इसी गैरजिम्मेदार रवैये के कारण मैंने बोइंग के विमानों से यात्रा पूरी तरह ही बन्द कर दी है!

निकेश जैन, इन्दौर मध्य प्रदेश

मैं अपनी मूल योजना पर कायम हूँ कि जहाँ तक हो सके, बोइंग के विमानों से यात्रा नहीं करनी है। खुशकिस्मती से भारत में संचालित एयरलाइन्स के पास एयरबस के विमानों के पर्याप्त विकल्प भी हैं। खास तौर पर घरेलू हवाई यात्राओं के लिए। मैं अपनी यात्राओं के लिए आगे भी इन्हीं विमानों की तलाश में रहने वाला हूँ। 

मैं बोइंग से इतना निराश क्यों हूँ? कारण कि इस कम्पनी के कर्ता-धर्ताओं को गुणवत्ता और सुरक्षा जैसी मूलभूत चीजों की कोई फिक्र नहीं है। उन्हें इन चीजों की तमीज भी नहीं है। इसका ताजा प्रमाण अभी हालिया रिपोर्ट (अहमदाबाद विमान हादसे की) के सम्बन्ध में मिलता है। इस रिपोर्ट के आधार पर बोइंग के कर्ता-धर्ता पायलटों की तरफ अँगुली उठा रहे हैं। उनका पीआर (जनसम्पर्क) दल कम्पनी की ओर से फैलाई जा रही बातों को जमकर तूल भी दे रहा है। वे पहले भी ऐसा ही कर चुके हैं कि हवाई दुर्घटनाओं की पूरा दोष पायलटों पर मढ़ दिया जाए। 

(भारत के हवाई दुर्घटना जाँच ब्यूरो (एएआईबी) की प्राथमिक रिपोर्ट में कहा गया है कि अहमदाबाद से लंदन के लिए विमान ने जैसे ही उड़ान भरी, फ्यूल कन्ट्रोल स्विच ‘रन’ से ‘कटऑफ’ स्थिति में चले गए। यानि बन्द हो गए। इससे दोनों इंजनों में ईंधन की आपूर्ति बन्द हो गई। और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसी रिपोर्ट के आधार पर कहा जा रहा है कि सम्भवत: सह-पायलट ने गलती से ये स्विच बन्द किए होंगे। हालाँकि पायलटों के बीच हुई बातचीत के दौरान मुख्य पायलट के पूछे जाने पर सह-पायलट ने ऐसी किसी गलती से साफ इंकार किया है। विशेषज्ञाें का भी कहना है कि कोई अनुभवी पायलट ऐसी गलती नहीं कर सकता। वहीं, बोइंग का भी कहना है कि उसके स्विच पूरी तरह सही और सुरक्षित थे।)

इसी कारण हवाई यात्री के तौर पर बोइंग के विमानों पर मेरा भरोसा और डगमगा जाता है। और यही वजह है कि मैं हर महीने इन्दौर से बेंगलुरू के बीच चार बार उड़ान भरते समय कोशिश करता हूँ कि एयरबस के विमानों से यात्रा करूँ। उसके लिए भले मुझे कुछ अधिक पैसे खर्च करने पड़ें, तो भी चलेगा। 

किसी भी कम्पनी के लिए यात्रियों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। लेकिन बोइंग का पूरा ध्यान इसके बजाय अपना दामन बचाने के लिए झूठी बातों के प्रसार में रहता है। वह उनके लिए ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। 

क्या कहते हैं?

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निकेश का मूल लेख

I am sticking to my original plan – avoid flying Boeing planes as much as possible!

Fortunately, airlines in India have many options with Airbus planes at least for domestic travel. I will keep looking for such flights.

Why am I so upset with Boeing?

Because these guys have absolutely no sense of quality and safety. Look at the recent report – they are finger pointing at Pilots!

And their PR work is going in full to spread this narrative!

In previous two crashes (Boeing Max) they did exactly same thing – put it on the pilots.

As a flyer this doesn’t give me any confidence in their machines.

The 4 flights that I take every month between Indore – Bangalore will be Airbus even if I have to pay more for it.

The safety of passengers must be the top priority for any company but for Boeing spreading a false narrative is more important.

Thoughts? 

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(निकेश जैन, कॉरपोरेट प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी- एड्यूरिगो टेक्नोलॉजी के सह-संस्थापक हैं। उनकी अनुमति से उनका यह लेख अपेक्षित संशोधनों और भाषायी बदलावों के साथ #अपनीडिजिटलडायरी पर लिया गया है। मूल रूप से अंग्रेजी में उन्होंने इसे लिंक्डइन पर लिखा है।)

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61- आपकी सेहत आपकी नौकरी से ज्यादा जरूरी है, ध्यान रखिए!
60- आरसीबी हादसा : उनकी नज़र में हम सिर्फ़ ‘कीड़े-मकोड़े’, तो हमारे लिए वे ‘भगवान’ क्यों?
59 – कभी-कभी व्यक्ति का सिर्फ़ नज़रिया देखकर भी उससे काम ले लेना चाहिए!
58- क्यों भारत को अब अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लाना ही होगा?
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55 – पहलगाम आतंकी हमला : मेरी माँ-बहन बच गईं, लेकिन मैं शायद आतंकियों के सामने होता!
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53 – भगवान महावीर के ‘अपरिग्रह’ सिद्धान्त ने मुझे हमेशा राह दिखाई, सबको दिखा सकता है
52 – “अपने बच्चों को इतना मत पढ़ाओ कि वे आपको अकेला छोड़ दें!”

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