायने बदल दिए
पंडित रविशंकर आज 101 साल के हो गए। ऐसा इसलिए कहना ठीक है, क्योंकि उनके जैसे लोगों की सिर्फ़ देह ही दुनिया छोड़ती है। शख़्सियत…
View More पंडित रविशंकर, एक प्रेरक शख़्सियत, जिसने ‘ज़िन्दगी’ को थामा तो उसके मायने बदल दिएजयन्ती विशेषः अपने प्रिय कवि माखनलाल चतुर्वेदी की याद और पुष्प की अभिलाषा
आज फेसबुक स्क्रॉल करते हुए ‘डायरी’ की एक पोस्ट सामने आ गई। पोस्ट में एक सुन्दर तस्वीर पर माखनलाल चतुर्वेदी जी की कविता लिखी थी।…
View More जयन्ती विशेषः अपने प्रिय कवि माखनलाल चतुर्वेदी की याद और पुष्प की अभिलाषानिर्मल वर्मा की जयन्ती और एक प्रश्न, किताबों से बड़ा ज्ञान या ज्ञान से बड़ी किताबें?
किताबें ज्ञान का स्रोत हैं या फिर ज्ञान किताबों के सृजन का माध्यम? इस प्रश्न पर विचार का भरा-पूरा कारण दिया है इस कविता ने। प्रश्न के…
View More निर्मल वर्मा की जयन्ती और एक प्रश्न, किताबों से बड़ा ज्ञान या ज्ञान से बड़ी किताबें?रंगपंचमी, सूखे रंग और कैनवास पर रंगोली!
मराठी संस्कृति वृहद और समृद्ध है। इसके कई अच्छे गुणों में संस्कार से लेकर खान-पान, पहनावा और घर परिवारों का रखरखाव भी महत्वपूर्ण है। इसके…
View More रंगपंचमी, सूखे रंग और कैनवास पर रंगोली!हिन्दी में लिखना ही तुम्हारी शरण अर्हता का प्रमाण है!
हिन्दी के लेखक लोग #NoToFree चला रहे हैं, माने मुफ़्त में कुछ नहीं। इसके विरोध में मेरा #YesToFree है। मैं सभी तरह के कार्यक्रमों, मंचों,…
View More हिन्दी में लिखना ही तुम्हारी शरण अर्हता का प्रमाण है!अहो! भारत के तेज से युक्त यह होली दिख रही है..
जिस उम्र में लोग आधुनिकता और दुनियावी चमक-दमक के पीछे भागते हैं, उस उम्र में कुछ युवा ऐसे भी हैं, जो संस्कृत और संस्कृति को…
View More अहो! भारत के तेज से युक्त यह होली दिख रही है..खोल दो बन्धन इनके, हर मंज़िल पा जाएँगी!
माँ अब बदल रही है। पर कितनी, कहाँ। और कहाँ नहीं। वक़्त के साथ उसका बदलना कितना ज़रूरी है। इस कविता में ऐसे कुछ पहलू…
View More खोल दो बन्धन इनके, हर मंज़िल पा जाएँगी!