दो किनारों के बीच नदी
टीम डायरी
पुरुष और स्त्री के सोचने के तरीक़े में फ़र्क होता है। सभी जानते हैं। लेकिन इस अन्तर की गहराई की थाह कुछेक लोग ही ले पाते हैं। और इनमें भी चन्द ही होते हैं, जो इस अन्तर की थाह लेने के बाद उसे शब्दों में व्यक्त कर सकें। वह भी बेहद चुनिन्दा शब्दों में।
#अपनीडिजिटलडायरी के सुधी-सदस्यों में से एक हैं समीर पाटिल। भोपाल, मध्य प्रदेश में नौकरी करते हैं। मध्य प्रदेश के ही रहने वाले हैं। पढ़ने, लिखने में स्वाभाविक रुचि रखते हैं। उन्होंने अपने चन्द शब्दों में स्त्री और पुरष के सोचने के तरीक़े में अन्तर को अभिव्यक्त करने की क़ोशिश की है।
समीर लिखते हैं...
जब उससे एक छोटी से बात कही, तो उसने एकदम इंकार कर दिया था। जबकि उसमें ऐसी कोई बात नही थी कि इंकार किया जाए। सहसा मानव मन की कुंडलीनुमा चालों पर मानों रौशनी गिरी और कुछ इन शब्दों में समझ पड़ा, पुरुष और स्त्री मन के सोचने के भिन्न तरीकों के बीच बहता जीवन…
वह चाहती है तुम उसे जीतकर अधिकार में ले लो।
और वह तुम्हारे समर्पण की अपेक्षा करता है।।
दो समानान्तर प्रतीक्षा बिन्दुओं के बीच अठखेलियाँ कर जो बहता है वह जीवन है।
वही जीवन है।।
इस ऑडियो में सुनिएगा। समीर के शब्दों को आवाज़ दी है- नीलेश द्विवेदी ने।
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