बहुत समय पहले की बात है। किसी गाँव में एक किसान रहता था। वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया…
View More नज़रिया, जो हमें सफल-असफल, उपयोगी-अनुपयोगी बनाता हैCategory: चहेते पन्ने
सियासत हमसे सीखिए, ज़िद नहीं समझौता कीजिए!
…संघर्ष के दिनों में तब कब क्या हुआ, उन्हें तारीखवार याद है। ग्वालियर की डीआरडीयू की प्रयोगशाला का वह वाकया भी, जब उन्हें पता चला…
View More सियासत हमसे सीखिए, ज़िद नहीं समझौता कीजिए!आषाढ़ी एकादशी : हमेशा बने रहने वाले भक्ति-भाव से भरा भजन, विट्ठल-हरि के लिए
महाराष्ट्र के पंढरपुर में भगवान विट्ठल के नाम से विष्णुजी का अवतार विराजित है। उनके दर्शनों के लिए पूरे महाराष्ट्र से पैदल यात्रा करते हुए…
View More आषाढ़ी एकादशी : हमेशा बने रहने वाले भक्ति-भाव से भरा भजन, विट्ठल-हरि के लिएधार्मिक शिक्षा सिर्फ़ 12वीं की पढ़ाई के बाद ही क्यों नहीं?
एक सवाल बड़ा प्रासंगिक है। ये कि किसी भी तरह की धार्मिक शिक्षा 12वीं की पढ़ाई के बाद क्यों नहीं दी जानी चाहिए? मतलब सरकार…
View More धार्मिक शिक्षा सिर्फ़ 12वीं की पढ़ाई के बाद ही क्यों नहीं?‘भीड़‘ के साथ हमेशा ‘भाड़’ क्याें रहता है?
यूँ ही बैठे-ठाले ज़ेहन में सवाल आया, ‘भीड़ के साथ हमेशा ‘भाड़’ क्यों रहता है?’ वैसे, तो इसका ज़वाब बहुत मुश्किल नहीं है। लेकिन अगर…
View More ‘भीड़‘ के साथ हमेशा ‘भाड़’ क्याें रहता है?लेकिन अर्जुनसिंह वादे पर कायम नहीं रहे और राव पर उंगली उठा दी
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह द्वारा राज्यसभा में गैस त्रासदी पर चर्चा के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव को दोषी ठहराए जाने पर…
View More लेकिन अर्जुनसिंह वादे पर कायम नहीं रहे और राव पर उंगली उठा दीअर्जुनसिंह ने राजीव गांधी को क्लीन चिट देकर राजनीतिक वफादारी का सबूत पेश कर दिया!
कानूनी विशेषज्ञ कहते हैं कि वर्तमान फैसले के खिलाफ सरकार की ओर से रिवीजन और अपील सत्र न्यायाधीश सुभाष काकड़े की अदालत में पेश हो…
View More अर्जुनसिंह ने राजीव गांधी को क्लीन चिट देकर राजनीतिक वफादारी का सबूत पेश कर दिया!नि:शब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ!
भूपेन हजारिका के एक गाने की पंक्तियाँ याद आ रही हैं… “निःशब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ ” . नारी और नदी,…
View More नि:शब्द सदा ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ!विलंब से हुआ न्याय अन्याय है तात्
…चलिए केंद्र सरकार ने सबक तो लिया। भले ही 25 साल लग गए। जल्दी भी क्या थी? कौन कहां भागा जा रहा था? हादसा हो…
View More विलंब से हुआ न्याय अन्याय है तात्जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी
वेदों में देवता से कई प्रकार के भाव लिए गए हैं। साधारणतः वेदमंत्रों के जितने विषय हैं, वे देवता कहलाते हैं। नैरुक्तकार यास्क ने देवता…
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