भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले दोस्त होते थे, अब आमने-सामने हैं।
निकेश जैन, इन्दौर मध्य प्रदेश
अमेरिका ने भारत से निर्यात होने वाली कई वस्तुओं पर 50% सीमा शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा की है। इसे लेकर कई लोग चिन्ता जता रहे हैं। जबकि सही मायने में देखें तो यह कोई विशेष चिन्ता की बात होनी नहीं चाहिए। कारण मैं बताता हूँ। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि सालों-साल से अमेरिका हमें इस 50% शुल्क से कहीं ज्यादा नुकसान पहुँचा रहा है।
नुकसान शुरू होता है, तब से जब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे संस्थानों में भारत की जनता के करों के पैसों से (क्योंकि इन संस्थानों में रियायती शिक्षा दी जाती है) पढ़े छात्र-छात्राएँ पढ़-लिख कर अमेरिका चल देते हैं। वह भी चन्द पैसों के लालच में। वहाँ जाकर वे लोग अपनी शिक्षा का उपयोग अमेरिकी उद्योगों को लाभ पहुँचाने में करते हैं।उदाहरण- एमआरआई (मैगनेटिक रिजोनेंस इमेजिंग) मशीन जैसे एक चिकित्सा उपकरण का लेते हैं। अमेरिका ने यह उपकरण ऐसे ही लोगों की मदद से बनाया है।
इसके बाद अमेरिका ऐसे उपकरणों को हमें ही निर्यात करता है। भारत के अस्पतालों में शान से आयातित अमेरिकी उपकरण लगाए जाते हैं। फिर वहाँ आने वाले भारतीयों को बताया जाता है कि यह चूँकि अमेरिका से लाई गई मशीन है, इसलिए बहुत महँगी है। लिहाजा, इसकी लागत की भरपाई के लिए भारतीय मरीजों से मोटी रकम वसूलना मजबूरी है। बेचारे, भारत के नागरिक इसके बाद जीवनभर उस लागत की भरपाई के लिए अपनी जेब ढीली करते रहते हैं! मतलब, उन पर दोहरी मार पड़ती है इस तरह। पहले- अपनी प्रतिभाओं की पढ़ाई-लिखाई के लिए हर भारतीय अपने हिस्से का कर चुकाए। फिर यही प्रतिभाएँ विदेश जाकर जो तकनीकी नवाचार करें, जो मशीनें आदि बनाएँ, उन्हीं के आयातित उपयोग के लिए भारी-भरकम रकम और चुकाए।
यह उदाहरण एमआरआई मशीन तक सीमित न समझें। हवाई जहाजों के इंजन, मानवरहित विमान (ड्रोन), सॉफ्टवेयर तकनीक, आदि ऐसी लगभग सभी तकनीकी और उपकरणीय मामलों में यह मिसाल समान रूप से लागू होती है। अब तक लगभग 30-35 साल हो चुके हैं, तब से यही चल रहा है। इस तरह से भारतीय अब तक 50% से न जाने कितने प्रतिशत ऊपर शुल्क अपनी जेब से अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों को अदा कर चुके हैं, चुका रहे हैं। इसीलिए यह सवाल उठता है कि इस 50% शुल्क से डर कैसा?
दूसरी बात, हम चिन्ता किन देशों की कर रहे हैं? उनकी जो खुद दोमुँही नीतियाँ अपनाते हैं? अपने लिए कुछ और भारत जैसे देशेां के लिए कुछ? यह प्रश्न भी मैं तथ्यों के आधार पर कर रहा हूँ। हाल का एक और उदाहरण है। अमरिका के सहयोगी यूरोपीय संघ ने एक भारतीय ऊर्जा कम्पनी पर प्रतिबन्ध लगाने की घोषणा की है। क्यों? इस आधार पर कि वह भारतीय कम्पनी रूस से कच्चा तेल खरीद रही है।
अलबत्ता, इसमें दोमुँहापन देखिए, जिसे भारत की ओर से आधिकारिक तौर पर उजागर किया गया है। भारत सरकार ने कुछ दिन पहले तथ्यों सहित आधिकारिक बयान जारी किया है। इसमें बताया है कि यूरोपीय संघ ही नहीं, दुनियाभर को डराने-धमकाने वाला अमेरिका भी रूस से ही अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहा है। अन्य उत्पाद भी खरीद रहा है। वह भी अरबों डॉलर की रकम रूस को देकर। वहीं दूसरी तरफ, भारत पर आरोप लगाता है कि वह रूस से कच्चा तेल खरीदकर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में उसे मदद दे रहा है!
इन तथ्यों के साथ भारत ने अपने बयान में स्पष्ट कहा है कि बस, “अब बहुत हुआ”। मतलब, भारत सरकार ने तय कर लिया है कि वह “देश के सम्मान और उसके हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। किसी भी अनुचित और पक्षपाती दबाव को बर्दाश्त नहीं करेगी। बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों को बचाने, अपनी आर्थिक सुरक्षा और भारत के उद्योगों को संरक्षित रखने के लिए जो बन पड़ेगा, वह करेगी।”
मतलब देश का नेतृत्त्व अब बदले हुए तेवर में है। तो फिर सवाल उठता है कि एक नागरिक के तौर पर हम भी क्यों न बदलें? हम क्यों न अमेरिका और यूरोप का मोह छोड़ दें? वहाँ के उत्पाद, वहाँ की शिक्षा, आदि सभी चीजों से खुद को दूर कर लें? अपने देश में उच्च गुणवत्ता के उत्पाद बनाएँ? आला दर्जे की शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें? वातावरण को उन्नत करें? सच मानिए, अगर हमने यह कर दिखाया, तो वह दिन दूर नहीं, जब अमेरिका और यूरोपीय देश हम पर दबाव बनाने के बारे में सोच भी नहीं पाएँगे।
————-
निकेश के दो मूल लेख
𝗧𝗵𝗲𝗿𝗲 𝗶𝘀 𝗺𝘂𝗰𝗵 𝗯𝗶𝗴𝗴𝗲𝗿 𝘁𝗮𝗿𝗶𝗳𝗳 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮 𝗵𝗮𝘀 𝗽𝗮𝗶𝗱 𝘁𝗼 𝗨𝗦 – 𝟱𝟬% 𝗶𝘀 𝗻𝗼𝘁𝗵𝗶𝗻𝗴 𝗶𝗻 𝗳𝗿𝗼𝗻𝘁 𝗼𝗳 𝘁𝗵𝗮𝘁! Here is the story of that tariff folks:
First India loses an IIT graduate who studied on Indian tax money to US.
Then US innovates and builds an MRI machine with the help of that smart IIT graduate.
Then India imports that MRI machine to install it in a hospital.
Then Indians visit that hospital and find the cost of MRI exorbitantly high.
Then hospital tells them that this machine is imported from US and its very expensive hence they are trying to recover the cost
And Indians end up paying their post tax money to the hospital for that MRI.
Now replace that “MRI” with any other technology. Few examples – Aircraft Engine, Drones, Cutting edge software and much more
𝗧𝗵𝗮𝘁’𝘀 𝘁𝗵𝗲 𝘁𝗮𝗿𝗶𝗳𝗳 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮 𝗵𝗮𝘀 𝗯𝗲𝗲𝗻 𝗽𝗮𝘆𝗶𝗻𝗴 𝗳𝗼𝗿 𝗽𝗮𝘀𝘁 𝟯𝟱 𝘆𝗲𝗮𝗿𝘀! 𝗦𝘁𝗼𝗽 𝘁𝗵𝗮𝘁 𝗮𝗻𝗱 𝘆𝗼𝘂 𝘄𝗶𝗹𝗹 𝗻𝗲𝘃𝗲𝗿 𝗳𝗮𝗰𝗲 𝟱𝟬% 𝘁𝗮𝗿𝗶𝗳𝗳 𝗲𝘃𝗲𝗿!
————-
Finally, India called out US and EU’s bluff…. 👏👏
EU recently sanctioned an Indian energy company for buying Russian oil and US has been threatening India with its high tarrif.
And here India calls out their hypocrisy.
A formal statement issued by Indian government calling out EU and US purchases from Russia 😂.
Both are buying energy and other goods from Russia for billions of dollars and blaming India for funding the w*r.
Finally, India said enough is enough – the last line from the statement:
“In this background, the targeting of India is unjustified and unreasonable. Like any major economy, India will take all necessary measures to safeguard its national interests and economic security.”
Bravo!! This India is different…..
——-
(निकेश जैन, कॉरपोरेट प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी- एड्यूरिगो टेक्नोलॉजी के सह-संस्थापक हैं। उनकी अनुमति से उनका यह लेख अपेक्षित संशोधनों और भाषायी बदलावों के साथ #अपनीडिजिटलडायरी पर लिया गया है। मूल रूप से अंग्रेजी में उन्होंने इसे लिंक्डइन पर लिखा है।)
——
निकेश के पिछले 10 लेख
64- मैं खुश हूँ कि भारत ने बन्दूक की नोंक पर अमेरिका से व्यापार समझौता नहीं किया!
63- अतिथि देवो भव: – तो क्या उनके सामने हम ऐसे नाचने लगेंगे, वह भी दफ्तर में?
62- इसी गैरजिम्मेदार रवैये के कारण मैंने बोइंग के विमानों से यात्रा पूरी तरह ही बन्द कर दी है!
61- आपकी सेहत आपकी नौकरी से ज्यादा जरूरी है, ध्यान रखिए!
60- आरसीबी हादसा : उनकी नज़र में हम सिर्फ़ ‘कीड़े-मकोड़े’, तो हमारे लिए वे ‘भगवान’ क्यों?
59 – कभी-कभी व्यक्ति का सिर्फ़ नज़रिया देखकर भी उससे काम ले लेना चाहिए!
58- क्यों भारत को अब अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लाना ही होगा?
57- ईमानदारी से व्यापार नहीं किया जा सकता, इस बात में कितनी सच्चाई है?
56- प्रशिक्षित लोग नहीं मिल रहे, इसलिए व्यापार बन्द करने की सोचना कहाँ की अक्लमन्दी है?
55 – पहलगाम आतंकी हमला : मेरी माँ-बहन बच गईं, लेकिन मैं शायद आतंकियों के सामने होता!
देश में जनगणना होने वाली है। मतलब जनसंख्या कितनी है और उसका स्वरूप कैसा है,… Read More
जय जय श्री राधे Read More
अभी एक तारीख को किसी जरूरी काम से भोपाल से पन्ना जाना हुआ। वहाँ ट्रेन… Read More
भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर का उद्घाटन 13 फरवरी 2026 को हुआ। इसे… Read More
‘भ्रष्ट’ का अर्थ है- जब कोई अपने धर्म (कर्तव्य-पथ) से दूर हट जाए और ‘आचार’… Read More
ऐसी सूचना है कि अंग्रेजों की ईस्ट इण्डिया कम्पनी फिर दिवालिया हो गई और उसका… Read More