“मैं दुनियाभर में शान्ति ला रहा हूँ, मुझे नोबेल शान्ति पुरस्कार दीजिए”

टीम डायरी

विश्व के सबसे शक्तिशाली कहलाने वाले देश अमेरिका के राष्ट्रपति, जिनके पास खुद अरबों का कारोबार है, दुनियाभर की सुविधाएँ हैं, वह भी बच्चों की तरह ‘एक खिलौना’ पाने के लिए छटपटा रहे हैं। छटपटाहट इतनी है कि कहीं तो झूठ-पर-झूठ बोले जा रहे हैं। इसलिए कि वह समझते हैं कि इस झूठ से उन्हें उनकी अपेक्षित वस्तु मिल सकती है। हालाँकि, इस तरह बार-बार झूठ बोलने से भी जब बात बनती नहीं दिखी तो उन्होंने उस देश के कर्ता-धर्ताओं को सीधे फोन कर दिया और उनसे कह दिया, “मैं दुनियाभर में शान्ति ला रहा हूँ। मुझे नोबेल शान्ति पुरस्कार दीजिए।”  समझने वाले समझ गए होंगे कि बात अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हो रही है। 

विभिन्न क्षेत्रों में बड़े वैश्विक बदलाव लाने लायक प्रयास करने, पहल करने के लिए मिलने वाले नोबेल पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान माने जाते हैं। इनमें नोबेल शान्ति पुरस्कार को अव्वल माना जाता है। ईसा की 19वीं सदी में रहे स्वीडिश मूल के उद्योगपति एल्फ्रेड नोबेल की याद में ये पुरस्कार मिलते हैं। इसके लिए नॉर्वे की संसद पाँच सदस्यों की समिति बनाती है,जो अनुशंसाओं, नामांकनों, आदि के आधार पर विजेताओं का चयन करती है। अमूमन अक्टूबर महीने में इन पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा की जाती है। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में 10 दिसम्बर को एल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर होने वाले समारोह में विजेताओं को सम्मानित किया जाता है। 

मतलब यही समय है लगभग, जब इस बार के नोबेल पुरस्कारों के विजेताओं का चयन करने की प्रक्रिया अन्तिम चरण में नॉर्वे में चल रही होगी या शुरू होने वाली होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए डोनाल्ड ट्रम्प ने सीधे नॉर्वे के वित्त मंत्री जेन्स स्टॉल्टेनबर्ग को फोन लगा दिया। इस दौरान उन्होंने उनसे खुद के लिए नोबेल शान्ति पुरस्कार की माँग भी कर डाली। एक नॉर्वेजियन अखबार ने यह समाचार प्रकाशित किया है। उसके मुताबिक, बातचीत पिछले महीने हुई है। दिलचस्प बात यह रही कि स्टॉल्टेनबर्ग ने ट्रम्प के साथ बातचीत की पुष्टि की और इस सूचना को सिरे से खारिज भी नहीं किया। उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा, “हाँ, हमारी बात हुई है। उन्होंने अमेरिका और नॉर्वे के बीच आायात-निर्यात व सीमा शुल्क जैसे मसलों पर बात की। इससे आगे मैं कुछ नहीं बता सकता।” 

अलबत्ता, इतने से भी नोबेल शान्ति पुरस्कार के लिए ट्रम्प की छटपटाहट का अन्दाजा लगाने में दुविधा हो तो एक बात और ध्यान दिला देते हैं। यह कि भारत-पाकिस्तान के बीच हाल ही में छिड़े सैन्य संघर्ष को रुकवाने का झूठा दावा ट्रम्प 30 से अधिक बार कर चुके हैं। उन्होंने इसी तरह इजराइल और ईरान के बीच हुई जंग रुकवाने का भी श्रेय लिया है। यद्यपि इसके बावजूद उन्हें अब तक इजराइल, पाकिस्तान और कम्बोडिया के अलावा किसी अन्य देश ने नोबेल शान्ति पुरस्कार के लिए नामित नहीं किया है। इसीलिए ट्रम्प छटपटा रहे है क्योंकि वह उन चार पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों की सूची में शामिल होना चाहते हैं, जिन्हें यह पुरस्कार मिल चुका है। उनमें थियोडोर रूजवेल्ट (1906), वुडरो विल्सन (1919), जिमी कार्टर (2002) और बराक ओबामा (2009) शामिल हैं। 

सोशल मीडिया पर शेयर करें
Neelesh Dwivedi

Share
Published by
Neelesh Dwivedi

Recent Posts

जनगणना हो रही है, जनसंख्या बढ़ रही है और आंध्र में आबादी बढ़ाने वालों को ‘इनाम’!

देश में जनगणना होने वाली है। मतलब जनसंख्या कितनी है और उसका स्वरूप कैसा है,… Read More

17 hours ago

एक यात्रा, दो मुस्लिम ड्राइवर और दोनों की सोच….सूरत-ए-हाल गौरतलब!

अभी एक तारीख को किसी जरूरी काम से भोपाल से पन्ना जाना हुआ। वहाँ ट्रेन… Read More

3 days ago

सेवा-तीर्थ में ‘भारतीय भाषाओं’ की सेवा नहीं हुई, आगे शायद ही हो!! वीडियो से समझिए!

भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर का उद्घाटन 13 फरवरी 2026 को हुआ। इसे… Read More

6 days ago

भ्रष्ट-आचार अब एक शिष्ट-विचार, इसे खत्म करना मुश्किल, दो उदाहरणों से समझिए कैसे?

‘भ्रष्ट’ का अर्थ है- जब कोई अपने धर्म (कर्तव्य-पथ) से दूर हट जाए और ‘आचार’… Read More

7 days ago

ईस्ट इण्डिया कम्पनी फिर ‘दफन’, और ‘गुलाम-सोच’ लिखती है- “सूरज डूब गया”!

ऐसी सूचना है कि अंग्रेजों की ईस्ट इण्डिया कम्पनी फिर दिवालिया हो गई और उसका… Read More

1 week ago