आर श्रीलेखा केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी भी रही हैं।
टीम डायरी
केरल से शनिवार, 13 दिसम्बर को एक महिला राजनेता का नाम देशभर की सुर्खियों में आया। इनका नाम है आर. श्रीलेखा। इनके बारे में कहा जा रहा है कि ये राज्य में नया राजनैतिक इतिहास लिख सकती हैं। ऐसे में इनके बारे में जानना ‘रोचक-सोचक’, ‘प्रेरक’ और ‘सरोकार’ से जुड़ा हो सकता है। ‘रोचक-सोचक’ इसलिए कि इनके अतीत में कुछ दिलचस्प घटनाएँ जुड़ी हैं। ‘प्रेरक’ इस वजह से कि उनकी अब तक की यात्रा, उपलब्धियाँ, आदि कई लोगों को प्रेरणा दे सकती हैं। इसके साथ ही ‘सरोकार’ से जुड़ा मामला इसलिए है कि ज्यादा कुछ नहीं तो कम से सामान्य ज्ञान के लिहाज से तो उनसे जुड़ी जानकारियाँ काम आ ही सकती हैं।
तो मामला यूँ है कि केरल की राजधानी तिरुअनंतपुरम में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार नगर निगम के चुनाव में बहुमत हासिल किया है। वहाँ 101 सीटें हैं। इनमें से भाजपा ने 50 सीटें जीतकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की अगुवाई वाले वाम गठबंधन के 45 साल से चली आ रही सत्ता का अंत किया है। भाजपा की इस जीत में सबसे चर्चित नाम आर श्रीलेखा का रहा, जिन्होंने षष्ठमंगलम इलाके से निकाय चुनाव में जीत हासिल की है। कहा जा रहा है कि वह जितने बड़े अंतर से जीती हैं, उतने से इससे पहले कोई उम्मीदवार यहाँ से जीता नहीं है।
मतलब अगर यह बात अंतिम आँकड़ों में भी सही साबित हुई, तो पहला इतिहास तो यही बना मान सकते हैं। दूसरी बात- आर श्री लेखा के बारे में कहा जा रहा है कि भाजपा उन्हें तिरुअनंतपुरम का महापौर बना सकती है। चुनाव के वक्त पार्टी के प्रचारकों ने ऐसे संकेत भी दिए थे कि आर श्रीलेखा शहर की महापौर बनाई जा सकती हैं। सम्भवत: इसीलिए उन्हें आम मतदाताओं ने जबर्दस्त समर्थन भी दिया। अब अगर वह सच में महापौर बनीं, तो उनके खाते में अगली ऐतिहासिक उपलब्धि इस रूप में भी दर्ज हो जाएगी। बात इतनी ही नहीं है।
केरल में आर श्रीलेखा की पहचान पहली महिला आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अफसर के रूप में है। जनवरी 1987 में उन्हें यह उपलब्धि मिली थी। सरकारी नौकरी के आखिरी पड़ाव में साल 2017 में उन्हें केरल का पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बनाया गया। यह भी उनके लिए उपलब्धि रही, क्योंकि वह केरल की पहली महिला डीजीपी बनी थीं। इससे पूर्व वह कुछ वर्षों के लिए प्रतिनियुक्ति पर केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) में रहीं। इस दौरान उन्होंने इतनी चर्चित छापामार कार्रवाइयाँ कीं कि उन्हें ‘रेड श्रीलेखा’ कहा जाने लगा था।
सरकारी सेवा से वह 2020 में सेवानिवृत्त हुईं और अक्टूबर 2024 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गईं। हालाँकि, उनका दावा है कि सरकारी सेवा के दौरान उनका किसी राजनैतिक दल या विचार की तरफ कोई झुकाव नहीं रहा, फिर भी ऐसा कहते हैं कि जब वह पुलिस महानिदेशक थीं, तो प्रदेश की वाम-गठबंधन सरकार के साथ उनकी पटरी बैठती नहीं थी। इस बात की पुष्टि-सी करता हुआ संकेत तब मिला, जब उन्होंने कुछ दिनों पहले एक बयान दिया। सेवानिवृत्ति के बाद दिए इस बयान में उन्होंने दावा किया था कि साल 2017 में केरल के फिल्म अभिनेता दिलीप को दुष्कर्म के एक झूठे मामले में जानबूझकर फँसाया गया था। और दिलचस्प यह कि केरल के एर्नाकुलम की जिला एवं सत्र अदालत ने हाल ही में दिलीप को उस मामले में स्भी आरोपों से बरी भी किया है।
तो इस तरह, अभी के लिए आर श्रीलेखा की कहानी इतनी ही है। हालाँकि, अगर वह तिरुअनंतपुरम की महापौर बनाई जाती हैं, तो तय मानिए इस कहानी में अगले अध्याय भी जुड़ने वाले हैं।
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