मीडिया और मनोरंजन उद्योग में नामी व इज़्ज़तदार शख़्सियत हैं जनाब सैयद मोहम्मद इरफ़ान। रेडियो और टेलीविज़न से इनका पुराना नाता है। फिल्मी दुनिया पर…
View More शुरू में अपनी गाड़ी को धक्का ख़ुद ही लगाना होता है….. देखिए, जगजीत सिंह भी लगा रहे हैं!Category: चहेते पन्ने
सँभलो हुक़्मरान ; यमुना ने नहीं, दिल्ली दरबार की चौखट पर ‘यमराज’ ने आमद दी है!
इस बार दिल्ली में यमुना ने त्राहिमाम् मचा दिया। सुर्ख़ियों में बताया गया कि क़रीब 45 साल बाद दिल्ली ऐसी बाढ़ में डूबी है। यमुना…
View More सँभलो हुक़्मरान ; यमुना ने नहीं, दिल्ली दरबार की चौखट पर ‘यमराज’ ने आमद दी है!प्रकृति की विनाश-लीला अस्ल में हमारी विकास-लीला का ज़वाब है, चेत जाइए!
आज, 11 जुलाई को पूरी दुनिया में ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ मनाया गया। भारत में इस बार यह अवसर दो अर्थों में ख़ास रहा। पहला- इसलिए…
View More प्रकृति की विनाश-लीला अस्ल में हमारी विकास-लीला का ज़वाब है, चेत जाइए!‘दिल्ली रोबोटिक्स लीग’ : स्कूली बच्चों के लिए एक सरकारी आयोजन… कभी, कहीं सुना है?
शिक्षा या ज्ञान मानव जीवन में हासिल की जाने वाली सबसे उत्कृष्ट और सबसे अद्भुत चीज है। अगर मानव को शिक्षित होने का अवसर मिल…
View More ‘दिल्ली रोबोटिक्स लीग’ : स्कूली बच्चों के लिए एक सरकारी आयोजन… कभी, कहीं सुना है?‘मायावी अंबा और शैतान’ : “मर जाने दो इसे”, ये पहले शब्द थे, जो उसके लिए निकाले गए
# उसे # “मर जाने दो उसे”, ये पहले शब्द थे, जो जन्म के समय उसके लिए निकाले गए। हमें पता है क्योंकि हम वहीं…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : “मर जाने दो इसे”, ये पहले शब्द थे, जो उसके लिए निकाले गए‘लोकल’ बहुत सारी चीज़ें सिखाती है, ज़िन्दगी के फ़लसफ़े बताती है
छूटने से ऐन पहले लोकल को किसी तरह दौड़ते-भागते पकड़ लेना, टूटती साँस की डोर को थाम लेने जैसा आभास कराता है। ये लक्ष्य तय…
View More ‘लोकल’ बहुत सारी चीज़ें सिखाती है, ज़िन्दगी के फ़लसफ़े बताती हैगुरु की सीख : नीयत भले जल्द बदल जाए, पर वक़्त के साथ नियति भी बदल ही जाती है
उस रोज़ संगीत दिवस था। तारीख इसी 21 जून की। एक घटना ऐसी हुई कि मुझे महाभारत का एकलव्य-द्रोण-अर्जुन प्रसंग फिर याद आ गया। ऐसी…
View More गुरु की सीख : नीयत भले जल्द बदल जाए, पर वक़्त के साथ नियति भी बदल ही जाती है‘मायावी अंबा और शैतान’ : मौत को जिंदगी से कहीं ज्यादा जगह चाहिए होती है!
अब तक वहाँ का माहौल ऐसा हो चुका था जैसे कुछ बड़ा होने वाला हो। मगर वे लोग जिस प्राचीन ‘हबीशी’ जनजाति से ताल्लुक रखते…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : मौत को जिंदगी से कहीं ज्यादा जगह चाहिए होती है!महिलाओं को ‘भोग्य’, ‘उपभोग्य’ की तरह पेश कर के क्या हमारे परिवार नष्ट किए जा रहे हैं?
‘देह ही देश’! अभी तक मैंने यह पुस्तक पढ़ी नहीं है। लेकिन इसकी समीक्षाएँ पढ़कर इसे पढ़ने की उत्कंठा अवश्य है। इसीलिए पुस्तक को पढ़े…
View More महिलाओं को ‘भोग्य’, ‘उपभोग्य’ की तरह पेश कर के क्या हमारे परिवार नष्ट किए जा रहे हैं?कितना बेहतर हो, अगर हम लड़कियों को उनकी सुरक्षा करना भी सिखाएँ!
आज मैं यह लेख एक ऐसे विषय पर लिख रही हूँ, जिसके बारे में जानना, समझना और अन्य लोगों को उसके लिए प्रेरित करना हमारे…
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