टीम डायरी
संसद के दोनों सदनों में बीते चार दिन से जारी हंगामे के बीच आखिर एक बड़ा काम होने का रास्ता भी बना है। केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्य सभा में शुक्रवार, 24 जुलाई को एक विधेयक पेश किया। इसका नाम है, ‘राष्ट्रीय सम्मान की अवमानना निषेध अधिनियम-2026’। वैसे तो यह कानून पहले से है, 1971 में बनाया गया था। इसके तहत राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीकों की सुरक्षा सुनिश्नित होती है। इसमें प्रावधान हैं कि राष्ट्रीय प्रतीकों का कोई भी व्यक्ति शब्दों, क्रियाओं, आदि से अपमान न कर सके। केन्द्र सरकार इसमें संशोधन कर रही है।
इस कानून के दायरे में अब ‘राष्ट्र गीत- वन्देमातरम्’ को भी लाया गया है। संशोधित विधेयक में स्प्ष्ट प्रावधान है कि राष्ट्र गीत का दर्जा अब ‘राष्ट्र गान- जन गण मन’ के बराबर होगा। जिन कार्यक्रमों में इसे राष्ट्र गान के साथ गाया जाएगा, वहाँ पूरा का पूरा गाना होगा। दो अंतरा गाकर काम नहीं चलेगा। उस कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को राष्ट्र गीत गाए जाते समय सम्मानपूर्वक खड़े रहना होगा। कोई इससे इंकार नहीं कर सकता। राष्ट्र गीत गाए जाते समय नारेबाजी करना या ऐसी अन्य कोई बाधा पैदा करने की तो कोशिश भी नहीं की जा सकती। ऐसा किए जाने को अपराध माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर इस अपराध के एवज में तीन साल तक कैद की सजा भी हो सकती है।
याद दिला दें कि इसी साल केन्द्र सरकार ने छह फरवरी को आदेश जारी किया था। इसके अनुसार, बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा लिखित राष्ट्रगीत वन्देमातरम् को राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के सभी अवसरों पर निर्धारित अवधि में गाना- बजाना होगा। केन्द्र और राज्य सरकारों के सभी सम्मान समारोहों दौरान, राष्ट्रपति एवं राज्यपालों की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों और आकाशवाणी-दूरदर्शन आदि पर महामहिम के भाषणों से पहले तथा बाद में वन्देमातरम् को गाना-बजाना अनिवार्य होगा। तभी पता चला था कि इसके सभी छह अंतरे गाए जाने की कुल समयावधि 3.10 मिनट निर्धारित है।
यह भी याद रखने लायक है कि हिन्दुस्तान की आजादी के बाद जब वन्देमातरम् को राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया गया, तब मुस्लिम समुदाय के ऐतिराज को ध्यान में रखकर इसके शुरुआती दो छन्द ही गाए जाने का प्रावधान हुआ था। यद्यपि पिछले साल इस गीत के 150 साल पूरे होने पर संसद में जो चर्चा हुई, उससे स्पष्ट हो गया था कि मौजूदा सरकार देर-सबेर इसका पूरा गान अनिवार्य कर सकती है, जो अब कर दिया गया है। साथ ही, अब तो राष्ट्र गीत का सम्मान भी कानून के दायरे में सुरक्षित किया जा रहा है। निश्चित ही यह अच्छी पहल कही जानी चाहिए।
