बिना इंजन वाला भारतीय जहाज ‘कौण्डिन्य’ मस्कट पहुँच गया, तो इससे क्या हासिल हुआ?

निकेश जैन, इन्दौर मध्य प्रदेश

इतिहास दोबारा लिख दिया गया। आइएनएसवी कौण्डिन्य मस्कट पहुँच गया! सवाल हो सकता है कि आखिर इसमें ऐसी क्या खास बात है? तो जवाब है कि यह भारतीय जहाज बिना इंजन के सिर्फ हवाओं के सहारे और नाविकों के दिशा ज्ञान की मदद से वहाँ तक पहुँचा है। इसे भारतीय शास्त्रों में वर्णित 1,500 साल पुरानी तकनीक से बनाया गया है। करीब दो सप्ताह पहले इस जहाज को परीक्षण के तौर पर गुजरात के पोरबंदर से रवाना किया गया था। 

इस जहाज की सफल यात्रा से यह बात साबित हो गई कि प्राचीन काल में भारत के लोग इसी तरह समुद्री यात्राएँ करते थे। वे सिर्फ उच्च तकनीक वाले जहाज बनाना तो जानते ही थे, बल्कि आला दर्जे का दिशा ज्ञान भी रखते थे। इसी ज्ञान की मदद से वह दूसरे देशों के साथ व्यापार-व्यवसाय करते थे। दुनिया की जानकारियाँ जुटाते थे। यद्यपि यहाँ फिर कोई सवाल पूछ सकता है कि इतनी सी बात साबित करने के लिए इतने पैसे खर्च करने क्यों जरूरी थे? किसी किताब में भी यह सब लिखा जा सकता था? तो जवाब है कि ऐसा करना आज की तारीख में बेहद जरूरी था। 

दरअसल, कभी-कभी हमें बताई गई, गढ़ी गई धारणाओं को तोड़ने के लिए यह सब करना जरूरी होता है। जिससे कि फिर कभी कोई हमसे सवाल करने की हिम्मत न कर सके। आइएनएसवी कौण्डिन्य की इस समुद्री यात्रा ने यही किया है। यहाँ यह भी बता देना जरूरी है कि पश्चिमी जगत की कई किताबों में लिखा है कि प्राचीन भारत के लोग समुद्री यात्राएँ नहीं किया करते थे। जबकि यह पूरी तरह गलत धारणा है, जो जानबूझकर बनाई गई है। 

जबकि अगर हम अपने प्राचीन साहित्य पर भरोसा करें, तो हमारे ऋग्वेद में सैकड़ों बार समुद्री यात्राओं का उल्लेख है। सिर्फ यही नहीं, ऋग्वेद में स्पष्ट रूप से यह भी उल्लेख है कि समुद्री जहाज से पूरी पृथ्वी की परिक्रमा कितने दिनों में पूरी की जा सकती है!! सोचिए, आज से 10,000 साल पहले हमारे मनीषियों को यह कैसे पता था?

स्पष्ट है कि प्राचीन भारत के बारे में हमारी जानकारी सच में, बहुत सीमित है। आज हम अपने अतीत के बारे में जितना जानते हैं, वह नाममात्र से भी कम कहा जा सकता है। क्यों? क्योंकि हमारे इतिहास को कहीं भूल-भुलैया में गुमा दिया गया। यह सब इरादतन किया गया। और इसीलिए आइएनएसवी कौण्डिन्य जैसे प्रयोग जरूरी हैं। 

क्या ख्याल है?

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निकेश का मूल लेख

History is re-traced ….. INSV Kaundinya, a ship made using 1500 years old technology sailed from Porbandar in Gujrat and reached Muscat, Oman after a journey of roughly 2 weeks!!

Ship with no engine just the power of the wind and knowledge of directions!

This is how ancient Indian sailors used to travel in ocean. This is how they used to do business. This is how they used to explore the other parts of the world. Hence proved!

But just to prove this simple point why do you have to spend so much money and energy? This could have been written in a book also?

No. Sometimes you need to break the narrative and break in a way that no one ever dares to question that again. That’s what this voyage has achieved for India.

In some of the renowned western books it was mentioned that Indians never explored the sea. This was simply part of the false narrative which needed to be broken.

If we believed the books then Rigved has mentions about sea voyages hundreds of times. Not only that Rigved clearly mentions in how many days a ship can circle the entire earth and return to the same point!! How did they know that some 10,000 years ago?

Clearly ancient India knew much more than what we know today but that history is lost and a recreation will only help remember it better!

Thoughts? 

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(निकेश जैन, कॉरपोरेट प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी- एड्यूरिगो टेक्नोलॉजी के सह-संस्थापक हैं। उनकी अनुमति से उनका यह लेख अपेक्षित संशोधनों और भाषायी बदलावों के साथ #अपनीडिजिटलडायरी पर लिया गया है। मूल रूप से अंग्रेजी में उन्होंने इसे लिंक्डइन पर लिखा है।)

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