Zakir Hussain

सुर, लय, ताल नहीं बिगड़नी चाहिए… चाहे कुछ भी हो जाए!

हिन्दुस्तान के मशहूर तबला-वादक उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के किसी कार्यक्रम का यह छोटा-सा वीडियो ज़िन्दगी का बड़ा सबक है। ग़ौर कीजिए, एक मुश्किल, एक बाधा…

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मृच्छकटिकम्-12 : संसार में पुरुष को मित्र और स्त्री ये दो ही सबसे प्रिय होते हैं

वसंतसेना से मुक्त होने के बाद मदनिका अब शर्विलक से साथ गाड़ी में बैठकर चलने को तैयार है। तभी घोषणा सुनाई देती है कि किसी…

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Vaishnawi Dance

नृत्य की आधुनिकता में परम्परा का मेल!

आम तौर पर लोग परम्पराओं में आधुनिकता का घाल-मेल किया करते हैं। लेकिन भोपाल की भरतनाट्यम-प्रशिक्षु वैष्णवी द्विवेदी ने स्व-प्रेरणा से ही आधुनिक कंपोजीशन ‘स्वल्ला’ में…

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मृच्छकटिकम्-11 : गुणवान निर्धन गुणहीन अमीर से ज्यादा बेहतर होता है

ये आभूषण चारुदत्त के घर से चुराए गए हैं, ऐसा पता चलते ही वसंतसेना और मदनिका बेहोश हो जाती हैं। शर्विलक मदनिका को सचेत करने…

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मृच्छकटिकम्-9 : पति की धन से सहायता करने वाली स्त्री, पुरुष-तुल्य हो जाती है

सोए हुए ‘मैत्रेय’ द्वारा कसम देने से ‘शर्विलक’ आभूषणों की पेटी ले लेता है। तभी वहाँ ‘रदनिका’ के आने की आहट सुनाई देती है। इससे…

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मृच्छकटिकम्-8 : चोरी वीरता नहीं…

‘वसंतसेना’ से ‘कर्णपूरक’ फिर कहता है, “आप इस दुपट्टे को ओढ़कर बहुत अच्छी लग रही हैं।” लेकिन इस बात पर ध्यान दिए बगैर ‘वसंतसेना’ पूछती…

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मृच्छकटिकम्-7 : दूसरों का उपकार करना ही सज्जनों का धन है

“आर्य चारुदत्त का नाम लेने से मेरी इतनी सेवा हो रही है। धन्य हो आर्य चारुदत्त, धरती पर मात्र आप जीवित हैं। बाकी तो बस…

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परोपकार : फिर भी छपी नहीं किसी अख़बार में अब तक ये ख़बरें…!

एक ख़ूबसूरत कविता। एक उतनी ही सुकून भरी आवाज़। इन दो कलाकारों में लिखने वाले एक हैं, आशीष मोहन ठाकुर। ये मध्य प्रदेश पुलिस में…

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मृच्छकटिकम्-6 : जो मनुष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार बोझ उठाता है, वह कहीं नहीं गिरता

‘माथुर’ और ‘संवाहक’ के मध्य जुए में हारे सोने के सिक्कों के लिए लड़ाई होती है। ‘माथुर’ अपने सिक्के पाने के लिए बेचने के उद्देश्य…

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मृच्छकटिकम्-4 : धरोहर व्यक्ति के हाथों में रखी जाती है न कि घर में

‘चारुदत्त’ को ‘मैत्रेय’ बताता है, “शकार बलात् वसंतसेना का पीछा करते हुए यहाँ आया था। और वह न्यायालय में वाद दायर करने की बात कहते…

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