टीम डायरी
राजस्थान के जयपुर से एक दिलचस्प जानकारी अभी-अभी सुर्खियों में आई है। यह जानकारी जितनी ‘रोचक-सोचक’ है, उतनी ही ‘सरोकार’ से जुड़ी भी, क्योंकि यह आकर्षक अंदाज में हमें हमारी जड़ाें से, हमारी जमीन से जोड़ने की अपील करती है। दरअसल, जयपुर में अभी तीन साल पहले ही सूचना-तकनीक क्षेत्र की नई कम्पनी (स्टार्टअप) स्थापित हुई है। ‘वंशिव टेक्नोलॉजीज’ नाम है इसका। जाहिर तौर पर नई उम्र के राजस्थानी युवाओं ने इसे शुरू किया है। ये लोग सूचना-तकनीक से जुड़ी अपनी विशेषज्ञता वाली सेवाएँ देने का इरादा रखते है, दे भी रहे हैं।
लेकिन क्या बस इतना ही? नहीं, ये युवा अपनी नई सोच के साथ समाज में कुछ सकारात्मकता भी जोड़ने का मंशा पाले हुए हैं। इस कम्पनी के संस्थापकों में से एक का नाम है गौरव क्षेत्रपाल। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली है। इसमें अपनी कम्पनी की मिसाल देते हुए लोगों से अपील की है कि वे अपने व्यावसायिक उपक्रमों में शहर की विरासत का सम्मान करें। जिस तरह से भी सम्भव हो, उसे मान्यता दें। उन्होंने ऐसा किया भी है।
कैसे किया है? उन्होंने अपनी कम्पनी के दफ्तर के अलग-अलग हिस्सों का नामकरण जयपुर शहर के जाने-माने स्थलों के नाम पर कर रखा है। जैसे- सभाकक्ष का नाम ‘हवा महल’, भोजन-कक्ष का नाम ‘चौपाटी’, आपसी मेल-जोल के लिए जन्मदिन, आदि के आयोजन जिस कक्ष में होते हैं, उसे ‘जयगढ़’, पूजा-पाठ जैसे आयोजनों वाला स्थल ‘गोविंद देव जी’, आदि। ऐसे ही और भी हैं। अब जरा देखिए, इस दफ्तर में कर्मचारियों के लिए संदेश का प्रसार किस तरह से होता है- “हवा महल में कोई जरूरी जानकारी दी जानी है, तुरंत पहुँचो”, ‘जयगढ़ में जन्मदिन का आयोजन है, जल्दी से आओ’, ‘चौपाटी पर लजीज नाश्ता लग चुका है, देर न करो’ ‘गोविंद देव जी में पूजा शुरू होने वाली है, फटाफट आ जाओ सभी लोग।” ऐसे संदेश मिलते ही सब बताई हुई जगह पर जुट जाते हैं।
इस बारे में गौरव बताते हैं, “मैं जब अन्य कम्पनियों में नौकरी किया करता था, तो अक्सर देखता था कि वहाँ दफ्तर के सभी अंदरूनी हिस्सों के नाम अंग्रेजियत से प्रभावित हैं। इस तरह के नाम मुझे कभी उस शहर से जोड़ते नहीं थे, जहाँ मैं काम कर रहा था। तभी से मेरे दिमाग में यह विचार था कि अपने शहर, अपनी विरासत को दफ्तरों के भीतर भी किसी तरह से मान्यता मिलनी ही चाहिए। सो, अपनी कम्पनी शुरू करते ही इसमें कुछ शुरुआती कामों में से एक मैंने यह भी कर दिया।” बेशक, अच्छा किया गौरव जी। ऐसा सिर्फ हम नहीं, कई लोग कह रहे हैं।
