सांकेतिक तस्वीर
टीम डायरी
सुर्खियाँ अलग-अलग जगह से बनी हैं। लेकिन भारत के भविष्य से जुड़ी हैं। सभी की पृष्ठभूमि में सवाल एक ही गूँज रहा है कि क्या भारत का भविष्य इनके लिए तैयार है?
पहली सुर्खी महाराष्ट्र से। वहाँ स्थानीय निकायों के चुनाव के लिए प्रचार चल रहा है। तेलंगाना के नेता असद-उद्दीन ओवैसी की पार्टी भी इस चुनाव में दमखम से उतरी है। अपने प्रत्याशियों के लिए प्रचार के क्रम में शुक्रवार को ओवैसी सोलापुर पहुँचे। वहाँ उन्होंने जनसभा में कहा…,
“पाकिस्तान के संविधान में लिखा हुआ है कि सिर्फ एक ही मजहब का आदमी वहाँ प्रधानमंत्री या सदर बन सकता है। मगर बाबा साहेब अम्बेडकर का संविधान है, वह ये कह सकता है कि कोई भी भारत का नागरिक वजीर-ए-आजम बन सकता है। सदर-ए-जम्हूरियत बन सकता है। मुख्यमंत्री बन सकता है। महापौर बन सकता है। असद-उद्दीन ओवैसी का ख्वाब ये है कि एक दिन आएगा इस देश में, इंशा अल्लाह हो ताला। शायद हम और आप नहीं रहेंगे मगर देखना कि हिजाब पहनने वाली बेटी इस देश की वजीर-ए-आजम बनेगी इंशा अल्लाह हो ताला। हम नहीं रहेंगे, शायद उस जमीन में जाकर हमारी हडि्डयाँ भी घुल जाएँगीं। मगर देखना एक दिन, वह दिन आएगा।”
अगली सुर्खी पाकिस्तान से। वहाँ आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के सरगना मसूद अजहर का एक ऑडियो इंटरनेट पर काफी साझा किया जा रहा है। उसमें मसूद अजहर को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उसने हजारों फिदायीन जिहादियों (आत्मघाती आतंकी) की फौज तैयार कर रखी है, जो भारत पर हमले को कसमसा रहे हैं। उसके मुताबिक, “ये (आत्मघाती आतंकी) एक नहीं, दो नहीं, सौ नहीं, हजार भी नहीं हैं। अगर पूरी तादात बता दूँ तो कल दुनिया की मीडिया पर हंगामा मच जाएगा। इनको कोई इनाम नहीं चाहिए। इनको कोई निजी फायदा नहीं चाहिए। ये सिर्फ जिहाद के लिए अपनी शहादत देने को छटपटा रहे हैं।”
इस तरह की कुछ सुर्खियाँ और भी हैं। मसलन- इस वक्त पाकिस्तानी फौज पेशावर में अमेरिकी सेना के साथ युद्ध अभ्यास कर रही है। आतंकवादरोधी अभियान के नाम पर यह अभ्यास हो रहा है। जबकि वहीं, आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सरगना सैफ-उल्लाह कसूरी एक रैली में दावा कर रहा है, “पाकिस्तान की फौज मुझे जनाजे की नमाज पढ़वाने के लिए बुलाती है।” उसका यह वीडियो इंटरनेट पर खूब लिया-दिया जा रहा है। इसमें वह भारत को भविष्य के आतंकी हमलों के लिए सीधी चुनौती दे रहा है। एक अन्य वीडियो में वह भारत के ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के दौरान मारे गए पाकिस्तानी फौजियों के जनाजे की नमाज पढ़ते हुए भी दिख रहा है।
अब बताइए, सबसे ऊपर जो सवाल पूछा गया, क्या वह गलत है? भारत के शासन तंत्र के साथ-साथ भारतीय नागरिक के रूप में हमें भी यह नहीं सोचना चाहिए कि हम इस सबके लिए तैयार हैं क्या?
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