दीवाली ‘मनाते’ हुए उन लोगों की खुशियों का भी ध्यान रखें जो हमारी दीवाली ‘बनाते’ हैं!

जीनत जैदी, दिल्ली

‘दीवाली’ सुनने में कितना मिठास भरा शब्द है न? दीवाली एक ऐसा त्योहार है, जिसे मनाने के लिए किसी धर्म की जरूरत नहीं। इस देश का हर धर्म दीवाली मनाता है। दीवाली आते ही मिठाइयाँ और उपहार हर घर में पहुँच जाते हैं। फर्क नहीं पड़ता कि वह हिन्दू है या किसी और धर्म का।

हम सब दीवाली मनाने में इतने मग्न हो जाते हैं कि जीवन के अंधेरों को दीपकों की जगमगाहट में भूल जाते हैं। क्योंकि हम केवल दीवाली मनाते हैं, बनाते नहीं हैं। हाँ, हम दीवाली मनाते हैं, क्योंकि दीवाली बनाने वाले तो वे हाथ हैं जो इस त्योहार की तैयारियों में लगे होते हैं। कोई हाथ दीया बना रहा है, कोई मिठाइयाँ तैयार कर रहा है, कोई रंगोली के रंग बना रहा है, तो कोई रंग-बिरंगी बत्तियाँ सजा रहा है। 

यह त्योहार हमारे जीवन में खुशियों की बहार लेकर आता है। इसीलिए आप सभी से गुजारिश है कि इस दीवाली उन लोगों की खुशियों का भी ध्यान रखें, जो हमारी दीवाली बनाते हैं। 

जय हिन्द 

——- 

(ज़ीनत #अपनीडिजिटलडायरी के सजग पाठक और नियमित लेखकों में से है। दिल्ली से ही 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब उच्च शिक्षा के लिए कदम बढ़ा चुकी हैं। इस उम्र में ही अपने लेखों के जरिए बड़े मसले उठाती है। अच्छी कविताएँ लिखती है। लेखन में स्वाभाविक रुचि है और इसी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हैं) 

——-

ज़ीनत के पिछले 10 लेख 

37 – गरबा-डांडिया रात के समय और फिल्मी धुनों पर ही क्यों, जबकि…?
36 – इस दशहरे पर रावण संग ‘शूर्पणखा’ भी जलेगी…इन्दौर में, जो एक सीख दे जाएगी!
35 – मेरे जीवन का उद्देश्य क्या? मैंने सोचा तो मुझे मिला!
34- जो हम हैं, वही बने रहें, उसे ही पसन्द करने लगें… दुनिया के फ़रेब से ख़ुद बाहर आ जाएँगे!
33- क्या ज़मीन का एक टुकड़ा औलाद को माँ-बाप की जान लेने तक नीचे गिरा सकता है?
32 – इंसान इतना कमज़ोर कैसे हो रहा है कि इस आसानी से अपनी ज़िन्दगी ख़त्म कर ले?
31 – कल स्कूल आएगी क्या? ये सफर अब ख़त्म हुआ!
30 – कैंसर दिवस : आज सबसे बड़ा कैंसर ‘मोबाइल पर मुफ़्त इन्टरनेट’ है, इसका इलाज़ ढूँढ़ें!
29 – choose wisely, whatever we are doing will help us in our future or not
28 – चन्द पैसों के अपनों का खून… क्या ये शर्म से डूब मरने की बात नहीं है?

सोशल मीडिया पर शेयर करें
From Visitor

Share
Published by
From Visitor

Recent Posts

जनगणना हो रही है, जनसंख्या बढ़ रही है और आंध्र में आबादी बढ़ाने वालों को ‘इनाम’!

देश में जनगणना होने वाली है। मतलब जनसंख्या कितनी है और उसका स्वरूप कैसा है,… Read More

17 hours ago

एक यात्रा, दो मुस्लिम ड्राइवर और दोनों की सोच….सूरत-ए-हाल गौरतलब!

अभी एक तारीख को किसी जरूरी काम से भोपाल से पन्ना जाना हुआ। वहाँ ट्रेन… Read More

3 days ago

सेवा-तीर्थ में ‘भारतीय भाषाओं’ की सेवा नहीं हुई, आगे शायद ही हो!! वीडियो से समझिए!

भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर का उद्घाटन 13 फरवरी 2026 को हुआ। इसे… Read More

6 days ago

भ्रष्ट-आचार अब एक शिष्ट-विचार, इसे खत्म करना मुश्किल, दो उदाहरणों से समझिए कैसे?

‘भ्रष्ट’ का अर्थ है- जब कोई अपने धर्म (कर्तव्य-पथ) से दूर हट जाए और ‘आचार’… Read More

7 days ago

ईस्ट इण्डिया कम्पनी फिर ‘दफन’, और ‘गुलाम-सोच’ लिखती है- “सूरज डूब गया”!

ऐसी सूचना है कि अंग्रेजों की ईस्ट इण्डिया कम्पनी फिर दिवालिया हो गई और उसका… Read More

1 week ago