इन्दौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब जानलेवा बीमारी भी फैलने की खबर है।
निकेश जैन, इन्दौर मध्य प्रदेश
इन्दौर, आपने हमें विफल कर दिया! शर्म की बात है कि देश का सबसे साफ शहर अपने लोगों को पीने के लिए साफ पानी तक मुहैया नहीं करा पाया!
अब तक 10-15 लोग मारे जा चुके हैं। लगभग 1,400 लोग पीड़ित हैं, प्रभावित हैं, क्योंकि पीने के पानी की पाइप लाइन में मल-जल (सीवेज) जा मिला। इस कारण दूषित पानी पीने से लोग बीमार पड़ गए, उनकी जान चली गई। यह स्थिति उस शहर में बनी, जो दुनियाभर में इसलिए सुर्खियों में रहा कि वह भारत का सबसे साफ शहर है। सोच से भी परे है यह विपरीत हालत। हालत क्या कहें, दुर्दशा कहना चाहिए।
इस शहर का निवासी होने के नाते मैं बता सकता हूँ कि यह दुर्दशा क्यों हुई? पूरे शहर को स्मार्ट सिटी परियोजना के नाम पर जहाँ-तहाँ खोद डाला गया है। हर जगह पाइप लाइन बिछाई जा रही हैं। कहीं पीने के पानी की, तो कहीं मल-जल की निकासी के लिए। एक विभाग के कर्मचारी आकर खुदाई करते हैं। दूसरे विभाग के लोग पाइप लाइन डालते हैं। इसके बाद तीसरे विभाग के लोग गड्ढे भरने आते हैं।
फिर महीने-सवा महीने बाद चौथे विभाग के कर्मचारी खुदाई वाली जगह की सफाई करते हैं। न जाने कितने दिनों से यही चल रहा है। इन विभागों में आपस में कोई समन्वय नहीं, कोई बातचीत नहीं। सब अपनी सुविधा से काम कर रहे हैं। और परेशानी उठा रही है आम जनता। कहीं कोई सवाल करने वाला तक नहीं…।
ये वह शहर है जहाँ लोगों के पास पैसों की कमी नहीं। मैं खुद जिस रिहाइश में रहता हूँ, वहाँ घरों से ज्यादा कारें नजर आती हैं। कारें भी सामान्य नहीं, करोड़ों की महँगी वाली। फिर भी इसी शहर में पीने के पानी में मल-जल की मिलावट हो जाती है, निर्दोष लोग मारे जाते हैं और किसी के माथे पर शिकन भी नहीं आती!!
राजनेता कोरी बयानबाजी में लगे हैं, हमेशा की तरह। अफसर लोग जिम्मेदारी एक से दूसरे पर ठेलने में लगे हैं, हमेशा की तरह। और आम लोग ‘चलता है’ नजरिए से अपनी जिन्दगी जीने में लगे हैं, हमेशा की तरह। दरअसल, यही गम्भीर समस्या की जड़ है, जिसे जनसामान्य ही जड़-मूल से उखाड़ कर फेंक सकता है।
कैसे? जो असरदार लोग हैं, धनी-मानी हैं, व्यापारियों के संगठन हैं, जैसे- सीआईआई मालवा, आईएमए, आदि, वे सब मिलकर पहल कर सकते हैं। उन्हें यह बात समझनी होगी कि शहर के माथे पर लगा यह कलंक आने वाले समय में उन्हें भी चपेट में ले सकता है। शहर में निवेश की सम्भावनाओं पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। उनके व्यापार की, उनके भविष्य की सम्भावनाओं को धूमिल कर सकता है।
मैं हमेशा कहता हूँ, “चलताऊ सोच और उत्कृष्टता के बीच एक बहुत महीन रेखा होती है। लेकिन उस महीन रेखा को भी पार करना आसान नहीं होता। उसके लिए एक दृढ़ मानसिकता की, सोच की जरूरत होती है।” इन्दौर को आज इसी की सबसे अधिक आवश्यकता है।
हर व्यक्ति सक्षम है, उत्कृष्टता हासिल कर सकता है, बस, सोच बदलने की जरूरत है। है कि नहीं?
—————
निकेश का मूल लेख
𝗜𝗻𝗱𝗼𝗿𝗲 𝘆𝗼𝘂 𝗳𝗮𝗶𝗹𝗲𝗱 𝘂𝘀! 𝗧𝗵𝗲 𝗰𝗹𝗲𝗮𝗻𝗲𝘀𝘁 𝗰𝗶𝘁𝘆 𝗶𝗻 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮 𝗰𝗼𝘂𝗹𝗱𝗻’𝘁 𝗽𝗿𝗼𝘃𝗶𝗱𝗲 “𝗰𝗹𝗲𝗮𝗻” 𝘄𝗮𝘁𝗲𝗿 𝘁𝗼 𝗶𝘁𝘀 𝗰𝗶𝘁𝗶𝘇𝗲𝗻𝘀 – 𝘀𝗵𝗮𝗺𝗲𝗳𝘂𝗹!
10 people have died and 32 are still in ICU because their drinking water pipeline was contaminated with sewage water 🤔!
Just unthinkable in a city which boasts to the world of its cleanliness!
And as a citizen of this city I can tell you why it happened – the entire city is dug up in the name of smart city projects! There are pipeline laid down everywhere – some for water and some for sewage. Projects are running for infinite time. One department comes to dig up; other comes to lay the pipeline and then another comes to cover it up!
The best part – the 4th department will come after 40 days to clean up the debris of that project. Everyone works in their own silos.
Citizen suffer and no one questions that……
This is the city where money is in abundance. In the locality where I live there are more cars than houses! And branded cars worth crores parked in the garage but we can still mix sewage water with our drinking water.
The politicians will pass the buck to bureaucrats and bureaucrats will pass it on to the workers but this problem is much deeper rooted – it’s that “chalta hai” attitude which must be replaced with culture of excellence.
The local businesses; the local business associations like CII Malwa, IMA etc. should create noise because dent on the city is a dent on investments and future opportunities.
I always say “mediocracy and excellence have a fine line between them but crossing that line requires a mindset”.
Everyone is capable of doing excellent work – just change the mindset.
Agree?
——
(निकेश जैन, कॉरपोरेट प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी- एड्यूरिगो टेक्नोलॉजी के सह-संस्थापक हैं। उनकी अनुमति से उनका यह लेख अपेक्षित संशोधनों और भाषायी बदलावों के साथ #अपनीडिजिटलडायरी पर लिया गया है। मूल रूप से अंग्रेजी में उन्होंने इसे लिंक्डइन पर लिखा है।)
——
निकेश के पिछले 10 लेख
76 – इण्डिगो संकट : क्या भारत सरकार अब वन्दे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के बारे में सोचेगी?
75 – कुछ बड़ा करने के लिए सबसे जरूरी है खुद पर भरोसा, ऋग्वेद के उदाहरण से समझें
74 – अगर हम अभी नहीं जागे, तो हर जगह सिर्फ ‘फर्जी कन्टेन्ट’ ही देखते रह जाएँगे!
73 – चीन ने यूट्यूब, अमेजॉन, जैसे सॉफ्टवेयर बना लिए, भारत नही बना पाया, क्योंकि…!
72 – करीब 2,500 साल पुरानी चाणक्य की सोच और सबक आज भी प्रासंगिक कैसे है?
71 – अमेरिकी एच1बी वीजा महँगा हुआ, ये भारतीयों के लिए फायदेमन्द या नुकसानदेह?
70 – एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब भारत मोदी जी के नेतृत्त्व का शुक्रिया अदा करेगा
69 – बंगाल फाइल्स : मेरे लिए भारतीय इतिहास की किताब का एक और अनछुआ पन्ना!
68- दो लाख डेवलपर्स, 47 करोड़ लती…‘खेल दिवस’ पर जरा पैसों के इस खेल के पहलू भी समझें!
67- क्या भारत-अमेरिका की कारोबारी लड़ाई का असर भारतीयों की नौकरियों पर पड़ने लगा है?
देश में जनगणना होने वाली है। मतलब जनसंख्या कितनी है और उसका स्वरूप कैसा है,… Read More
जय जय श्री राधे Read More
अभी एक तारीख को किसी जरूरी काम से भोपाल से पन्ना जाना हुआ। वहाँ ट्रेन… Read More
भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर का उद्घाटन 13 फरवरी 2026 को हुआ। इसे… Read More
‘भ्रष्ट’ का अर्थ है- जब कोई अपने धर्म (कर्तव्य-पथ) से दूर हट जाए और ‘आचार’… Read More
ऐसी सूचना है कि अंग्रेजों की ईस्ट इण्डिया कम्पनी फिर दिवालिया हो गई और उसका… Read More