सांकेतिक तस्वीर
टीम डायरी
‘श्रमेव जयते’ अशुद्ध, ‘श्रमेव जयते’ कष्टकर, ‘श्रमेव जयते’ चिन्ताजनक, ‘श्रमेव जयते’ हास्यास्पद। भारत सरकार की ओर से दिए गए नारे पर यह टिप्पणियाँ देश के जाने-माने संस्कृतविद् नित्यानन्द मिश्र ने की हैं। उन्होंने यह तीखी टिप्पणियाँ क्यों कीं? इसके जवाब के लिए उन्हीं का वीडियो देख सकते हैं, जो नीचे दिया गया है।
इस वीडियो के अंत में नित्यानन्द जी ने एक सवाल भी किया है कि संस्कृत और भारतीय भाषाओं का ख्याल भारत सरकार नहीं रखेगी तो कौन रखेगा? जवाब भारत सरकार को देना है। यद्यपि ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह इस बारे में गम्भीरता से सोचेगी। कारण? देशभर के सरकारी तंत्र में ऐसे अफसरों की भरमार है, जिनका न तो भारतीय भाषाओं से कोई ज्यादा सरोकार है और न उन्हें देश की संस्कृति की ज्यादा समझ है। इसीलिए वे इस तरह की गलतियाँ लगातार करते रहते हैं और उनके माथे पर शिकन तक नहीं आती!!
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(नोट : इस वीडियो की तरफ #अपनीडिजिटलडायरी का ध्यान टीम डायरी के सदस्य समीर शिवाजीराव पाटिल ने दिलाया है।)
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