अंग्रेजों से भारत को सत्ताहस्तांतरण के प्रतीक के रूप में अगस्त 1947 में धर्मदंड ‘सेंगोल’ पंडित नेहरू को सौंपा गया था।
टीम डायरी
देश की नई संसद में रखे गए धर्मदंड ‘सेंगोल’ के बारे में रोचक और प्रामाणिक जानकारी सामने आई है। नीचे इससे सम्बन्धित एक वीडियो दिया गया है। यह 10 मिनट से भी कम का है। अमेरिका से संचालित यूट्यूब चैनल ‘पी गुरुस’ से यह वीडियो लिया गया है। अमेरिका में ही रहने वाले एक भारतवंशी इसमें ‘सेंगोल’ से जुड़ी अहम जानकारियाँ दे रहे हैं। वह भी पुख़्ता प्रमाण के साथ। देखिए और सुनिए…
याद दिला दें कि देश की नई संसद के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 मई 2023 को लोकसभा में अध्यक्ष की आसन्दी के दाहिनी ओर धर्मदंड ‘सेंगोल’ स्थापित किया था। इसकी कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने बहुत आलोचना की थी। जबकि उसी समय ‘सेंगोल’ से जुड़ी कई ख़बरें सामने आईं थीं। उनके अनुसार, अगस्त 1947 में अंग्रेजों से भारत को सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में दक्षिण भारत के मठों से आए सन्तों ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को ‘सेंगोल’ सौंपा था। हालाँकि कांग्रेस ने इन ख़बरों का भी खंडन किया था।
ऊपर दिए गए वीडियो में कांग्रेस के उसी ‘खंडन का खंडन’ किया गया है। वीडियो में बताया गया है कि सेंगोल सच में, पंडित नेहरू को सौंपा गया था। इस सम्बन्ध में विस्तार से एक लेख 25 अगस्त 1947 को अमेरिका की प्रतिष्ठित ‘टाइम’ पत्रिका में भी प्रकाशित हुआ था। वीडियो में पत्रिका के उस अंक की प्रति और लेख की सामग्री भी दिखाई गई है। इससे साबित होता है कि कांग्रेस ने ‘सेंगोल’ के बारे में जानकर झूठ बोला। हालाँकि अब सवाल ये उठते हैं कि आख़िर कांग्रेस ने ऐसा क्यों किया? ऐसी क्या मज़बूरी थी? देश के इतिहास से जुड़े एक अहम प्रतीक से परहेज़ क्यों?
कांग्रेस को इन सवालों के ज़वाब देने चाहिए।
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