पतित मानस द्वारा समानता की माँग अपनी अनार्यता छिपाने का स्वाँग ही होता है। एक समान अनुभूति होने पर भी इंसान उसका भोग अपने संस्कारों…
View More एक ने मयूरपंख को परमात्मा का स्मृति-चिह्न बना पूजा और दूजे ने…!Category: चहेते पन्ने
अगर पेड़ भी चलते होते…. तो क्या होता? सुनिएगा!
अगर पेड़ भी चलते होतेअगर पेड़ भी चलते होतेकितने मज़े हमारे होतेबांध तने में उसके रस्सीचाहे जहाँ कहीं ले जाते जहाँ कहीं भी धूप सतातीउसके…
View More अगर पेड़ भी चलते होते…. तो क्या होता? सुनिएगा!हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की
भारत भवन, भरत नाट्यम और श्रीराम की कथा। यह अद्भुत मेल बना 19 जून को। मौका था, ‘गोस्वामी तुलसीदास समारोह’ का। वैसे, भगवान श्रीराम के…
View More हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम कीसंगीत के विद्यार्थियों को मंज़िल की तलाश में नहीं रहना चाहिए, यात्रा का आनन्द लेना चाहिए!
संगीत सीखना प्रारम्भ करते हुए मन में स्वाभाविक ही प्रश्न उठता है कि यह यात्रा कब अपनी परिणति को पहुँचेगी। यह सहज मानव स्वभाव है…
View More संगीत के विद्यार्थियों को मंज़िल की तलाश में नहीं रहना चाहिए, यात्रा का आनन्द लेना चाहिए!चार लाइनों में सुनिएगा…. पुरुष और स्त्री मन के सोचने के भिन्न तरीकों के बीच बहता जीवन!
पुरुष और स्त्री के सोचने के तरीक़े में फ़र्क होता है। सभी जानते हैं। लेकिन इस अन्तर की गहराई की थाह कुछेक लोग ही ले…
View More चार लाइनों में सुनिएगा…. पुरुष और स्त्री मन के सोचने के भिन्न तरीकों के बीच बहता जीवन!ये हिमाचल का परवाणु है, यहाँ ‘पॉज़िटिविटी’ का परमाणु है!
वैसे तो पूरा हिमाचल प्रदेश ही ख़ूबसूरती की दुशाला (शॉल जैसा वस्त्र) ओढ़े हुए है। लेकिन यहाँ एक जगह है परवाणु। वह अपनी अलग पहचान…
View More ये हिमाचल का परवाणु है, यहाँ ‘पॉज़िटिविटी’ का परमाणु है!सफल नेतृत्त्व और परिपक्व व्यक्तित्त्व के गुण महेन्द्र सिंह धौनी से सीख सकते हैं
भारतीय क्रिकेट की इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल)-2023 ख़त्म हो चुकी। इसी 29 मई को चेन्नई और गुजरात के बीच हुए फाइनल मैच के साथ आईपीएल…
View More सफल नेतृत्त्व और परिपक्व व्यक्तित्त्व के गुण महेन्द्र सिंह धौनी से सीख सकते हैंशहरों में किरदार, किरदारों में शहर रहते हैं, हमने सुना है….
सोहबत अपना असर दिखाती ही है जनाब। माहौल भी पुरअसर हुआ करता है। अब देखिए न, अभी 20 मई को, शनीचर की रोज़ शहर भोपाल…
View More शहरों में किरदार, किरदारों में शहर रहते हैं, हमने सुना है….आख़िर क्यों बाज़ार में खड़ी कोई कम्पनी कभी भी, ‘परिवार’ नहीं हो सकती?
इस, 15 मई को ‘परिवारों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ (इंटरनेशनल डे ऑफ फैमिलीज़) मनाया गया। वैसे, इसके अलावा भी एक ‘परिवार दिवस’ यानि ‘फैमिली डे’ मनाया…
View More आख़िर क्यों बाज़ार में खड़ी कोई कम्पनी कभी भी, ‘परिवार’ नहीं हो सकती?जिसने अपने लक्ष्य समझ लिया, उसने जीवन को समझ लिया, पर उस लक्ष्य को समझें कैसे?
जब भी किसी दुविधा में हों या मन खराब हो, तो हमें ध्यान करने की सलाह दी जाती है। ये चलन नया नहीं है, बल्कि…
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